क्या बड़ी उम्र में होने वाली शादी में
सपनों और भावनाओं की जगह नहीं बचती?
क्या विवाह सिर्फ़ ज़िम्मेदारियों,
समझौतों और ज़रूरतों का नाम भर है?
और क्या उम्र बढ़ जाने के साथ
मन का साथ, अपनापन और सम्मान चाहने का अधिकार भी खत्म हो जाता है?
अंजू इन्हीं सवालों के बीच अपनी ज़िंदगी जी रही थी।
उम्र बढ़ रही थी, इसलिए भाई ने अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए उसकी शादी दो बच्चों के विधुर पिता से कर दी।
आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के बावजूद,
समझौते उसने भी किए…
लेकिन हर समझौते की एक सीमा होती है।
आख़िर ऐसा क्या हुआ
कि अंजू को अपने जीवन का सबसे बड़ा निर्णय लेना पड़ा?
कौन-सी बातें थीं
जिन्होंने उसके स्वाभिमान को भीतर तक झकझोर दिया?
🎧 सुनिए मालती जोशी की संवेदनशील और विचारोत्तेजक कहानी
“बहुरि अकेला” — केवल Gaatha पर।
भगवान कबीर दास जी ने एक जगह लिखा है जियत बाप को पानी न पूछे, मरे गंग नहलाये |जब तक मां बाप जीवित होते हैं तब उनकी कोई सेवा नहीं करना चाहता परंतु उनकी मृत्यु के बाद लोग दिखावे के लिए श्राद्ध का ऐसा विराट आयोजन होता है कि आश्चर्य होता है मालती जी की कथा बुंदेली पुट लिए हुए हैं भाग्यवान बुढ़िया
कुत्तों से कौन नहीं डरता ? अच्छों – अच्छों की सिट्टी – पिट्टी गुम हो जाती है। क्योंकि जब तक कुत्ते का मूड अच्छा है , तब तक वह आपका दोस्त है । लेकिन जैसे ही उसका मूड बिगड़ा तो वह ना आव देखता है ना ताव। सब कुछ भूल जाता है । और आपको नौ दो ग्यारह होने पर मजबूर होना पड़ता है।
उत्तरा 50 साल की एक महिला है जिसका विवाह गिरीश से हुआ है |उसकी दो बेटियां हैं निशि और आशु |उत्तरा के जीवन में कहीं ना कहीं एक सन्नाटा पसरा हुआ है |उत्तरा को ऐसा क्यों महसूस हो रहा है| क्या वह अपने अंदर चल रहे इन बातों को को समाज को दिखा पाती है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं मालती जोशी की लिखी कहानी सन्नाटा, पूजा श्रीवास्तव की आवाज में…
पुनर्विवाह का दूसरा नाम है समझौता । हर परिस्थिति से , हर हालात से समझौता करना ही पुनर्विवाह है। हालात से तो समझौता किया जा सकता है लेकिन प्यार में समझौता ? कभी नहीं । फिर ऐसा समझौता क्यों करना पड़ा ? क्या मजबूरी थी ?
अनिकेत – Malti Joshi (मालती जोशी) – Arti Srivastava
माँ की मृत्यु के बाद वीरेश और विशाखा ने जिया में ही अपनी माँ को देखा । लेकिन नई बहू उसे सास के रूप में स्वीकार नहीं कर सकी । वह जिया को साथ रखना नहीं चाहती थी । पिता की मृत्यु के बाद वीरेश को जिया की चिंता सताने लगी क्योंकि वह सच्चाई से अनभिज्ञ नहीं था । ऐसी क्या सच्चाई थी जिसकी वजह से वीरेश को जिया की इतनी चिंता थी ? वह जिया के लिए इतना बेचैन क्यों था?
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