धीरेंद्र अस्थाना के द्वारा लिखी गई एक कहानी जिसमें एक इंसान से जाने- अनजाने एक गलती हुई है जिसका उसे पश्चाताप भी है | उस गलती के कारण वह अपनों से नजर भी नहीं मिला पा रहा और आज उसकी उस गलती के कारण वह एक बड़ी बीमारी से ग्रसित हो चुका है |जिसे वह किसी को बता भी नहीं पा रहा है | ऐसे में वह इंसान क्या करें ?क्या वह इंसान घुट घुट कर यूं ही जीता रहे या फिर उसे फिर एक मौका मिलना चाहिए ?ऐसे ही प्रश्नों को लेकर कहानी का ताना-बाना बुना गया है सुनते हैं कहानी Meri Fernadis क्या तुम तक मेरी आवाज पहुंचती है? नयनी दीक्षित की आवाज में
नहीं, मुझे पूरा सुने बगैर नहीं जा सकतीं तुम। अरविंद ने आदेश सा दिया, तुमने सिर्फ मेरा उजास देखा है। मेरे भीतर के अंधकार और दुर्गंध से परिचय नहीं है तुम्हारा। मेरे भीतर की अँधेरी, घृणित और असहनीय दुनिया में सिर्फ सुनीता ही रह सकती है मानसी तुम्हारा तो दम घुट जाएगा वहाँ। मेरे अशक्त और खोखले हो चुके तन को प्रेमिका की नहीं, परिचारिका की जरूरत है मानसी और परिचारिका मानसियाँ नहीं, सुनीताएँ ही हो सकती हैं। मानसी एक 24 वर्षीय खूबसूरत नव युवती है जिसे अपने से काफी उम्र में एवं शादीशुदा व्यक्ति अरविंद से प्रेम हो जाता है उनका प्रेम सारे बंधनों को तोड़ देना चाहता है किंतु जब अरविंद को इस बात का एहसास होता है मानसी उसके गुणों के प्रति आकर्षित है तब मानसी से अपने संबंधों को विच्छेद कर देना चाहता है ऐसी स्थिति में मानसी की क्या मनोदशा होती है और आगे कहानी में क्या होता है इस पूरी कहानी को जाने के लिए अमित तिवारी जी की आवाज में सुनते हैं कहानी मानसी
धीरेंद्र अस्थाना की कहानी चीख में, एक अबोध बालक के मन पर मारपीट का प्रभाव उसके जीवन को कहां तक उधर- पुथल के रास्ते पर ले जा सकता है ? इन बातों का प्रभाव एक छोटे से बच्चे के मन पर पड़ता है जो युवा होने के बाद भी उसका पीछा नहीं छोड़ता और किस तरफ अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है | यह कहानी समाज के सामने एक प्रश्न रखती है कि क्या इस तरह की चीजों से निपटना सामाजिक दायित्व नहीं है?
तिलिस्मी दुनिया जहां बड़े लोग, बड़े व्यापार, बड़ी पार्टियां, बड़ी सुंदरता ,बड़ी मारकाट ,बड़ी सफलता और चकाचौंध कर देने वाली जिंदगी को पाने के लिए इंसान ऐसी नींद के आगोश में चला जाता है कि उसके कारण वह अपने सच्चे रिश्ते, सच्चा प्यार और यहां तक की अपने से भी प्यार करना भूल जाता है |वह समझ नहीं पाता है कि उस नींद के बाहर की दुनिया अब उसके लिए कितनी अजनबी हो चुकी है ?एक आम -इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी में आए हुए कई बदलावों को चित्रित करती हुई धीरेंद्र अस्थाना की कहानी नींद के बाहर ,सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में
इंसान ना जाने क्यों अपने आपको मशीन समझने लगा है ?बस दिन-रात बिना रुके,संभले दौड़ता चला जा रहा है | इंसान यह नहीं समझ पा रहा कि वास्तव में मशीन में लगी जंग को तो मिटाया जा सकता है किंतु इंसान के अंदर जो जंग लग जाती है वह कैसे हटाई जा सकती है? दुनिया में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ और कंपैरिजन ने आज इंसान को किस दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है ? यह बात किस हद तक सही है ?इस तथ्य को रखती हुई कहानी है किस्सा एक त्रासद फंतासी का ,सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज़ में….
इस कहानी में एक पिता और बेटे के कहे अनकहे जज़्बातों को , उनके एहसासों को बड़ी सच्चाई और ख़ूबसूरती के साथ प्रस्तुत किया गया है।
शोलागढ़@34km – Kumar Rehman (कुमार रहमान) – Nayani Dixit
शेयाली की मौत महज़ एक हादसा है या खुदकुशी या कत्ल। अनसुलझी गुत्थी को सुलझाने के लिए सार्जेंट सलीम और कैप्टन सोहराब तफ्तीश में जुट गए हैं इस तफ्तीश में कुछ नए मोड़ आए हैं |शेयाली के मोबाइल ऐप की लॉन्चिंग, मरने से पहले शेयाली का सूर्यास्त के समय बनाया उसका वीडियो, विक्रम. के.. खान और एक युवती हाशना के बीच की नोकझोंक और एक बिल्ली का कत्ल ।क्या इन कड़ियों का क्या कोई संबंध है शेयाली की मौत से ?जानने के लिए सुनते हैं शोलागढ़@34 का यह भाग नयनी दीक्षित की आवाज़ में..
ख़ौफ़नाक इमारत – Ibnesafi ( इब्नेसफी) – Nayani Dixit
क्या ऐसी कोई इमारत आपने देखी है जिसके अंदर बनी हुई सालों पुरानी कब्र से मुर्दा निकलकर लोगों का मर्डर कर दे? और आखिर वह मुर्दा ऐसा क्यों कर रहा है? क्या सचमुच उसके अंदर मुर्दा है या कहानी कुछ और ही है ?क्या इस सीरीज़ का जासूस इमरान इन लोगों का पता लगा पाएगा? कौन है यह मुर्दा? मुर्दा है या फिर कोई जिंदा व्यक्ति? कौन कातिल है और कौन शिकारी ? इब्रेसफ़ी की सस्पेंस और थ्रिलर से भरपूर कहानियों की सीरीज़ सुनिए ख़ौफ़नाक इमारत मे, नयनी दीक्षित की आवाज़ में…
रक्त मंडल के पिछले भाग में आपने सुना कि नगेंद्र नरसिंह कामनी से 1 महीने बाद मिलने का वादा कर अपने लक्ष्य की ओर चल पड़ा। क्या नरेंद्र नर्सिंग रास्ते में पकड़ा गया? और वहीं दूसरी तरफ नेपाल के राजा विक्रम सिंह अपनी हुकूमत अंग्रेज़ों को देने के लिए तैयार हो गए? या अंग्रेजों के साथ जंग लड़ते -लड़ते ढेर हो गए? क्या हुआ नेपाल का हाल? सुनिए इस भाग में…
सत्यान्वेषी – Byomkesh Bakshi (व्योमकेश बक्शी) – Nayani Dixit
सबसे पहले कहानी ब्योमकेश बक्शी के संकलन में है सत्यान्वेषी कहानी में सबसे पहली बार व्योमकेश और अजीत बंदोपाध्याय का एक दूसरे से मिलते हैं और एक दूसरे के दोस्त हो जाते हैं |लेकिन व्योमकेश बख्शी अपना इतना बड़ा घर छोड़कर एक सराय में रहने के लिए जाते हैं उन्हें ऐसा क्या पता करना है उस सराय के चारों ओर जो उन्हें अपना इतना बड़ा घर छोड़कर जाना मजबूर करता है और अजीत इसमें ब्योमकेश बक्शी का साथ कैसे देते हैं ?
फरीदी और लियोनार्ड – Ibnesafi ( इब्नेसफी) – Nayani Dixit
इब्ने सफ़ी की कहानी फ़रीदी और लियोनार्ड में लियोनार्ड एक बेहद चलाक लेकिन बेहद घटिया किस्म का ब्लैकमेलर है ।जो ब्लैक मेलिंग तक ही नहीं रुकता बल्कि क़त्ल और दूसरे और हथकंडे अपनाने पर भी उतर आता है। कहानी में लियोनार्ड कौन-कौन से हथकंडे आज़माता हैं?फ़रीदी किस प्रकार उसको अपनी गिरफ्त में लेता है ?इस बेहद सनसनीख़ेज़ कहानी को आवाज़ दी है नयनी दीक्षित ने..
झाबुआ से लौटते हुए इसलिए उदास हूँ कि अन्नास नदी सूख गई है और रंग-बिरंगे प्रिंट वाले कपड़े पहने मोटर साइकिल पर घूमते सीधे-सादे भील आज भी प्रकृति के इतने नज़दीक हैं कि उन्हें इस शोख नदी के मर जाने का शायद अहसास ही नहीं है।असीम राय और मदन झाबुआ नगर जा रहे हैं मदन जी का बचपन वहां गुजरा है अनास नदी को लेकर उनकी काफी यादें हैं अब दोबारा जब वहां पाते हैं तो क्या उन्हें pहले जैसा सब कुछ मिलता है जानने के लिए सुनते हैं कहानी हेमंत जोशी के द्वारा लिखी गई कहानी अनास नदी सूख गई अमित तिवारी जी की आवाज
जीन बैप्टस सीमेन चार्डिन ने 200 से अधिक चित्रों की रचना की। इनका पसंदीदा विषय खेलने वाला बच्चा रहा। घरेलू अंदरूनी शैली के चित्रों का को इन्होंने बखूबी चित्रित किया। उनकी चित्रकारी में बच्चों और घरेलू गतिविधियों को बखूबी दर्शाया गया है
एक बार युधिष्ठिर नामक कुम्हार के माथे में में घड़े की नोक से चोट लग जाती है |घाव इतना गहरा होता है कि ठीक होने के बाद भी उसका निशान नहीं जाता है | वहां का राजा कुम्हार के सिर पर चोट का निशान देखकर उसे एक वीर पुरुष समझकर अपने यहां सैनिक के रूप में भर्ती कर लेता है |कहानी में आगे क्या होता है?इसे जानने के लिए सुनते हैं पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी कुम्हार की कहानी, शिवानी आनंद की आवाज में…
एक कंजूस व्यक्ति के पास बहुत सारा सोना था लेकिन वह उसका सदुपयोग ना करके उसे जमीन में गाडे रखता था ।एक दिन उसका यह सारा सोना चोरी हो गया। इस बात से कंजूस को क्या सीख मिली और उसने क्या किया जाने के लिए सुनते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी द्वारा लिखी गई कहानी कंजूस और सोना निधि मिश्रा जी की आवाज में
हिंदुस्तान पाकिस्तान बंटवारे के बाद जो कि अमृतसर जा रही है कुछ मुसाफिर जिसमें तीन पठान, सरदार ,बाबू बैठे हुए हैं एक बुढ़िया बैठी हुई है वजीराबाद स्टेशन में हलचल होने लगती है जैसे कहीं दंगा हुआ हूं पठान चढ़े हुए मुसाफिरों के साथ बदसलूकी करने लगता है बाकी यात्री में बैठे हुए हैं अमृतसर पहुंचती है पठानों से बदला लेने लगता है किस लिए ऐसा क्या कारण है इसके पीछे
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