विट्ठल भाई पटेल भारत के प्रख्यात विधान वेत्ता होने के साथ ही साथ एक महान क्रांतिकारी भी रहे। यह सरदार वल्लभभाई पटेल के बड़े भाई थे। पूर्ण स्वराज पाने के लिए वह किसी भी तरह अंग्रेजों से कोई भी समझौता नहीं करना चाहते थे। इनका संपूर्ण जीवन सिर्फ़ और सिर्फ़ देश के लिए ही समर्पित रहा।
6 अक्टूबर 1860 ब्रिटिश काल में भारतीय दंड संहिता( IPC) पारित हुआ ।उस समय इसकी रचना लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में गठित प्रथम भारतीय विधि आयोग द्वारा की गई ।यह कानून अपराधों को बताता है तथा अपराधों की सज़ा और ज़ुर्माना भी तय करता है। IPC में कई बार संशोधन हुआ. जिसमें कई बार अपराध जोड़े भी गए तो कई बार अपराध हटाए भी गए।
1874 में गठित हुई ‘यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन’ की याद में जापान के टोक्यो में 09 अक्टूबर 1969 को आयोजित विश्व डाक संघ के सम्मेलन में इसी दिन ‘विश्व डाक दिवस’ मनाए जाने की घोषणा की गई और तभी से प्रतिवर्ष 09 अक्टूबर को ही अंतरराष्ट्रीय डाक सेवा दिवस मनाया जा रहा है।
पिकासो ने 1907 से क्यूबिज़्म की शैली में काम किया। इस प्रवृत्ति को ज्यामितीय आकृतियों के उपयोग से अलग किया जाता है जो वास्तविक वस्तुओं को आदिम आकृतियों में तोड़ते हैं|मानव वेदना का जीवित दस्तावेज कहीं जाने वाली इन कलाकृतियों को बनाने के लिए पिकासो ने अपना सब कुछ कल को समर्पित कर दिया|
लीला सेठ का जन्म लखनऊ, उत्तर प्रदेश में 20 अक्टूबर, 1930 को हुआ। लीला सेठ बचपन में ही पिता की मृत्यु के बाद विधवा मां के सहारे पली-बड़ीं और मुश्किलों का सामना करते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जैसे पद तक पहुंचने का सफर पूरा किया
10 अक्तूबर के दिन वर्ष 1970 में 96 वर्ष के ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के बाद फिजी को आधिकारिक रूप से स्वतंत्रता प्रदान की गई थी। फिजी दक्षिण प्रशांत महासागर में एक देश और द्वीप समूह है। यह न्यूज़ीलैंड के आकलैंड से करीब 2000 किमी |
कहानी एक जुलाहे की है |जिसे देवता के द्वारा इच्छापूर्ति वरदान मिलने का आशीर्वाद मिलता है किंतु जुलाहा देव से ऐसा वरदान मांग लेता है, जो उसके लिए अभिशाप साबित होता है| आखिर जुलाहे ने ऐसा क्या मांग लिया ?इसे जानने के लिए सुनते हैं पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी दो सिर वाला जुलाहा ,जिसे आवाज दी है शिवानी आनंद ने ….
झलकारी बाई (22 नवंबर 1830 – 4 अप्रैल 1857) झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की नियमित सेना में, महिला शाखा दुर्गा दल की सेनापति थीं। वे लक्ष्मीबाई की हमशक्ल भी थीं इस कारण शत्रु को गुमराह करने के लिए वे रानी के वेश में भी युद्ध करती थीं। अपने अंतिम समय में भी वे रानी के वेश में युद्ध करते हुए वे अंग्रेज़ों के हाथों पकड़ी गयीं और रानी को किले से भाग निकलने का अवसर मिल गया।
जब कवि सम्मेलन में नेताओं की ऐसी फजीहत देखी तो मेरे तन बदन में आग लग गई। मैंने अपनी कहानी द्वारा कवि महाशय को प्रत्युत्तर देने के लिए एक सर्वगुण संपन्न नेता को गरीब परिवार में जन्म दिया। किंतु गरीबी के कारण वह पथ से भ्रष्ट होकर चोर बन गया । मैंने उसको खत्म कर दिया ,और एक बार फिर हौसला करके एक नए नेता की नए परिवेश में रचना की। वह करोड़पति सेठ के घर जन्मा किंतु उसकी रईसी ने उसे पथ से डिगा दिया और मुझे उसको भी खत्म करना पड़ा। लेकिन अब फिर एक बार हिम्मत न जुटा पाई और मैं हार गई।
“मां हमारे जीवन का आधार होती है। बचपन से वही हमें सब कुछ सिखाती है। यह कविता बखान कर रही है मां के ऐसे ही अनमोल गुणों को”
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