कहानी ने निमिषा एक हाउसवाइफ है |निमिषा -अनिकेत की दो बेटियां हैं मानसी और रूपसी | निमिषा अपनी दोनों बेटियों को अपने जीवन से जुड़ी कुछ बातें साझा कर रही है मानसी और रूपसी से | निमिषा की यह बातें और विचार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के विचारों के अंतराल को कैसे समेट रही है |जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ जी के द्वारा लिखी गई कहानी पीढ़ियों का अंतराल, पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
यह कहानी एक सांवली सी लड़की फिरदौस की है और फरजाना उसकी अन्य दो बहने गोरी और सुंदर है सब की शादियां खूब धूमधाम से होती है उन्हीं की एक बड़ी बहन है फिरदौस कद काठी नाक नक्श अच्छे हैं किंतु सांवला रंग |घर के कामों में वह निपुण है किंतु उदासीन और सहमी सहमी रहती है उसका सांवला रंग उसके व्यक्तित्व को उदासीन बना रहा है क्या उसके जीवन में भी खुशियां आती हैं पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ के द्वारा लिखी गई कहानी एक सांवली सी परछाई पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
रक्षाबंधन…एक ऐसा त्योहार, जहाँ कभी खीर की मिठास, मेहंदी की खुशबू, रेशमी राखियों के धागे और भाई-बहन की मासूम नोक-झोंक रिश्तों को और भी खूबसूरत बना देती थी।
लेकिन क्या होता है जब वही रिश्ते बड़े होते-होते औपचारिकताओं, अहंकार, स्वार्थ और दूरियों के बोझ तले दबने लगते हैं?
कविता और शांतनु भाई बहन है |एक समय ऐसा भी था कि दोनों भाई- बहन में असीम प्रेम झलकता था| किंतु आज क्या? क्यों उनके बीच में इतनी दूरियां पैदा हो गई ?
‘आँखों में किरकिराते रिश्ते’ एक भावनात्मक और कड़वी सच्चाई को सामने लाने वाली कहानी है, जो बचपन की निश्छल मोहब्बत से लेकर बड़े होने पर रिश्तों में आती कड़वाहट तक की यात्रा को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाती है।
यह कहानी सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते की नहीं, बल्कि उन बदलते पारिवारिक संबंधों की भी है, जहाँ कभी बिना शर्त वाला प्यार धीरे-धीरे उम्मीदों, हिसाब-किताब और औपचारिक व्यवहार में बदल जाता है।
सुनिए एक ऐसी कहानी, जो शायद आपको अपने ही रिश्तों के आईने से रूबरू करवा दे…
सिर्फ Gaatha पर।
प्रेम एक ऐसी अनुभूति है जो कब , कैसे , किसके लिए महसूस होगी , ये कह पाना कब सम्भव हुआ है? अविनाश, एक फ़ौजी अफ़सर, जिसकी पहली शादी का अनुभव बहुत ही तकलीफ़देह रहा था, उसने शादी ना करने का मन बना लिया था । सुधा, एक आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी, रूप- गुण युक्त एक स्वावलंबी महिला थी। और उसने भी शादी को कुछ ख़ास तवज्जो नहीं दी थी। और फिर, नीलांजना , बचपन को पीछे छोड़ती वो रूपसी तरुणी जिसके लिए दुनिया रंगो से सजी जीवंत तस्वीर जैसा था । इन तीनो किरदारो के जीवन तार एक दूसरे से कैसे उलझते है , आइए सुनते है मनीषा कुलश्रेष्ठ की भावनाओं में डूबती उतराती इस कहनी “ अधूरी तसवीरें” मे..,
शान्तनु, अशोक की नीलांजना दीदी को , दीदी कभी नहीं बुला पाया. शान्तनु का किशोर मन शायद नीलांजना के रूप सौन्दर्य से इतना प्रभावित नहीं था जितना उसकी कुशाग्र बुद्धि और आत्मविश्वास से भरे सौम्य व्यक्तित्व से। .. .. शान्तनु का किशोरावस्था का प्यार क्या नीलांजना समझ पायी थी? क्या परिवार के सहयोग के बिना भी नीलांजना अपने भविष्य को सवार पायी थी? क्यो शान्तनु ने नीलांजना को सम्बोधित किया वीरांगना के नाम से , जानिए मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी वीरांगना में
प्रेम एक ऐसी अनुभूति है जो कब , कैसे , किसके लिए महसूस होगी , ये कह पाना कब सम्भव हुआ है? अविनाश, एक फ़ौजी अफ़सर, जिसकी पहली शादी का अनुभव बहुत ही तकलीफ़देह रहा था, उसने शादी ना करने का मन बना लिया था । सुधा, एक आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी, रूप- गुण युक्त एक स्वावलंबी महिला थी। और उसने भी शादी को कुछ ख़ास तवज्जो नहीं दी थी। और फिर, नीलांजना , बचपन को पीछे छोड़ती वो रूपसी तरुणी जिसके लिए दुनिया रंगो से सजी जीवंत तस्वीर जैसा था । इन तीनो किरदारो के जीवन तार एक दूसरे से कैसे उलझते है , आइए सुनते है मनीषा कुलश्रेष्ठ की भावनाओं में डूबती उतराती इस कहनी “ अधूरी तसवीरें” मे..,
शान्तनु, अशोक की नीलांजना दीदी को , दीदी कभी नहीं बुला पाया. शान्तनु का किशोर मन शायद नीलांजना के रूप सौन्दर्य से इतना प्रभावित नहीं था जितना उसकी कुशाग्र बुद्धि और आत्मविश्वास से भरे सौम्य व्यक्तित्व से। .. .. शान्तनु का किशोरावस्था का प्यार क्या नीलांजना समझ पायी थी? क्या परिवार के सहयोग के बिना भी नीलांजना अपने भविष्य को सवार पायी थी? क्यो शान्तनु ने नीलांजना को सम्बोधित किया वीरांगना के नाम से , जानिए मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी वीरांगना में
कहानी में मन्नो की बड़ी बहन शैलजा जो महज जब वह 17 वर्ष की थी ,मृत्यु हो जाती है| आज उस बात को बीते कई वर्ष बीत चुके हैं| किंतु मन्नो अपनी बहन की मृत्यु के दर्द की पीड़ा से अभी मुक्त नहीं हो पाई है| क्या उसके अपने भी इस दर्द को समझ पाएंगे |शैलजा की यादें मन्नो किस प्रकार अपने अंदर समेटे हुए हैं| जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ की भावुक कर देने वाली कहानी लाल डायरी ,पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
Female Protrayal in Bollywood with Anandita Bhasin
Celebrating 88th Bithday of melody queen Asha Bhosle With Pooja
हेमराज को कन्हैयालाल समझदार मानता था। हेमराज ने समझाया-बहू को प्यार तो करना ही चाहिए, पर प्यार से उसे बिगाड़ देना या सिर चढ़ा लेना भी ठीक नहीं। औरत सरकश हो जाती है, तो आदमी को उम्रभर जोरू का गुलाम ही बना रहना पड़ता है शादी के बाद औरत को काबू में रखने के प्रयोजन से कन्हैयालाल शादी के बाद लाजो पर विभिन्न प्रकार की यातनाएं देने लगता है किंतु जब करवा चौथ का वाले दिन कन्हैयालाल उसी प्रकार लाजो को प्रताड़ित करता है तो लाजो का सब्र टूट जाता है क्या इतना सब कुछ होने के बाद लाजो कन्हैयालाल के लिए व्रत रखेगी? कन्हैयालाल को क्या अपनी गलती का एहसास होगा? क्या होगा उनके वैवाहिक जीवन का ?पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं यशपाल जी के द्वारा लिखी गई कहानी करवा का व्रत ,सुमन वैद्य की आवाज में
मोबाइल मोहब्बत- ममता कालिया – शैफाली कपूर
मुग्धा को अपने बचपन से जब से वह सही से बोल भी नहीं पाती थी तब से उसे मोबाइल फोन से जो मोहब्बत हुई ,उसका असर उसके हर एक क्रियाकलाप में देखा जा सकता है किंतु आज तो मुग्धा की शादी नमित के साथ हो रही है। क्या इन दोनों के जीवन की इस नयी शुरुआत करने पर मोबाइल फोन क्या कोई अपना रंग दिखायेगा?कैसी रहेगी विवाह के बाद की उनकी शुरुआत?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी मोबाइल मोहब्बत, शेफाली कपूर की आवाज़ में
किब्बर – संजय शेफर्ड – पल्लवी
कभी-कभी हमारा मन भीड़-भाड़ की जगह से हटकर किसी शांत, कम जनसंख्या वाले क्षेत्र और बेहद खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों के बीच में जाने का करता है, तो अब घुमंतू ने आपकी इस समस्या का समाधान कर दिया है। दुनिया की सबसे ऊंचाई में बसे एक गांव किब्बर की ओर आपका ध्यान आकर्षित कराते हुये ।यहां के सादा और उत्साहपूर्ण जीवन को देखकर आपका मन खुशी से झूम उठेगा। हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत गांव किब्बर की यात्रा करें,घुमंतू के साथ पल्लवी की आवाज़ में सिर्फ़ गाथा पर..
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नारी अपना पूरा जीवन घर बनाने में लगा देती है ।फिर भी उस घर में निर्णय लेने का अधिकार उसे क्यों नहीं दिया जाता ? क्यों हमेशा घर का आदमी ही निर्णय लेने का अधिकारी होता है ? लेकिन छाया को यह बात अब गवारा नहीं है। इसलिए उसने निर्णय लिया और पति को जता भी दिया कि जितना अधिकार उसका है घर पर, उतना ही अधिकार छाया का भी है।
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Pragati Sharma