होली का त्योहार राधा और कृष्ण की प्रेम कहानी से अटूट जुड़ा हुआ है ।राधा- कृष्ण की प्रेम-लीला का होली से क्या संबंध है ?और इसके पीछे क्या कथा है? सुनिए राधा और कृष्ण की कथा, विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में
राक्षसी ढूंढी ने राजा पृथृ के राज्य में बहुत अत्याचार फैलाया। राजा पृथृ ने राक्षसी ढूंढी के अत्याचार से किस प्रकार अपने राज्य का संरक्षण किया? और इस बात का होली के त्योहार से क्या संबंध है? जानने के लिए सुनते हैं राक्षसी ढूंढी की कथा, विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में
राक्षसी पूतना का वध श्रीकृष्ण ने किस प्रकार किया ?और इस बात का होली के पर्व से क्या संबंध है? जानने के लिए सुने कंस और पूतना की कथा, विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में
होली का त्योहार प्रहलाद और होलिका की कथा से किस प्रकार गहराइयों से जुड़ा है? इसे जानने के लिए पूरी कहानी सुने प्रहलाद और होली का की कथा, विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में
कामदेव ने किस प्रकार भगवान शिव से पार्वती जी का विवाह कराने में उनकी सहायता की ?और होली पर्व का इस बात से क्या संबंध है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनिए शिव पार्वती और कामदेव की कथा विनीत श्रीवास्तव की आवाज़ में
होली का मौसम ऐसा सुहावना होता है, ना केवल इंसान ही नहीं अपितु प्रकृति भी तरह-तरह के रंगों से रंग जाती है….
एक आलीशान कॉलोनी के बीच में एक मैदान जहां पर गरीब बस्ती के लोग ,बच्चे खेलते- कूदते आते -जाते और सर्दियों में धूप सेंकते हैं किंतु आलीशान बंगलों में रहने वालों को यह बात नागुज़ार है तो क्या ये अमीर लोग अपनी झूठी शान के ख़ातिर उस मैदान के साथ ऐसा कुछ करेंगे कि जिससे कोई गरीब आदमी उस मैदान में आये ही ना । क्या होगा? जानने के लिये सुनतें हैं अंजना वर्मा की कहानी नंदन पार्क ,विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में..
“Mother’s Day”
माँ…
वो नाम, जिसे सुनते ही
मन अचानक बचपन की किसी सुरक्षित जगह पर लौट जाता है।
उसकी डाँट में चिंता होती है,
उसकी चुप्पी में दुआएँ,
और उसके हर त्याग में
हमारी पूरी दुनिया छिपी होती है।
माँ सिर्फ़ वह नहीं होती
जो जन्म देती है…
कभी-कभी रिश्तों में कुछ लोग
ममता का वही स्पर्श चुपचाप निभा जाते हैं।
इस भावनात्मक कहानी में
अमिता और उसके पति प्रवीण
अपने नवजात शिशु की देखभाल के लिए
बुआ सास को दिल्ली बुलाते हैं।
वह भी सब कुछ छोड़कर,
निस्वार्थ भाव से बच्चे को अपना स्नेह, समय और ममता देती हैं —
ठीक एक माँ की तरह।
लेकिन क्या रिश्तों में दिया गया प्रेम
हमेशा सम्मान भी पाता है?
जब विदा का समय आता है,
तो प्रवीण उनके वर्षों के अपनत्व और ममता को
कुछ पैसों में समेट देने की कोशिश करता है।
और यही पल दिल में एक गहरा सवाल छोड़ जाता है—
क्या हर वह स्त्री
जो माँ की तरह प्रेम और त्याग देती है,
उसे वही सम्मान नहीं मिलना चाहिए?
🎧 रिश्तों, संवेदनाओं और ममता की अनकही परतों को छूती
अंजना वर्मा की मार्मिक कहानी
“Mother’s Day”
आवाज़: विनीता श्रीवास्तव
केवल Gaatha पर।
सुन्दरी – रवींद्र कालिया – विनीता श्रीवास्तव
ज़हीर मियाँ के बड़े से कुम्बे का भरण -पोषण ‘सुंदरी’ के जरिए ही हो रहा है। वही उनके घर की एकमात्र आमदनी का साधन भी है ।अब ऐसे में सुंदरी ही रूठ जाए या नखरे दिखाने लगे तो इतने बड़े कुम्बे का ख़र्चा कौन उठाएगा ?अब सुंदरी को मनाने के लिए ज़हीर मियाँ का परिवार कौन-कौन से पापड़ बेलता है? और भाई आखिर यह सुंदरी है कौन? इसे बेहद रोचक ढंग से कहानी में बताया गया है जो कभी आपको हंसाएगी और कभी आपको इमोशनल भी कर देगी। रवींद्र कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी सुनिए सुंदरी, विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में
रूढ़िवादी परिवार से होने तथा पति के द्वारा दी गई यातना के बावज़ूद एक अबला सी लगने वाली महिला कैसे करोड़ों रुपए की कंपनी की मालकिन बनी? जानिए अबला से सबला बनने का पूरा सफ़र भारती सुमारिया जी का ,आम आदमी की खास कहानी में….
राक्षसी पूतना का वध श्रीकृष्ण ने किस प्रकार किया ?और इस बात का होली के पर्व से क्या संबंध है? जानने के लिए सुने कंस और पूतना की कथा, विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में
व्यंग के बिना होली अधूरी है और हमारे संपादक जी पर क्या बीत रही है इस होली में?काम का बोझ तो बहुत ज्यादा है पर तनख्वाह 3 महीने से नहीं मिली। बीवी अलग परेशान करती है.. बेचारे संपादक जी..
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बच्चों के बगैर होली की कल्पना भी नहीं की जा सकती ।बच्चों का पसंदीदा त्योहार है होली ।कोई रंग-बिरंगे कपड़े पहनने के लिए मचल रहा है तो कोई खुद ही अपने आपको रंग से पोत ले रहा है। बचपन की याद दिलाती है शानदार कविता मुट्ठी में गुलाल…
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होली का त्योहार प्रहलाद और होलिका की कथा से किस प्रकार गहराइयों से जुड़ा है? इसे जानने के लिए पूरी कहानी सुने प्रहलाद और होली का की कथा, विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में
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होली का रंग-बिरंगा त्योहार,प्यार और रोमांस का के बिना अधूरा है। प्रेमी किस तरह अपनी प्रेमिका को अपने साथ होली खेलने के लिए मना रहा है ?प्यार और मोहब्बत के इसी भाव को बड़े ही शायराना अंदाज में पेश किया है भारतेंदु हरिश्चंद्र ने…
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होली का त्योहार रंग ही नहीं प्रेम और विश्वास का भी त्यौहार है। होली के इस अवसर पर दोस्त ही नहीं बल्कि सारे भेदभाव,लड़ाई- झगड़े भूलकर,दुश्मन भी गले मिल जाते हैं ।यही संदेश देती हुई हरिवंश राय बच्चन के द्वारा लिखी गई यह कविता…
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