“मिथाली राज: महिला क्रिकेट का आइकॉन! उनकी उपलब्धियों ने न केवल खेल को नया आयाम दिया है, बल्कि युवाओं को भी प्रेरित किया है। उनके संघर्ष और सफलता की कहानी को जानने के लिए Gaatha ऐप डाउनलोड करें और Navratri स्पेशल ‘उड़ान हौसलों की’ में जाकर बस क्लिक कर सुनिए Arti Srivastava की खूबसूरत आवाज़ में!””
“वरिष्ठ पत्रकार, फिल्म समीक्षक, और पद्मश्री सम्मानित शीला झुंझुनवाला ने 97 वर्ष की आयु में भी लेखन और समाजसेवा में अपनी सक्रियता को बनाए रखा है। उनका नया उपन्यास “”पतझड़ में वसंत”” वृद्ध व्यक्तियों की त्रासदी को बखूबी प्रस्तुत करता है।
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“किरण मजूमदार शॉ ने साबित कर दिया है कि सच्ची लगन, कठिन मेहनत, और समझदारी से कोई भी सफलता के शिखर को छू सकता है। बॉयोकॉन की फाउंडर और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी होने के बावजूद, उनका सफर चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने बायोकॉन की शुरुआत एक छोटे से गैराज से की और आज इसे वैश्विक पहचान दिलाई। भारत की सबसे ताकतवर महिलाओं में शामिल किरण की कहानी उनकी अटूट इच्छाशक्ति और अद्वितीय प्रबंधन कुशलता की मिसाल है।
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“शोभना भरतिया, एचटी मीडिया की चेयरपर्सन और भारत की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से एक, जो देश के सबसे बड़े मीडिया साम्राज्यों में से एक का नेतृत्व करती हैं। पत्रकारिता की दुनिया में अपने बेहतरीन दृष्टिकोण और नेतृत्व से उन्होंने नई मिसालें कायम की हैं। राजसभा सदस्य और सामाजिक मुद्दों पर उनकी गहरी समझ ने उन्हें एक आदर्श लीडर के रूप में स्थापित किया है। शोभना भरतिया की कहानी एक प्रेरणा है, जो बताती है कि कैसे मजबूत नेतृत्व और साहसिक फैसले किसी को ऊँचाइयों पर पहुंचा सकते हैं।
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मेरे राम
सुनिए राम… महसूस कीजिए राम
“मेरे राम” एक ऐसा विशेष संग्रह है, जहाँ प्रभु श्रीराम केवल कथा के पात्र नहीं, बल्कि जीवन, आदर्श, मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं के रूप में आपके सामने उपस्थित होते हैं।
इस विशेष संकलन में सुनिए —
📖 रामचरितमानस की दिव्य चौपाइयाँ और प्रसंग
🎙️ “मानव हैं मेरे राम” जैसी भावपूर्ण श्रृंखला
🪔 राम पर आधारित कविताएँ, कथाएँ और आध्यात्मिक अनुभूतियाँ
यह संग्रह आपको राम के अनेक रूपों से जोड़ता है —
आराध्य राम, मर्यादा पुरुषोत्तम राम, और मानवता के प्रतीक राम।
यह केवल श्रवण नहीं… एक आत्मिक यात्रा है —
राम को समझने की, राम को जीने की, राम को महसूस करने की।
🎧 सुनिए
“मेरे राम”
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“लक्ष्मी अग्रवाल ने एसिड हमले के बाद सिर्फ अपने जीवन को नहीं बल्कि पूरे समाज की सोच को बदलने का प्रण लिया। उनकी साहसिकता और सक्रियता ने कई लोगों को प्रेरित किया है। उनके संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में अधिक जानने के लिए Gaatha ऐप डाउनलोड करें और इस प्रेरणादायक कहानी को सुनें!”
अब्दुल हमीद मसऊदी (1 जुलाई 1933 – 10सितम्बर 1965)भारतीय सेना की 4 ग्रेनेडियर में एक सिपाही थे जिन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान खेमकरण सैक्टर के आसल उत्ताड़ में लड़े गए युद्ध में अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करते हुए वीरगति प्राप्त की जिसके लिए उन्हें मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च सेना पुरस्कार परमवीर चक्र मिला।युद्ध में शहीद होने से पहले पाकिस्तानी सेना के आठ पैटन टैंको को नष्ट कर लड़ाई का रुख पलट दिया था| पाकिस्तान को भागना पड़ा था और इस तरह से भारतीय सेना को विजय मिली थी
रूढ़िवादी परिवार से होने तथा पति के द्वारा दी गई यातना के बावज़ूद एक अबला सी लगने वाली महिला कैसे करोड़ों रुपए की कंपनी की मालकिन बनी? जानिए अबला से सबला बनने का पूरा सफ़र भारती सुमारिया जी का ,आम आदमी की खास कहानी में….
“सोमा मोंडल, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) की पहली महिला अध्यक्ष, जिन्होंने अपने नेतृत्व और दूरदृष्टि से भारतीय स्टील उद्योग में नए आयाम स्थापित किए हैं। फोर्ब्स द्वारा दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में शामिल, सोमा मोंडल की यात्रा प्रेरणादायक है। उनके प्रबंधन के पहले साल में सेल का मुनाफा तीन गुना बढ़ा और उन्होंने कंपनी को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। एक छोटे से ओडिया परिवार से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से इतिहास रचा।
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कुंभ में नागा साधुओं की अनोखी भूमिका
कुंभ मेला केवल आस्था और अध्यात्म का पर्व नहीं, यह नागा साधुओं के साहस, तपस्या और अनूठे जीवन का अद्भुत दर्शन भी है।
नागा साधु:
आत्मसंयम और त्याग के प्रतीक
कठिन तपस्या और ब्रह्मचर्य का मार्ग
आंतरिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति का स्रो
“लक्ष्मी अग्रवाल ने एसिड हमले के बाद सिर्फ अपने जीवन को नहीं बल्कि पूरे समाज की सोच को बदलने का प्रण लिया। उनकी साहसिकता और सक्रियता ने कई लोगों को प्रेरित किया है। उनके संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में अधिक जानने के लिए Gaatha ऐप डाउनलोड करें और इस प्रेरणादायक कहानी को सुनें!”
जब किसी औरत के सिर से उसके पति का साया उठ जाता है तो समाज, बिरादरी, रिश्तेदारी में उसकी कोई इज्जत नहीं रह जाती ।मान सम्मान नहीं रह जाता है । हर शख्स उसे बिना तनख्वाह का नौकर मान लेता है और ऐसे हालात के मारे बच्चे की परवरिश ऊपर वाले के हाथ होती है। कल्लू की जिंदगी में ऐसा मोड़ आया कि उसकी जिंदगी ही बदल गई।
रफाकत हुसैन ₹10 मासिक वेतन में भी संतुष्ट रहने वाला व्यक्ति था । पत्नी भी साध्वी थी। जीवन सुखमय व्यतीत हो रहा था कि तभी पत्नी का देहांत हो गया। जिसने उसे तोड़ कर रख दिया । घर -गृहस्थी संभालने के लिए दूसरा विवाह कर तो लिया किंतु जिंदगी नरक बन गई। अब वह हर वक्त मौत माँगता है।
अनिकेत – Malti Joshi (मालती जोशी) – Arti Srivastava
माँ की मृत्यु के बाद वीरेश और विशाखा ने जिया में ही अपनी माँ को देखा । लेकिन नई बहू उसे सास के रूप में स्वीकार नहीं कर सकी । वह जिया को साथ रखना नहीं चाहती थी । पिता की मृत्यु के बाद वीरेश को जिया की चिंता सताने लगी क्योंकि वह सच्चाई से अनभिज्ञ नहीं था । ऐसी क्या सच्चाई थी जिसकी वजह से वीरेश को जिया की इतनी चिंता थी ? वह जिया के लिए इतना बेचैन क्यों था?
कुबरा जवान थी। कौन कहता था कि कुबरा जवान थी ? वह तो जैसे बिस्मिल्लाह के दिन से ही अपनी जवानी की आमद की सुनावनी सुनकर ठिठक कर रह गई थी। ना जाने कैसी जवानी आई थी, कि ना तो उसकी आँखों में किरने थी। ना उसके रुखसारों के ऊपर जुल्फें परेशान हुई। ना उसके सीने पर तूफान उठे ।और ना उसने सावन भादो की घटाओं से मचल-मचल कर प्रीतम यह सावन माँगे।
हर सास को अपनी बहू हमेशा अनुभवहीन, गवाँर और बेअकल ही नजर आती है। उसे तो जैसे कुछ आता- जाता ही नहीं है। लेकिन अपने पोता – पोती पर तो जान छिड़कती है। कहते हैं ना असल से सूद ज्यादा प्यारा होता है । फिर भी दादी को डर सताता रहता है । किस बात का ?
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