भाभी ब्याह कर आई थी तो मुश्किल से 15 बरस की होगी। आजाद फिजा में पली, हिरिनयों की तरह कुलाचें भरती। चार-पाँच साल के अंदर भाभी को घिस घिसाकर वाकई सब ने ग्रहस्थन बना दिया। दो -तीन बच्चों की माँ बन कर भद्दी और ठुस्स हो गई। भैया को मेकअप ,फैशनेबल कपड़े, कटे बालों से नफरत थी ।भाभी ने भी बनना- सँवरना छोड़ दिया। लेकिन फैशनेबल शबनम को देखकर भैया मंत्रमुग्ध हो गए और भाभी को तलाक देकर उसे अपनी बेगम बना लिया। कुछ ही सालों में शबनम भी वैसे ही फैल गई। भैया एक बार फिर मिस्री रक्कासा पर फिदा हो गए दूसरी नई- नवेली लचकती हुई लहर, उनकी पथरीली बाँहों में समाने के लिए बेचैन और बेकरार थी।
बाँदी यानी दासी, गुलाम। जिसकी अपनी कोई मर्जी नहीं होती, अपना कोई अस्तित्व नहीं होता। वो खरीदी जाती है, घर सँभालने के लिए ।हर जरूरत को पूरा करने के लिए। वह पत्नी की तरह सारे फर्ज निभाती है। लेकिन पत्नी का दर्जा नहीं पाती । उसे वह इज्जत ,वह ओहदा नहीं मिलता । आखिर क्यों ?और नवाबों के शौक, उनकी रंगीन तबीयत , बड़े ऊँचे खानदान की बहू बेटियों की रंगरलियाँ। सब छुप जाते हैं उनके दौलत के परदे के पीछे । तो क्या गरीब होना इतना बड़ा जुर्म है? अभिशाप है?
जब किसी औरत के सिर से उसके पति का साया उठ जाता है तो समाज, बिरादरी, रिश्तेदारी में उसकी कोई इज्जत नहीं रह जाती ।मान सम्मान नहीं रह जाता है । हर शख्स उसे बिना तनख्वाह का नौकर मान लेता है और ऐसे हालात के मारे बच्चे की परवरिश ऊपर वाले के हाथ होती है। कल्लू की जिंदगी में ऐसा मोड़ आया कि उसकी जिंदगी ही बदल गई।
कहते हैं कि जिंदगी बेशक छोटी हो लेकिन इज्जत वाली होनी चाहिए और अगर जिंदगी लंबी हुई मगर बिना इज्जत की तो किस काम की? लोगों के टुकड़ों पर पलना, दूसरों की जूठन खाना, भीख माँगना , चोरी करना यह कोई जिंदगी तो नहीं । जिस उम्र में अपनों के सहारे की जरूरत होती है उस उम्र में अगर अपने ही अकेला छोड़ जाए तो——।
कुबरा जवान थी। कौन कहता था कि कुबरा जवान थी ? वह तो जैसे बिस्मिल्लाह के दिन से ही अपनी जवानी की आमद की सुनावनी सुनकर ठिठक कर रह गई थी। ना जाने कैसी जवानी आई थी, कि ना तो उसकी आँखों में किरने थी। ना उसके रुखसारों के ऊपर जुल्फें परेशान हुई। ना उसके सीने पर तूफान उठे ।और ना उसने सावन भादो की घटाओं से मचल-मचल कर प्रीतम यह सावन माँगे।
एक लड़की के लिए मायका क्या होता है ? सिर्फ वही जानती है । मायके के नाम से ही आँखें भर आती हैं। सारा बचपन, सखियाँ,सावन, माँ-बाबूजी, भईया, बहन आँखों में तैर जाते है।मायके जाने के नाम से ही ज़मीन पर पैर नही पड़ते है।वक्त काटे नही कटता है।क्या कोई ऐसा होगा , जो मायके न जाने की कसम खाले ? श्रुति ने मायके न जाने की कसम खाई थी। आखिर क्यों ?
पश्चिम में रंगो का उत्सव देखते देखते जैसे ही मुँह फेरा कि नौकर सामने आ खड़ा हुआ, कि एक वृद्ध मुझसे मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मेरी कविता की पहली पंक्ति ही लिखी गई थी । मैं खिसिया गई ।कुछ खींझी सी उठी। कण्व ऋषि जैसे सफेद बाल और दूधफेनी जैसी सफेद दाढ़ी वाला मुख । मैंने कहा कि आपको पहचानती नहीं ? तो उन्होंने उत्तर दिया कि जिस के द्वार पर आया है उसका नाम जानता है, इससे अधिक माँगने वाले का परिचय क्या होगा? मेरी पोती आपसे मिलने के लिए विकल है । मैं आश्चर्य से वृद्ध की ओर देखती रह गई।
रामअवतार लाम पर से वापस आ रहा था। बूढ़ी मेहतरानी अब्बा मियां से चिट्ठी पढ़वाने आई थी। अभी उसकी शादी को रचाए साल भर भी न बीता था कि राम अवतार की पुकार आ गई। ब्याह कर आई तो क्या मसमसी थी गौरी नाम की गौरी थी पर कमबख्त स्याह बहुत थी। हाँ आवाज में बला की कूक थी। गौरी क्या थी, बस एक मरखना लंबे सींग वाला बजार था, कि छुटा फिरता था । रत्तीराम के आने के बाद वह बिल्कुल बदल गई ।लेकिन गाँव वालों को दाल में कुछ काला नजर आ रहा था। सब राम अवतार के लौटने का इंतजार कर रहे थे।
अनकहा सच – Malti Joshi (मालती जोशी) – Arti Srivastava
अपना घर अपना ही होता है फिर चाहे उसमें कितनी कमियाँ क्यों ना हो । लेकिन घर बनता है परिवार से और परिवार की मुख्य स्तंभ होती है माँ । माँ जिसकी हर खुशी हम से जुड़ी होती है और जब हम माँ से दूर जाते हैं तो वह पल – पल हमारे लौट आने की राह देखती है। हमारे सुखी जीवन के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती है। लेकिन कभी-कभी हमें समझने में बहुत देर हो जाती है।
ताहदे नज़र एक बयाबान सा क्यू हैं – Malti Joshi (मालती जोशी) – Arti Srivastava
एक औरत जीवन साथी से धोखा खाने के बाद अपनी औलाद से उम्मीदें रखती है । लेकिन वही औलाद जब मुँह मोड़ ले , तो उसके पास जीने के लिए क्या रह जाता है ? रेखा ने हिम्मत नहीं हारी है । उसे उम्मीद है कि शायद एक दिन उसका बेटा ,सक्षम उसके पास लौट आएगा ।
जब मन अपनी प्रेयसी के बिछड़ने पर शिथिल हो जाता है ,तो पुनः उसे ऊर्जावान बनाने के लिए उन साथ बिताए हुए पलों को याद कर लेना चाहिए | इसी तरह की भावना से ओतप्रोत है, कविता की यह पंक्तियां….
लेफ्टिनेंट सागर शिव सागर जाना चाह रहा है मूसलाधार बारिश के कारण और रास्ते में कीचड़ हो जाने के कारण उसकी गाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रही है |रैन बसेरा करने के लिए किसी जगह की तलाश कर रहा है |उसे एक इमारत दिखाई देती है किंतु इमारत का क्या रहस्य है उसके पीछे क्या कहानी है जानने के लिए सुनते हैं अज्ञेय के द्वारा लिखी गई कहानी जय-दोल, अमित तिवारी की आवाज में के द्वारा लिखी गई कहानी
कहानी की नायिका का नाम रोहिणी है | रोहिणी नंदन भाँट की लडक़ी है। लेखक के दोस्त जीवन से रोहिणी की मुलाकात होती है, उसके बाद से रोहिणी पूरे गांव में घूम- घूम कर गीत गाती है| आखिर उसके गीत में ऐसा क्या है ?जीवन से उसका क्या संबंध है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जयशंकर प्रसाद द्वारा लिखी गई कहानी ग्राम- गीत, निधि मिश्रा की आवाज में
मंगल भंगी भूँगी दाई का बेटा है ,जबकि सुरेश जमीदार बाबू महेशनाथ का बेटा है |एक समय भूँगी ने अपने बेटे मंगल से ज्यादा सुरेश को अपना दूध पिला कर उसकी देखभाल की, किंतु क्या भूँगी की मृत्यु के बाद मंगल को जमीदार महेश नाथ के यहां से अपनी मां द्वारा सुरेश को पिलाया दूध का दाम मिल पाता है या फिर उसे एक अछूत के रूप में देखा जाता है| प्रेमचंद जी की बेहद भावपूर्ण कहानी है दूध का दाम, जिसे आवाज दी है सुमन वैद्य जी ने
गौरा शूद्र जाति की गरीब मां की बेटी है | जिसकी शादी मंगरू नामक एक परदेसी से हो जाती है, लेकिन अचानक मंगरू गौरा को छोड़कर बिना कुछ बताए वहां से चला जाता है, कई साल बाद अचानक एक बूढ़ा व्यक्ति गौरा के पास आता है और यह कहकर कि मंगरू ने उसे बुलाया है अपने साथ कोलकाता ले जाता है किंतु बाद में जब गौरा कोलकाता पहुंचती है तो वह बहुत अचंभित हो जाती है आखिर ऐसा क्या हुआ गौरा के साथ?क्या मंगरू ने वापस गौरा को अपने पास बुलाया था ? बूढ़ा व्यक्ति कौन था ?पूरी कहानी को जाने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानी शुद्र सुमन वैद्य जी की आवाज में..
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Rajesh
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Veena R Srivastava
Swastika Agnihotri
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Nana Lal
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