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बच्चों के बगैर होली की कल्पना भी नहीं की जा सकती ।बच्चों का पसंदीदा त्योहार है होली ।कोई रंग-बिरंगे कपड़े पहनने के लिए मचल रहा है तो कोई खुद ही अपने आपको रंग से पोत ले रहा है। बचपन की याद दिलाती है शानदार कविता मुट्ठी में गुलाल…
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कुएँ का राज – Ibnesafi ( इब्नेसफी) – Nayani Dixit
200 साल पुरानी एक कोठी, एक बहुत ही पुरानी इमारत और उसके अंदर एक कुआं ।जिसके राज़ को वहां के बाशिंदे आज तक नहीं जान पाए ।ऐसी कौन सी बातें हैं उस कुंए की?जिसे सॉल्व करने के लिए वहाँ पर रहने वाले लोगों को इंस्पेक्टर फ़रीदी की मदद लेनी पड़ी ।घर के अंदर से आती हुई जानवरों की चीखें ,रोज मरते जानवर और फिर आखिरकार एक इंसान ।कुंए के अंदर मिली लाशें, किसी भूत का साया है या किसी की चली हुई चाल और आखिर चली हुई चाल है तो क्यों ?यह सारे राज़ अगर आप जानना चाहते हैं तो सुनिए इब्रेसफ़ी के द्वारा लिखी गई कहानियों की सीरीज़ कुंए का राज़ नयनी दीक्षित की आवाज़ में…
रक्त मंडल के भाग पांच में आपने सुना की नरेंद्र सिंह और नगेंद्र सिंह बहुत पुराने दोस्त हैं। किस तरह नगेंद्र सिंह ने रक्त मंडल के लोगों की मदद करने के लिए एक ऐसे मारक क्षमता वाले यंत्र की खोज की, जो दूर तक जा सकती है। इसमें उनकी मदद की केशव सिंह नाम के इंजीनियर ने की। अब देखना यह है कि इस तरह की यंत्रों का इस्तेमाल किन हाथों से होता है ?क्या उसके परिणाम अच्छे होंगे या भयंकर जानने के लिए सुनते हैं रक्त मंडल उपन्यास का भाग 6 नयनी दीक्षित की आवाज़ में..
हरिशंकर परसाई जी का अनुभव ऐसा है कि उन्हें लगता है कि हर कोई किसी ना किसी बीमारी से ग्रस्त है| भाई !सबके अपने-अपने अलग-अलग दुख है, अपने -अपने संघर्ष है| कोई अपनी संपन्नता के कारण दुखी है, कोई अपनी न्यूनतम जीवन भी ना जी पाने के कारण दुखी है |ऐसे में व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई जी है किस बीमारी से ग्रसित होना चाहते हैं? आखिर किस लिए ?बेहद व्यंग्यपूर्ण तरीके से लिखी गई कहानी अपनी-अपनी बीमारी, सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में..
इंसान ना जाने क्यों अपने आपको मशीन समझने लगा है ?बस दिन-रात बिना रुके,संभले दौड़ता चला जा रहा है | इंसान यह नहीं समझ पा रहा कि वास्तव में मशीन में लगी जंग को तो मिटाया जा सकता है किंतु इंसान के अंदर जो जंग लग जाती है वह कैसे हटाई जा सकती है? दुनिया में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ और कंपैरिजन ने आज इंसान को किस दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है ? यह बात किस हद तक सही है ?इस तथ्य को रखती हुई कहानी है किस्सा एक त्रासद फंतासी का ,सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज़ में….
खूबसूरत नज़्म परवाज़ इस बात का एहसास दिला रही है जब ऐसे वक्त में जब खामोशी आपका साथी बन रही हो और जिन -जिन बातों पर नाज़ करते हो वह आपका साथ छोड़ने लगे, ऐसे उदासीन वक्त में फिर से एक बार कोई आके उन उदासीन पलों को फिर से रंगीन कर दें और जिंदगी फिर से एक नई उड़ान भरने लगे ।सुनते हैं राकेश रविकांत टाक की नज़्म परवाज़, नयनी दीक्षित की आवाज में …
Maa Kalratri
नाम से अभिव्यक्त होता है कि मां दुर्गा की यह सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है अर्थात जिनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। नाम से ही जाहिर है कि इनका रूप भयानक है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। अंधकारमय स्थितियों का विनाश करने वाली शक्ति हैं कालरात्रि। काल से भी रक्षा करने वाली यह शक्ति है।
नवरात्रि के सातवें दिन यानी महासप्तमी को माता कालरात्रि की पूजा की जाती है। जैसा उनका नाम है, वैसा ही उनका रूप है। खुले बालों में अमावस की रात से भी काली, मां कालरात्रि की छवि देखकर ही भूत-प्रेत भाग जाते हैं। मां का वर्ण काला है।
इस देवी के तीन नेत्र हैं।
ब्रज की होली की बात किए बगैर होली की बात अधूरी है। देश-विदेश से लोग ब्रज की होली का आनंद उठाने आते हैं।इस कविता में छंद के माध्यम से आप भी आनंद लीजिए कि किस तरह कन्हैया और उनके साथी मिलकर गोपियों को परेशान कर उनके संग होली खेल रहे हैं?
मंजरी परिणय – भाग -2
Dr. Dharmveer भर्ती जी द्वारा रचित कृति कनुप्रिया का ये द्वितीय खंड है
मंजरी परिणय में तीन कविताएँ है।
इन कविताओं में, राधा के प्रश्नों का, कनु की व्याकुलता का, निजता के द्वंद का; मन को द्रवित करने वाला बेहद सुंदर चित्रण है।
राधा, कृष्ण के चले जाने के पश्चात, विव्हल हो कर स्मरण करती है कि किस प्रकार आम्र बौर के नीचे खड़े हो, कनु उसकी प्रतीक्षा करते थे, परंतु लोक लाज से बंधी राधा अपने कनु के पास उस क्षण नही पहुंच पाती थी।
कनु का आम्र बौर की मंजरी से राधा संग परिणय कर लेना, राधा का बेचैन हो जाना और अपने कनु के समीप न आ पाने की व्यथा बताना। और आम्र बौर का ठीक ठीक अर्थ न समझ पाने में अपनी असमर्थता दिखाना… फिर कनु से मासूमियत से पूछ लेना… की तुम मेरे कौन हो ?
मंजरी परिणय की कविताएँ प्रेम में पड़ी राधा की आकुलता का सुंदर चित्रण है
चलिए गाथा पर सुनते हैं कनुप्रिया का द्वितीय खंड- मंजरी परिणय, पल्लवी की आवाज़ में
होली के अवसर पर हंसी -ठिठोली आम बात है और इस मौसम में लोग एक-दूसरे को बिल्कुल भी छेड़ने से नहीं चूकते । एक कवि सम्मेलन में किस तरह सारे कवि,एक कवियत्री को छेड़ते हैं और कवियत्री ने किस तरीके से इस छेड़खानी का उत्तर दिया ?आनंद लीजिए इस व्यंग का इस कविता में..
कहानी में मालकिन के हाथ में सोने का कड़ा ना देखकर, उसकी 17 वर्षीय बेटी मंटू ने कड़े के संदर्भ में अपनी मां से पूछा तो पूरे घर में सोने के कड़े की खोज चालू हो गई| होली के माहौल है ,घर में बहुत से मेहमान भी है ,नौकरानी किलसिया भी है |आखिर कड़ा कहां गया ? किसने लिया वह कड़ा और क्या हुआ? इस मजेदार हास्य- व्यंग से भरपूर यशपाल द्वारा लिखी गई कहानी होली का मज़ाक सुनते हैं ,नयनी दीक्षित की आवाज में …
Reviews for: Muthi mai hai lal gulaal (मुट्ठी में है लाल गुलाल)