किसी भी कवि की यह नैतिक जिम्मेदारी होती है कि वह समाज को अपने गीतों के माध्यम से समाज को मानवता का संदेश दे | इसी तरह की भावनाओं से ओतप्रोत है राजीव राज के द्वारा लिखा हुआ यह गीत
नारी ईश्वर की की सबसे सुंदर कृति है, किंतु समाज में नारी को क्या वह स्थान मिला है, जो उसे मिलना चाहिए |जब एक घर बनाने के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाली नारी से यह कहा जाता है कि तुम क्या करती हो? यह भाव कितना असहनीय होता है | इसी संदर्भ में डॉक्टर राजीव राय की यह गीत इस हकीकत को उजागर करता है
नारी ईश्वर की की सबसे सुंदर कृति है, किंतु समाज में नारी को क्या वह स्थान मिला है, जो उसे मिलना चाहिए |जब एक घर बनाने के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाली नारी से यह कहा जाता है कि तुम क्या करती हो? यह भाव कितना असहनीय होता है | इसी संदर्भ में डॉक्टर राजीव राय की यह गीत इस हकीकत को उजागर करता है
अतीत की यादों की ओर ले जाने वाला यह गीत, जिसमें कवि जब एकांत बैठकर अपने बीते हुए कल को याद करता है और उसका चित्र उसके शब्दों में समाहित हो जाता है
यह एक ऐसा प्रेम गीत है जिसमें कवि अपनी प्रेमिका को औरउसके प्रेम को हर पल महसूस कर सकता है |कैसे ?जानते हैं डॉ राजीव राज के द्वारा लिखी गई एक खूबसूरत प्रेम गीत उन्हीं की आवाज में….
“तीखा जीवित कांटा बनू ,शवों पर निर्जीव फूल नहीं “, हमें जीवन इस ढंग से जीना चाहिए कि खुद हम अपने ऊपर गर्व महसूस कर सकें |इसी भावना को सजग करते हुए अनुपम ध्यानी की आवाज में खूबसूरत कविता “राख बनो धूल नहीं”…
Nazm Subhash ji ki likhi kahani adhoori khwaahish, badi khoobsoorti se, Umrao Jaan, jinke husn aur adaaon ke laakhon deewaane thei, unke dard aur unki man mein dafn ho chuki khwaahishon ka sajeev chitran karti hai. Unki ekAdhoori khwaahish jo bas un
समापन – भाग -5
Dr. Dharmveer भर्ती जी द्वारा रचित कृति कनुप्रिया का ये समापन है
कनु की प्रिया जिसके हृदय में प्रतिक्षण कनु ही व्याप्त रहता है, ऐसी कनुप्रिया सम्पूर्ण रचना में छाई हुई है. राधा को कभी कनु अपना अन्तरंग सखा लगता है तो कभी रक्षक, कभी लीला बन्धु कभी आराध्य और कभी लक्ष्य.
कनुप्रिया के समापन में राधा कृष्ण की पुकार की प्रतीक्षा में जन्मांतरों की अनंत पगडंडी के कठिनतम मोड़ पर अडिग खड़ी है!
जन्मांतरों से, जन्मांतरों तक…
चलिए गाथा पर सुनते हैं कनुप्रिया का समापन, पल्लवी की आवाज़ में
जीवन की किसी भी परिस्थिति से हार न मानना और डटकर उसका सामना करना इस बात को जीवंत करती हुई अनुपम ध्यानी की आवाज में यह कविता युद्ध।
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Monu yadav