एक स्वयंसेवक को जेल हो जाती है और उसकी पत्नी को यहां तक कि अपने ससुर का भी सहारा नहीं मिलता है |ऐसे में ज्ञानचंदकी पत्नी उसका सहारा बनती है| जानते हैं नारी के निर्भीक ,अलौकिक रूप को प्रेमचंद के द्वारा लिखी गई कहानी अनुभव में भूपेश पांडिया की आवाज में
बैरिस्टर दया शंकर मेहता वायसराय की कार्यकारिणी सभा के मेंबर नियुक्त हुए तो चारों तरफ उनके पक्ष और विपक्ष भी बन गए पत्नी राजेश्वरी , सुपुत्री मनोरमा, और स्वयं वे अंग्रेजों से बहुत प्रभावित थे। किंतु उनका सुपुत्र, बालकृष्ण उनका सबसे बड़ा विरोधी बन गया और आखिरकार उसने अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर ली।
कुसुम नवीन बाबू जी की पुत्री है। शादी के बाद उसका पति उससे किसी भी तरह का कोई वैवाहिक संबध नहीं रखता है। कुसुम को इस बात का कारण नहीं समझ आ रहा ।मायके से वो अपने पति को इसी संदर्भ में कई पत्र लिखती जिसमें पूर्ण सम्पर्ण की पराकाष्ठा उडेल देने के बाबजूद उसका पति उसे कोई उत्तर नहीं देता। आगे जानने के लिये कि आखिर क्या वज़ह है कि कुसुम के साथ ऐसा व्यवहार होने का,क्या कुसुम अपने आत्म सम्मान की रक्षा कैसे करती है सुनते हैं प्रेमचंद जी के द्वारा लिखी कहानी कुसुम सुमन वैद्य जी की आवाज़ में..।
चोखे लाल शर्मा एक रसिक किस्म के संपादक हैं | स्त्रियों के कैसे भी लेख उनकी भूरी- भूरी प्रशंसा चोखे लाल शर्मा जी के द्वारा जरूर होती है |एक बार उग्र प्रेम को झलकाती एक अश्लील कविता प्राप्त हुई | इस कविता के बाद चोखे लाल शर्मा जी का क्या हुआ? क्या अब भी उनका रसिक मिजाज बाकी है ?सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी रसिक संपादक भूपेश पांडे की आवाज में
छकौड़ी एक कपड़े का गरीब व्यापारी है स्वदेशी आंदोलन के तहत विलायती चीजों को बेचने पर तावान (हर्जाना) लगता है छकौड़ी अपनी गरीब हालत से तंग आकर विलायती कपड़े बेच देता है जब कांग्रेसियों को इस बात का पता चलता है तो वह छकौड़ी से तावान मांगते हैं क्या छकौड़ी अपनी गरीबी स्थिति में तावान दे पाता है प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी तावान में जानते हैं भूपेश पांड्या की आवाज में
“नौं” साल और “चौदह” के दो सगे भाई हैं । स्वभाव से विपरीत। किंतु बड़ा भाई, छोटे भाई को उस समय की लघुता का एहसास दिलाता है जब छोटे भाई को अपनी सफलता पर घमंड होने लगता है । ये सब किस प्रकार होता है और क्या होता है? कहानी बड़े भाईसाहब मे जानेंगे?
सन 1946 में हुए हिंदू-मुस्लिम दंगों पर आधारित यह कहानी कोलकाता शहर की है। स्त्रियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार और भेदभाव से संतृप्त हैं उनका तिरस्कार और निरादर होता है। समाज में फैली इस विकृति को देखकर -सुनकर मन व्यथित हो जाता है
हिंदुस्तान -पाकिस्तान दो झंडो के बीच खड़ा एक व्यक्ति जो लंबी दाढ़ी और फटे हाल में खड़ा हुआ जो मानसिक रूप से अस्वस्थ लग रहा हो
वैवाहिक जीवन के एकपहलू में जितने जितने सुख हैं अगर उसके दूसरे पहलू को देखा जाए तो वह उतना ही हृदय विदारक और भयानक है | कहानी में नायक के जीवन में अपने वैवाहिक जीवन की इस समस्या के समाधान के लिए नायक कौन-कौन से प्रयत्न करता है | जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी आखिरी हीला भूपेश पांडे जी की आवाज में
प्रभाकर और रजनी का विवाह हुए दो वर्ष से अधिक हो गया था। किन्तु विवाह-सुख किसे कहते हैं, यह उसे कभी नहीं ज्ञात हुआ। उसे तो अभी तक यही अनुभव होता रहा कि एक सिपाही का जीवन कितना कठोर हो सकता है।ऐसा इनकी जिंदगी में क्यों हो रहा है पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं भूपेश पांडे जी की आवाज में अज्ञेय की लिखी कहानी 1 घंटे में
कहानी का नायक एक मेहनती गरीब क्लर्क है ,जबकि उसका मित्र ईश्वरी एक बड़े जमीदार का लड़का है |नायक को अपने अमीर दोस्त के साथ कुछ दिन बिताने को मिलते हैं ईश्वरी के ठाठ- बाट, शानो- शौकत से नायक भी अपने को अछूता नहीं रख पाता है |कहीं ना कहीं नायक के मन में भी अमीरी का नशा चढ़ने लगता है| नायक के चरित्र में आए इस बदलाव को जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी नशा भूपेश पांडे जी की आवाज में…
एक ऐसी मुसलमान राजकुमारी की कहानी जिसने अपनी सेना के हिंदु सेनापति के लिए अपना धर्म और राज्य सब छोड़ दिया लेकिन अपने प्रेम को ना प्राप्त कर सकी।
कहानी में बड़ी सहजता के साथ ही समझा जा सकता है कि आखिर सत्य क्या है ?खाना, कपड़ा और मकान जिंदगी का सबसे बड़ा सत्य है| इसी बीच मनुष्य की धूर्तता उतना ही बड़ा सच है ,किस तरह मनुष्य अपने जोड़-तोड़ से इस संसार को चला रहा है और यही जोड़-तोड़ से युगों -युगों तक संसार में चलता रहेगा लेकिन रोटी, कपड़ा और मकान का सत्य कभी नहीं बदलेगा कैसे ? सुनते हैं हैं रांगेय राघव के द्वारा लिखी गई कहानी ‘बिल और दाना ‘,नयनी दीक्षित की खूबसूरत आवाज में …
कहानी एक वृद्ध खिलौने वाले गंगाधर की है| आज गृहत्याग करने की इच्छा से जाने लगता है |तब उसे गृहस्वामी की छोटी बेटी कनक रोक लेना चाहती है |गंगाधर मासूम कनक को अपनी पूरे जीवन गाथा सुनाता है क्या आज गंगाधर उस मासूम के मोह में आकर अपने गृह त्याग का विचार ध्यान देगा त्याग देगा| पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं अज्ञेय के द्वारा लिखी गई कहानी गृहत्याग , सुमन वैद्य की आवाज में
संपूर्णता की अनुभूति करने के लिए पांच पुराने मित्र एक चिकित्सक, एक लेखक और तीन धनी कुंवारे जो रोजगार रहित है ,खाना खाने के बाद स्वप्न को लेकर चर्चा कर रहे हैं | उनमें से एक दोस्त का कहना है स्वप्न हमेशा सुहावने नहीं होते ,अगर स्वप्न देखना है तो जागते हुए देखना चाहिए किंतु जागते हुए सपनों को पूरा करने के लिए बहुत अधिक ताकत और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है |इस बात को लेकर चर्चा कहां तक बढ़ती है और आगे क्या होता है ?इसे जानने के लिए सुनते हैं कहानी स्वप्न नयनी दीक्षित की आवाज में
Reviews for: Anubhav ( अनुभव )
Average Rating
project@project