बाइबल अनुवादक ‘सेंट जेरोम’ की स्मृति में 30 सितंबर 2018 से अंतरराष्ट्रीय अनुवादक दिवस के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रों को एक साथ लाने तथा भाषा विद अनुवाद में योगदान के साथ-साथ विश्व शांति में अहम भूमिका बनाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस दिन की घोषणा की।
4 अक्टूबर 1884 में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले अगोना में राम चंद्र शुक्ला का जन्म हुआ। उन्होंने हिंदी साहित्य में आलोचना और समीक्षा को महत्वपूर्ण स्थान दिलाया। 20वीं शताब्दी के प्रमुख हिंदी साहित्यकारों में वह एक हिंदी के प्रमुख स्तंभ रहे।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म भारतीय इतिहास में सदा अविस्मरणीय रहेगा । गांधी जी के अहिंसक आंदोलन ने भारत को आज़ादी दिलाने में अपनी अभूतपुर भूमिका निभाई। अहिंसा के पुजारी के रूप में पूरी दुनिया ने उन्हें अपना गुरु माना। राजनीतिक और आध्यात्मिक नेता के रूप में वह सदैव याद किए जाएंगे।उनके द्वारा किए गए प्रमुख आंदोलन सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, चंपारन , भारत छोड़ो आंदोलन हैं। दांडी मार्च भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पडाव रहा ।इस दिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
अपना पूरा जीवन भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्पित करने वाले लाला हर दयाल माथुर एक प्रसिद्ध भारतीय क्रांतिकारी थे ।उन्होंने प्रसिद्ध क्रांतिकारी ‘ग़दर पाटी’ का गठन किया। देशभक्ति के साथ साहित्य के क्षेत्र में उनका अहम योगदान रहा। बौद्ध संस्कृति साहित्य पर उनको ‘डॉक्टरेट’ की उपाधि से सम्मानित भी किया गया।
मात्र 19 वर्ष की आयु में इंग्लिश चैनल पार करने वाली हिंदुस्तान की जलपरी के नाम से मशहूर आरती साहा ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया ।इस कीर्तिमान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया।
“3 अक्टूबर 1672 को राणा अमर सिंह द्वितीय का जन्म हुआ ।वे मेवाड़ साम्राज्य के राजपूताना शासक बने ।मातृभूमि की समृद्धि के लिए राजपूतों को एकजुट करने में उनकी अहम भूमिका रही। इतिहास में उनकी वीरता ,शौर्य, त्याग ,पराक्रम अमर रहेगा
1576 में महाराणा प्रताप की नेतृत्व में ऐतिहासिक हल्दीघाटी युद्ध में बहलोल खान को उनके घोड़े सहित दो टुकड़ों में छिन्न-भिन्न कर दिया था। “
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रत्येक वर्ष के 6 नवंबर को युद्ध और सशस्त्र संघर्ष में पर्यावरण के शोषण को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया। युद्ध के समय, यह पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है जैसे कि पानी को दूषित करना, जंगल को जलाना, जानवरों को मारना, आदि।
स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले बिपिन चंद्र पाल का जन्म 7 नवंबर, 1858 को अविभाजित भारत के हबीबगंज जिले में (अब बांग्लादेश में) एक संपन्न कायस्थ परिवार में हुआ था।स्वतंत्रता संग्राम के दौरान गरम राष्ट्रवादी विचारों के प्रतीक रहे।
निशिकांत पंडित नंद राम बाबू जी के यहां किराएदार के तौर पर रह रहे हैं |पंडित जी की बड़ी-बड़ी आंखें हमेशा निराशा ,अभिमान और क्रोध से तमतमायी सी रहती है अपनी मान्यताओं किसी भी कीमत पर समझौता नहीं कर सकते और पंडित जी स्वभाव कुछ बेबाक किस्म का है इस वजह से सभी लोग उनसे कन्नी काटते हैं |निशिकांत भी पंडित जी के स्वभाव को से हमेशा खिन्न सा रहता है किंतु निशिकांत के जीवन में ऐसी घटना घटी है तब उन्हें सिवाय पंडित जी के अलावा कोई साथ देने वाला नहीं नजर आया |ऐसा क्या हुआ था निशिकांत के जीवन में ?पंडित जी ने किस प्रकार निशिकांत की उस समय मदद करी ? विष्णु प्रभाकर के द्वारा लिखी गई रोचक कहानी पंडित जी ,जानते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में
ब्रह्म समाज की स्थापना और सती प्रथा जैसी प्रथा के अलावा भारतीय समाज में व्याप्त ज्वलंत मुद्दों पर जन-जन तक एक नवीन चेतना को जागृत करने में अहम भूमिका निभाने वाले राजा राममोहन राय का निधन 27 सितंबर 1833 को हो गया
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