अनिकेत – Malti Joshi (मालती जोशी) – Arti Srivastava
माँ की मृत्यु के बाद वीरेश और विशाखा ने जिया में ही अपनी माँ को देखा । लेकिन नई बहू उसे सास के रूप में स्वीकार नहीं कर सकी । वह जिया को साथ रखना नहीं चाहती थी । पिता की मृत्यु के बाद वीरेश को जिया की चिंता सताने लगी क्योंकि वह सच्चाई से अनभिज्ञ नहीं था । ऐसी क्या सच्चाई थी जिसकी वजह से वीरेश को जिया की इतनी चिंता थी ? वह जिया के लिए इतना बेचैन क्यों था?
अनिकेत – Malti Joshi (मालती जोशी) – Arti Srivastava
माँ की मृत्यु के बाद वीरेश और विशाखा ने जिया में ही अपनी माँ को देखा । लेकिन नई बहू उसे सास के रूप में स्वीकार नहीं कर सकी । वह जिया को साथ रखना नहीं चाहती थी । पिता की मृत्यु के बाद वीरेश को जिया की चिंता सताने लगी क्योंकि वह सच्चाई से अनभिज्ञ नहीं था । ऐसी क्या सच्चाई थी जिसकी वजह से वीरेश को जिया की इतनी चिंता थी ? वह जिया के लिए इतना बेचैन क्यों था?
मां बाप के लिए अपने बच्चे ना कोई बोझ होते हैं ना कोई अवसाद होते हैं वह अपने बच्चों को पूरे स्नेह के साथ उनका लालन-पालन करते हैं क्या कभी बच्चे भी अपने मां-बाप कीउसी प्रकार उनकी देखभाल कर पाते हैं इसी भावना से ओतप्रोत है मालती जोशी जी की लिखी कहानी वो तेरा घर यह मेरा घर ,सुनते हैं पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
जेवर और पीहर बुढ़ापे तक इन दो चीजों का मुंह नहीं टूटता |पीहर के प्रति लगाव इतना जबरदस्त होता है कि उसे बरकरार रखने के लिए कई बार बेटियां अपना जायज हक तक छोड़ देती है| चंद्रहार कहानी में भावनाओं का ताना-बाना इसी बात को लेकर बुना गया है| कहानी ने मीनू 3 साल के बाद अपनी मां से मिलने भारत आती है | मां उसको उसकी पसंद का चंद्रहार देना चाहती है किंतु मीनू उसे लेने से इनकार कर देती है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं मालती जोशी जी की आवाज में कहानी चंद्रहार
चाय की प्याली तो एक माध्यम है उसके बहाने दो पीढ़ियों का अंतर स्पस्ट किया गया है, किसी पर आरोप नहीं लगाया , बस अपनी बात कही गयी है ।
पुरानी रईसी चली जाती है ,पर ठसक नहीं जाती । | इसी झूठी शान का खामियाजा भुगतना पड़ता है परिजनों को |अपनी ही संतान तब भार लगने लगती है ही इन सारी परिस्थितियों का गुबार सहना पड़ता है | करुणा की इस भूमि पर सभी दुखी होने के कारण सास और बहू में भी एक भावनात्मक रिश्ता हो जाता है इन्हीं भावनाओं को चित्रित किया गया है कहानी हम तो ठहरे परदेसी में
“लक्ष्मी अग्रवाल ने एसिड हमले के बाद सिर्फ अपने जीवन को नहीं बल्कि पूरे समाज की सोच को बदलने का प्रण लिया। उनकी साहसिकता और सक्रियता ने कई लोगों को प्रेरित किया है। उनके संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में अधिक जानने के लिए Gaatha ऐप डाउनलोड करें और इस प्रेरणादायक कहानी को सुनें!”
चीनी फेरीवाला फाटक से बाहर आता दिखाई दिया । उसके कंधे पर भूरे कपड़े का गट्ठर था। मैंने कहा कि मैं फॉरेन नहीं खरीदती, तो सरल विस्मय के साथ उसने कहा कि हम क्या फारन है ? हम तो चाइना से आता है । मैंने अपनी नहीं को और अधिक कोमल बनाकर कहा, मुझे कुछ नहीं चाहिए भाई । चीनी भी विचित्र निकला,’ हमको भाई बोला है ।तुम जरूर लेगा। बहुत अच्छा सिल्क आता है सिस्तर। और उस दिन से उसे मेरे घर में आने जाने की परवानगी मिल गई
महादेवी वर्मा को बचपन से ही मिले परिवार के शैक्षिक संस्कारों ने उनके भावी जीवन को एक दिशा देने का काम किया। लेकिन नौ वर्ष की उम्र में उनके विवाह ने उनके जीवन को उपेक्षित और पीड़ा से भर दिया। वे अपनी ससुराल कभी गई ही नहीं।
मुंशी राम सेवक की सारी धाक मिट्टी में मिल गई। बूढ़ी विधवा, मूंगा के पैसे हड़प करना उन्हें रास ना आया। ब्राह्मणी मूंगा ने उनके द्वार पर प्राण क्या त्यागे, सारे गाँव ने उनसे मुँह मोड़ लिया ।मूंगा के भूत का डर अलग से सताने लगा। पत्नी नागिन चल बसी। बेटा रामगुलाम रिफारमेंट्री स्कूल में भर्ती हो गया ।और खुद रामसेवक साधु हो गए। गरीब की हाय उनके पूरे परिवार को लील गई।
“मिथाली राज: महिला क्रिकेट का आइकॉन! उनकी उपलब्धियों ने न केवल खेल को नया आयाम दिया है, बल्कि युवाओं को भी प्रेरित किया है। उनके संघर्ष और सफलता की कहानी को जानने के लिए Gaatha ऐप डाउनलोड करें और Navratri स्पेशल ‘उड़ान हौसलों की’ में जाकर बस क्लिक कर सुनिए Arti Srivastava की खूबसूरत आवाज़ में!””
छकौड़ी एक कपड़े का गरीब व्यापारी है स्वदेशी आंदोलन के तहत विलायती चीजों को बेचने पर तावान (हर्जाना) लगता है छकौड़ी अपनी गरीब हालत से तंग आकर विलायती कपड़े बेच देता है जब कांग्रेसियों को इस बात का पता चलता है तो वह छकौड़ी से तावान मांगते हैं क्या छकौड़ी अपनी गरीबी स्थिति में तावान दे पाता है प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी तावान में जानते हैं भूपेश पांड्या की आवाज में
धर्म से पीछा छुड़ाकर सिर्फ समाज के हित की बात करने वाला अमज़द से निशिकांत बहुत प्रभावित हुआ| आज वही अमज़द अपने धर्म का दामन पकड़ कर क्यों अपनी जीविका चला रहा है? अमज़द में ऐसा बदलाव किस लिए? क्या ऐसा करना उसकी कोई मजबूरी है या फिर उसकी कथनी और करनी में अंतर ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं विष्णु प्रभाकर द्वारा लिखी गई कहानी वो रास्ता नयनी दीक्षित की आवाज में
मीराबाई के पद संकलन से लिया गया प्रसंग जिसमें मीराबाई कृष्ण जी से कह रही है आपको पाने की खातिर मैंने सभी सुखों का त्याग कर दिया है
जयशंकर प्रसाद की चूड़ी वाले की नायिका चूड़ीवाली की नायिका विलासिनी है जो गृहस्थ कुलवधू बनने का सपना पूरा करने के लिए बहुत अधीर है ,किंतु जब वह उपेक्षित होती है तो अपनी जीवनचर्या को दूसरों की सेवाभाव के लिए समर्पित कर देती है |जानिए कैसे ?निधि मिश्रा की आवाज में….
अकाल की स्थिति में सारस का झुंड पानी की तलाश में इधर- उधर भटक रहा है एक बुढ़िया पानी का कटोरा उनके लिए रखती है लेकिन सारस का झुंड इस बात से अनजान है केदारनाथ सिंह के द्वारा लिखी गई कविता अकाल में सारस सुनते हैं पवन मिश्रा जी की आवाज में
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Rajesh
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