जब कोई प्रेम में होता है,
तो उसके लिए
प्रेम के अलावा
और कुछ भी
महत्त्वपूर्ण नहीं रह जाता।
हर सोच, हर एहसास
उसी एक व्यक्ति के
इर्द-गिर्द घूमने लगता है।
इसी सच्चे और गहरे अहसास को
बड़े सादेपन से
यह मधुर गीत सामने रखता है—
भावना तिवारी की आवाज़ में।
कश्मीर की सुंदरता जहां एक ओर अपनी तरफ लोगों को आकर्षित कर रही है वहीं उसी कश्मीर में रह रहे लोगों ने कैसे खौफनाक मंजर का सामना किया है उसी व्यथा को भावना ने अपने गीत में बेहद मार्मिक ढंग से उड़ेला है…
जीवन बहुत सूक्ष्म होता है और हमें सभी बंधनों से मुक्त होकर अपने जीवन में सिर्फ़ यही कोशिश करनी चाहिए कि हम यहां सब के चेहरे पर खुशी ला सके ,प्रेम फैला सके ।भावना तिवारी की मोहक आवाज़ में सुनिए यह खूबसूरत गीत..
भावना तिवारी की आवाज़ में भाई बहन के भावों को प्रदर्शित करती रक्षा बंधन पर एक भाव पूर्ण कविता, जो आपकी आँख नाम कर देगी
ईश्वर से जब हम अपने को पूरी तरीके से जोड़ लेते हैं तब जीवन में किसी भी वाहय शक्ति का भय से पूर्णतया मुक्त हो जाते हैं |
जब ऐसा व्यक्ति जो कहने को अपनी समस्त प|रिवारिक जिम्मेदारियों को पूर्ण कर चुका है, उसका शरीर कमजोर हो गया हो |तब भी क्या वास्तव में इस सांसारिक संवेदना से परे है ? ऐसी स्थिति में उसकी क्या मनोदशा होती है इस गीत के माध्यम से समझते हैं “ मैं हूं 78 का “….
हमारी कई बार ऐसी मनोस्थिति हो जाती है कि हमें अपने घर में ही वह प्रेम और शांति नहीं प्राप्त हो पाती है, जो घर के बाहर प्राप्त हो जाती है |कविता के माध्यम से इसी मनोभाव को प्रकट किया गया है…
पर्दा किस भावना का अविलंब हो सकता है इस मार्मिक कहानी के माध्यम से महसूस किया जा सकता है। कहानी चौधरी पीर ब़ख्श की की है जो अपनी कम आमदनी में अपने बड़े परिवार का भरण -पोषण कर रहा है ।चौधरी पीर ब़ख्श कर्ज़ में डूबा हुआ है। अपनी इज्जत को किसी तरह पर्दे की आड़ में छुपायें हुए हैं। सुनते हैं क्या होता है जब उसके घर का पर्दा हट जाता है ।ऐसे में चौधरी पीर ब़ख्श की क्या मनोस्थिति होगी ? इसे जानने के लिए सुनते हैं यशपाल के द्वारा लिखी गई कहानी पर्दा, जिसे आवाज़ दी है नयनी दीक्षित ने..
पुनर्विवाह का दूसरा नाम है समझौता । हर परिस्थिति से , हर हालात से समझौता करना ही पुनर्विवाह है। हालात से तो समझौता किया जा सकता है लेकिन प्यार में समझौता ? कभी नहीं । फिर ऐसा समझौता क्यों करना पड़ा ? क्या मजबूरी थी ?
हर नशा बुरा नही होता। कुछ नशे ऐसे भी हैं जिनकी ज़रूर हर व्यक्ति को होती है कुछ ऐसा ही नशा करने वाले जगदीश भाई की कहानी।
I am 26 ! I am the date that India became a Republic, but like my brother 15, I too am cursed to be remembered just one day! I am the pain of the nation! This Republic day, let us pledge to keep India- Bharat in us every single day! May the Tricolor hoist everyday in our hearts!
Reviews for: Pyar tumhara sach lagta hai (प्यार तुम्हारा सच लगता है)
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Surya DIXIT
9415592770