जब मैंने पहली बार उन्हें देखा तो वह रहमान भाई की खिड़की में बैठी लंबी-लंबी गालियाँ और कोसने दे रही थी । उस दिन पहली दफा मुझे मालूम हुआ कि हमारी इकलौती सगी फूपी, बादशाही खानम है। हर ईद- बकरीद को मेरे अब्बा मियां बेटों को लेकर सीधे फूपी अम्मा के यहाँ कोसने और गालियाँ सुनने जाया करते। मरते दम तक भाई- बहन का मिलन न हुआ । जब अब्बा मियां पर फालिश का चौथा हमला हुआ और बिल्कुल ही वक्त आ गया तो हलहलाती, छाती कूटती, सफेद पहाड़ की तरह भूचाल लाती हुई बादशाही खानम उसी ड्यूटी पर उतरी जहाँ अब तक उन्होंने कदम नहीं रखा था।
‘साहब मर गया’ जयंत राम ने बाजार से लाए हुए सौदा के साथ यह खबर लाकर दी। वह काना साहब -जैक्सन । वह मजे से सक्खू बाई को झोंटे पकड़कर पीटता था। फ्लोमीना और पीटू को मारता था ।मैंने एक दिन मौका पाकर सक्खू बाई को पकड़ा’ क्यों कमबख्त ! यह पाजी तुम्हें मारता है । तुझे शर्म नहीं आती? रोज कभी मारता है बाई? वह बहस करने लगी। तुझे शर्म नहीं आती सफेद चमड़ी वाले की जूतियाँ सहती है । इन लुटेरों ने हमारे मुल्क को कितना लूटा है? तुम्हें इसका इतना दर्द क्यों होता है? काहे को नहीं होगा दर्द? वह हमारा मर्द है ना ! वह शक्ल से रोबीला और खूबसूरत था। ऊँची पहुँच वाले बाप की बेटी डोर्थी से शादी करने के बाद भी उसका छिछोरापन कम ना हुआ।
जब किसी औरत के सिर से उसके पति का साया उठ जाता है तो समाज, बिरादरी, रिश्तेदारी में उसकी कोई इज्जत नहीं रह जाती ।मान सम्मान नहीं रह जाता है । हर शख्स उसे बिना तनख्वाह का नौकर मान लेता है और ऐसे हालात के मारे बच्चे की परवरिश ऊपर वाले के हाथ होती है। कल्लू की जिंदगी में ऐसा मोड़ आया कि उसकी जिंदगी ही बदल गई।
बहुत ज्यादा सुख भी नींद उड़ा देता है ,तो बहुत ज्यादा दुख भी ।कभी मखमल के बिस्तर पर भी नींद नहीं आती ,तो कभी जमीन पर भी चैन की नींद आ जाती है। दिल की गहराई में छुपा कोई जख्म भी कभी सोने नहीं देता और दिल की दबी ख्वाहिश भी नींद चुरा लेती है।
बहुत ज्यादा सुख भी नींद उड़ा देता है ,तो बहुत ज्यादा दुख भी ।कभी मखमल के बिस्तर पर भी नींद नहीं आती ,तो कभी जमीन पर भी चैन की नींद आ जाती है। दिल की गहराई में छुपा कोई जख्म भी कभी सोने नहीं देता और दिल की दबी ख्वाहिश भी नींद चुरा लेती है।
दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें जिंदगी अपनी शर्तों पर जीने की आदत होती है। वह किसी की परवाह नहीं करते। लोग क्या कहेंगे ? क्या सोचेंगे? अगर किसी को बुरा लगा तो ? वगैरह -वगैरह जैसे प्रश्नों के बारे में तो सोचते ही नहीं। लाख मुश्किलें आएँ, वह अपने तरीके से उसका सामना करते हैं। ऐसे लोगों को दुनिया की परवाह नहीं होती। लेकिन कुछ तो होता है, जो उनकी शख्सियत को भी हिला देता है। लेकिन क्या?
कुंवर अमरनाथ के बुंदेलखंड जाने की बात सुनकर मनोरमा का मन अनिष्ट शंका से घिर गया । वह कुंवर के साथ चलने की हठ्ठ करने लगी ।कुंवर ने वचन दिया कि वह प्रतिदिन एक पत्र लिखेंगे और जल्द लौटेंगे ।किंतु कुछ समय पश्चात पत्र आने बंद हो गए । मनोरमा को बुरे बुरे ख्याल आने लगे वह स्वयं कुंवर के पास जाती है लेकिन रेल -दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो जाती है और उसकी कुछ अनिष्ट होने की शंका सत्य साबित होती है।
कहते हैं कि जिंदगी बेशक छोटी हो लेकिन इज्जत वाली होनी चाहिए और अगर जिंदगी लंबी हुई मगर बिना इज्जत की तो किस काम की? लोगों के टुकड़ों पर पलना, दूसरों की जूठन खाना, भीख माँगना , चोरी करना यह कोई जिंदगी तो नहीं । जिस उम्र में अपनों के सहारे की जरूरत होती है उस उम्र में अगर अपने ही अकेला छोड़ जाए तो——।
किसी की अमानत हड़प कर इंसान सुखी नहीं रह सकता। इसका उदाहरण है, बाबू हरिदास। मगन सिंह उनके ईद के पजावे पर काम करने वाला बालक था, जिस पर उन्हें बड़ी दया आती थी । किंतु जब उन्हें मदन सिंह के पुरखों द्वारा गाए गए खजाने का पता चला तो उनकी नियत खराब हो गई और उसी गड़े हुए खजाने के लालच में वे चल बसे। वही हाल उनके सुपुत्र प्रभु दास का हुआ किंतु वह भी मगन सिंह के खजाने को भोग ना सका और अंत में खजाना मगन सिंह को मिल गया।
उस दिन मैं बिना कुछ सोचे हुए ही भाई निराला जी से पूछ बैठी थी,” आपके किसी ने राखी नहीं बांधी?” ” कौन बहन हम जैसे भुक्कड़ को भाई बनावेगी?” मे, उत्तर देने वाले के एकांकी जीवन की व्यथा थी, या चुनौती ? यह कहना कठिन है ।पर जान पड़ता है किसी अन्य चुनौती के आभास ने ही मुझे उस हाथ के अभिषेक की प्रेरणा दी। उनके अस्त-व्यस्त जीवन को व्यवस्थित करने के असफल प्रयास का स्मरण कर मुझे आज भी हंसी आ जाती है। संयोग से उन्हें कहीं से ₹300 मिले। उन्होंने मुझे अपने खर्च का बजट बनाने का आदेश दिया। अस्तु : नमक से लेकर नापित तक और चप्पल से लेकर मकान के किराए तक का अनुमान- पत्र मैंने बनाया। उन्हें पसंद आया ।पर दूसरे ही दिन वह सवेरे आ पहुँचे। ₹50 चाहिए किसी विद्यार्थी की परीक्षा शुल्क भरना है वरना—–
जब किसी औरत के सिर से उसके पति का साया उठ जाता है तो समाज, बिरादरी, रिश्तेदारी में उसकी कोई इज्जत नहीं रह जाती ।मान सम्मान नहीं रह जाता है । हर शख्स उसे बिना तनख्वाह का नौकर मान लेता है और ऐसे हालात के मारे बच्चे की परवरिश ऊपर वाले के हाथ होती है। कल्लू की जिंदगी में ऐसा मोड़ आया कि उसकी जिंदगी ही बदल गई।
हमारे पूर्व के साहित्य में और पश्चिम के साहित्य में स्पष्ट अंतर है उसे लेखक निर्मल वर्मा जी के द्वारा अपनी विचारधारा में साफ तौर पर स्पष्ट किया गया है उसे समझने का प्रयास करते हैं इस विचार गाथा में पूर्व एवं पश्चिम सुमन वैद्य जी की आवाज में
One day ‘pyari’ who was working as servant in Girish Mathur’s house, who was surrogate to landlord, escaped herself from his bad eye and took the shelter in old and respected Hariharan’s house in same village. Girish asked him to send her back but Ha
हिंदुस्तान पाकिस्तान बंटवारे के बाद जो कि अमृतसर जा रही है कुछ मुसाफिर जिसमें तीन पठान, सरदार ,बाबू बैठे हुए हैं एक बुढ़िया बैठी हुई है वजीराबाद स्टेशन में हलचल होने लगती है जैसे कहीं दंगा हुआ हूं पठान चढ़े हुए मुसाफिरों के साथ बदसलूकी करने लगता है बाकी यात्री में बैठे हुए हैं अमृतसर पहुंचती है पठानों से बदला लेने लगता है किस लिए ऐसा क्या कारण है इसके पीछे
अमृता प्रीतम की लिखी हुई इस नज़्म “दुआ ” में ऐसा क्यों महसूस होता है की कोई दुआ कबूल हो या ना हो लेकिन इस नज़्म में मांगी गई दुआ को जरूर कबूल होना चाहिए |आखिर क्या है वह दुआ उसे जानने के लिए सुनते हैं अनुर्वी कीआवाज में अमृता प्रीतम की लिखी हुई नज़्म “दुआ “में”…
पोस्टमास्टर साहब के तबादले के लिए संघर्ष और उनके चले जाने की बात सुनकर अधीर हो उठी उनकी सेविका रतन की कहानी।
Reviews for: Bichho fufi (बिच्छू फूफी)
Average Rating
Nana Lal
Nana Lal
Rajesh
rs6305344799
rs6305344799