साहित्य जगत में डॉ राजीव राज एक जाना -पहचाना नाम है | जनपद इटावा ( उoप्रo) में कार्यरत डॉ राजीव राज देश के महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। अध्यापन के साथ-साथ इनकी स्वतंत्र लेखन में विशेष रूचि है | कवि सम्मेलन की मुख्य धारा में बतौर गीतकार लोकप्रियता के नित नये सोपान चढ़ने वाले डॉ राजीव राज आज हर एक कविता प्रेमी के हृदय में अपना विशिष्ट स्थान बना चुके हैं। लाजवाब धुन और अद्भुत प्रस्तुति के कारण आपके गीत बड़ी सहजता से लोगों के होठों पर चढ़ जाते हैं। “यादें झीनी रे” और “हिंदुस्तान हूँ” जैसे गीत मंचों की माँग और आपकी पहचान बन गये हैं। प्रह्लाद यदुवंशी अलंकरण-2015, गोपाल दास नीरज युवा गीतकार सम्मान- 2018, महाप्राण निराला सम्मान-2018, डॉ विष्णु सक्सेना गीत सम्मान ३ -2019, कविवर ब्रजशुक्ल घायल स्मृति सम्मान- 2019, गीत गंगोत्री सम्मान- 2021 सहित गीतकार के रूप में अनेक विशिष्ट सम्मान प्राप्त करने वाले डॉ राजीव राज द्वारा श्री कृष्ण उद्घोष (त्रैमासिक पत्रिका), ज्योत्सना (वार्षिक पत्रिका) का संपादन किया जा रहा है | ‘वेदना के फूल ‘ की लोकप्रियता के बाद आपका एक और गीत संग्रह “यादें झीनी रे” प्रकाशनाधीन है।
मकान तो ईंटों और दीवारों से बनता है, लेकिन उसे घर बनाते हैं प्रेम, अपनापन और रिश्तों की गर्माहट।
कुछ रिश्ते जीवन में इतने सहज हो जाते हैं कि उनके अनगिनत योगदान को हम अक्सर शब्दों में व्यक्त ही नहीं कर पाते।
यह कविता उसी स्त्री के प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता की भावपूर्ण अभिव्यक्ति है, जो अपने स्नेह, संवेदनाओं और साथ से एक साधारण-से घर को खुशियों और यादों का संसार बना देती है।
यह कविता हमें याद दिलाती है कि प्रेम केवल व्रत, परंपरा या किसी विशेष दिन का नाम नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझने, सम्मान देने और जीवन भर साथ निभाने का सुंदर एहसास है।
सुनिए एक ऐसी कविता, जिसमें शायद आपको अपने जीवनसाथी की झलक दिखाई दे… और कुछ अनकही भावनाओं को शब्द मिल जाएँ।
किसी भी कवि की यह नैतिक जिम्मेदारी होती है कि वह समाज को अपने गीतों के माध्यम से समाज को मानवता का संदेश दे | इसी तरह की भावनाओं से ओतप्रोत है राजीव राज के द्वारा लिखा हुआ यह गीत
यह एक ऐसा प्रेम गीत है जिसमें कवि अपनी प्रेमिका को औरउसके प्रेम को हर पल महसूस कर सकता है |कैसे ?जानते हैं डॉ राजीव राज के द्वारा लिखी गई एक खूबसूरत प्रेम गीत उन्हीं की आवाज में….
नारी ईश्वर की की सबसे सुंदर कृति है, किंतु समाज में नारी को क्या वह स्थान मिला है, जो उसे मिलना चाहिए |जब एक घर बनाने के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाली नारी से यह कहा जाता है कि तुम क्या करती हो? यह भाव कितना असहनीय होता है | इसी संदर्भ में डॉक्टर राजीव राय की यह गीत इस हकीकत को उजागर करता है
अतीत की यादों की ओर ले जाने वाला यह गीत, जिसमें कवि जब एकांत बैठकर अपने बीते हुए कल को याद करता है और उसका चित्र उसके शब्दों में समाहित हो जाता है
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Monu yadav