Credit : Josh Talk
द्रौपदी ‘सत्य की जीत’ खण्डकाव्य की नायिका है |वह केवल दु:शासन ही नहीं वरन् अपने पति को भी प्रश्नों के कटघरे में खड़ा कर स्पष्टीकरण माँगती है। वह भरी सभा में यह सिद्ध कर देती है कि जुए में स्वयं को हारने वाले युधिष्ठिर को मुझे दाँव पर लगाने का कोई अधिकार नहीं है
3 नवंबर, 1957 की तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई, जब सोवियत संघ ने पहली बार स्पुतनिक-2 स्पेसक्राफ़्ट से लाइका नाम की स्ट्रीट फ़ीमेल डॉग को अंतरिक्ष में भेजा. वैज्ञानिक दावा करते हैं कि लाइका को स्पेस में भेजने के प्रयोग ने इंसानों के अंतरिक्ष तक पहुंचने का रास्ता साफ किया
सत्य की जीत के इस प्रसंग में द्रौपदी द्युत सभा में कौरवों के छल कपट से खेले जाने वाले द्युत क्रीड़ा का पुरज़ोर विरोध कर रही है समस्त धर्माचार्य भीष्म पितामह द्रोणाचार्य विदुर सहित सभी द्रोपदी का साथ देते हुए कौरवों के छल कपट का विरोध कर रहे हैं । द्वारिका प्रसाद महेश्वरी के द्वारा लिखी गई महाभारत में द्युत सभा का वर्णन नयनी दीक्षित की आवाज़ में
27 नवंबर 1895 को अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी आखिरी वसीयत लिखी थी। इसी वसीयत के आधार पर नोबेल पुरस्कारों की स्थापना हुई। 1901 में पहली बार नोबेल पुरस्कार दिए गए। अब तक 975 शख्सियत और संस्थानों को 609 नोबेल पुरस्कार मिल चुके हैं।
“मां का हमारे जीवन में क्या महत्व है ये कविता बख़ूबी बताती है। मां के होने से ही हमारा जीवन सुखी है। कविता के भाव जानने के लिए जरूर सुनें ये कविता।”
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