आज छठा दिन था। बच्चे स्कूल छोड़े घरों में बैठे ,अपनी और सारे घर वालों की जिंदगी मुसीबत किए दे रहे थे । कोई और मामूली दिन होता तो कमबख्तों से कहा जाता कि बाहर मुँह काला करके गदर मचाओ। लेकिन चंद रोज से शहर का वातावरण इतना खराब था कि शहर के सारे मुसलमान एक तरह से नजरबंद थे। झटपट सामान बँधने लगा। अम्मा ने जाने से साफ इनकार कर दिया। लाख समझाने के बावजूद वे राजी़ न हुई । सारा घर खाली हो गया ।और अम्मा उजाड़ सहन में आकर खड़ी हुई तो उनका बूढ़ा दिल नन्हे से बच्चे की तरह सहम कर कुम्हला गया।
जब किसी औरत के सिर से उसके पति का साया उठ जाता है तो समाज, बिरादरी, रिश्तेदारी में उसकी कोई इज्जत नहीं रह जाती ।मान सम्मान नहीं रह जाता है । हर शख्स उसे बिना तनख्वाह का नौकर मान लेता है और ऐसे हालात के मारे बच्चे की परवरिश ऊपर वाले के हाथ होती है। कल्लू की जिंदगी में ऐसा मोड़ आया कि उसकी जिंदगी ही बदल गई।
अम्मा जब आगरा जाने लगी तो हफ्ता भर के लिए उन्होंने मुझे बेगम जान के पास छोड़ दिया। नवाब साहब , बेगम जान से शादी करके कुल साज़-ओ- सामान के साथ ही घर में रखकर भूल गए ।बेगम जी जान छोड़ कर बिल्कुल ही यासो हसरत की पोट ही बन गई। रब्बो ने उन्हें नीचे गिरते- गिरते संभाल लिया साथ खाती, साथ उठती -बैठती और माशाअल्लाह! साथ ही सोती थी। रब्बो और बेगम जान आम जलसों और मज़मूओ की दिलचस्प गुफ्तगू का मौजूँ थी। जहाँ उन दोनों का जिक्र आया और कहकहे उठे। लोग जाने क्या-क्या चुटकुले गरीब पर उड़ाते।
भाभी ब्याह कर आई थी तो मुश्किल से 15 बरस की होगी। आजाद फिजा में पली, हिरिनयों की तरह कुलाचें भरती। चार-पाँच साल के अंदर भाभी को घिस घिसाकर वाकई सब ने ग्रहस्थन बना दिया। दो -तीन बच्चों की माँ बन कर भद्दी और ठुस्स हो गई। भैया को मेकअप ,फैशनेबल कपड़े, कटे बालों से नफरत थी ।भाभी ने भी बनना- सँवरना छोड़ दिया। लेकिन फैशनेबल शबनम को देखकर भैया मंत्रमुग्ध हो गए और भाभी को तलाक देकर उसे अपनी बेगम बना लिया। कुछ ही सालों में शबनम भी वैसे ही फैल गई। भैया एक बार फिर मिस्री रक्कासा पर फिदा हो गए दूसरी नई- नवेली लचकती हुई लहर, उनकी पथरीली बाँहों में समाने के लिए बेचैन और बेकरार थी।
कुबरा जवान थी। कौन कहता था कि कुबरा जवान थी ? वह तो जैसे बिस्मिल्लाह के दिन से ही अपनी जवानी की आमद की सुनावनी सुनकर ठिठक कर रह गई थी। ना जाने कैसी जवानी आई थी, कि ना तो उसकी आँखों में किरने थी। ना उसके रुखसारों के ऊपर जुल्फें परेशान हुई। ना उसके सीने पर तूफान उठे ।और ना उसने सावन भादो की घटाओं से मचल-मचल कर प्रीतम यह सावन माँगे।
कहते हैं कि जिंदगी बेशक छोटी हो लेकिन इज्जत वाली होनी चाहिए और अगर जिंदगी लंबी हुई मगर बिना इज्जत की तो किस काम की? लोगों के टुकड़ों पर पलना, दूसरों की जूठन खाना, भीख माँगना , चोरी करना यह कोई जिंदगी तो नहीं । जिस उम्र में अपनों के सहारे की जरूरत होती है उस उम्र में अगर अपने ही अकेला छोड़ जाए तो——।
कहानी एक स्वार्थपरस्त व्यक्ति अनाथ बाबू की है | अनाथ बन्धु का विवाह विन्ध्यवासिनी से हुआ जोकि सुन्दर सद्चरित्रा है किन्तु अनाथ बाबू को हिन्दुस्तानी नाम से घृणा थी। पत्नी को भी वह विशेषताओं और सुन्दरता में अपने योग्य न समझते थे। अनाथ बाबू ससुराल के पैसों से विदेश जाना चाहते हैं |क्या अनाथ बाबू की यह मंशा पूरी हो पाती है? विंध्यवासिनी के जीवन में आगे क्या घटित होता है? इस पूरी कहानी को जानने के लिए सुनते हैं रविंद्र नाथ टैगोर के द्वारा लिखी गई कहानी नई रोशनी, शिवानी आनंद की आवाज में..
कर्ण और दुर्योधन की मित्रता का उल्लेख महाभारत में मिलता है। कर्ण दुर्योधन के आश्रय में रहता था। दुर्योधन और कर्ण की मित्रता किस प्रकार हुई? दुर्योधन का कर्ण से मित्रता करने के पीछे क्या प्रयोजन रहा और कर्ण ने किस प्रकार अपनी यह मित्रता निभाई |इस पूरे प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी कर्ण दुर्योधन की मित्रता शिवानी आनंद की आवाज में…
रायचरण जो कि अनुकूल बाबू के यहां नौकर है बड़े ही चाव और अपनेपन से उनके छोटे बच्चे को संभालता है। एक दिन बच्चा ज़िद करके उसे फूल तोड़ने को भेज स्वयं नदी में चला जाता है और फिर कभी वापस नहीं आता। रायचरण जिसे नौकरी से निकाल दिया गया है अपने बच्चे को अपने मालिक के बच्चे की तरह पाल कर उन्हें उसे भेंट कर देता है।
निशिकांत पंडित नंद राम बाबू जी के यहां किराएदार के तौर पर रह रहे हैं |पंडित जी की बड़ी-बड़ी आंखें हमेशा निराशा ,अभिमान और क्रोध से तमतमायी सी रहती है अपनी मान्यताओं किसी भी कीमत पर समझौता नहीं कर सकते और पंडित जी स्वभाव कुछ बेबाक किस्म का है इस वजह से सभी लोग उनसे कन्नी काटते हैं |निशिकांत भी पंडित जी के स्वभाव को से हमेशा खिन्न सा रहता है किंतु निशिकांत के जीवन में ऐसी घटना घटी है तब उन्हें सिवाय पंडित जी के अलावा कोई साथ देने वाला नहीं नजर आया |ऐसा क्या हुआ था निशिकांत के जीवन में ?पंडित जी ने किस प्रकार निशिकांत की उस समय मदद करी ? विष्णु प्रभाकर के द्वारा लिखी गई रोचक कहानी पंडित जी ,जानते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में
वृद्धावस्था में सुख-दु:ख की भावना परिवर्तित हो जाती है। तरुणावस्था में आडम्बर अथवा प्रदर्शन की जो चाह रहती है वह वृद्धावस्था में नहीं रह जाती| इसी प्रकार न क्षणिक सुखों से वृद्धों को उल्लास होता है और न क्षणिक दु:खों से विषाद। न तो कोई सफलता उन्हें उत्तेजित करती है और न कोई असफलता हताश। संसार की कठोरता और कर्तव्य की गुरुता से परिचित हो जाने से उनमें विश्वास के स्थान में अविश्वास आ जाता है। वे संयत हो कर भी संशयालु हो जाते हैं। इसी से वे तरुणावस्था के मोह में पड़ना नहीं चाहते।
यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसका विवाह मामा द्वारा दहेज की मांग करने से टूट जाता है और उसके लंबे समय बाद उसे जिस अपरिचित लड़की से प्रेम होता है, वह लड़की कोई और नहीं बल्कि वही होती है।
बड़े बुजुर्ग घर की शान होते हैं उनकी बातों में एक तजुर्बा होता है उनके सानिध्य में सब कुछ कितना सरल हो जाता है बच्चों के लिए उनकी दादी तो पूरा स्नेह का खजाना होती है इसी रिश्ते के मधुर संबंधों काअवलोकन कराती हुई कविता है दादी पल्लवी की आवाज में
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Rajesh