संसार की ओर देखने की जैसी हमारी दृष्टि होगी, संसार हमें वैसा ही दिखाई देगा।कैसे ? विनोबा भावे द्वारा लिखी गई कहानीजैसी दृष्टि सुनते हैं ,शिवानी आनंद के द्वारा
अतृप्त आत्माओं से भरे एक महल की कथा जिसका एक एक पत्थर जिंदा व्यक्तियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
यह कहानी कृषक वर्ग की चुनौतियों को हमारे सामने रखती है जिसके चलते उन्हें कई बार अपनी जान तक देनी पड़ती है।
पांडु पुत्र अर्जुन ने जयद्रथ का वध करने की प्रतिज्ञा ली, किंतु गुरु द्रोणाचार्य ने ऐसे व्यूह की रचना की, कि उस दिन का युद्धयुद्ध खत्म होने की सीमा तक जयद्रथ अर्जुन के सामने नहीं आया| ऐसे में किस प्रकार अर्जुन की प्रतिज्ञा पूर्ण हो पाई एवं भीम पुत्र घटोत्कच एवं गुरु द्रोणाचार्य की मृत्यु किस प्रकार हुई ?महाभारत की इन रोचक प्रसंगों को सुनते हैं ,शिवानी आनंद की आवाज में…
एक बार राजा विक्रमादित्य के सलाहकारों ने बताया कि पाताल लोक के राजा शेषनाग का ऐश्वर्य देखने लायक है| विक्रमादित्य ने सशरीर पाताल लोक जाकर उनसे भेंट करने की ठान ली |जब वह पाताल लोक पहुंचे तो शेषनाग उनके व्यवहार से अति प्रसन्न हुए और भेंट स्वरूप अलग-अलग खूबियों वाले चार बहुमूल्य रत्न उन्हें दिए |अब वापस मृत्युलोक पर लौटने पर राजा विक्रमादित्य ने उन बहुमूल्य बहुमूल्य रत्नों का क्या किया? इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सोलहवीं पुतली सत्यवती राजा विक्रमादित्य और पाताल लोक की यात्रा, शिवानी आनंद की आवाज में..
झलकारी बाई (22 नवंबर 1830 – 4 अप्रैल 1857) झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की नियमित सेना में, महिला शाखा दुर्गा दल की सेनापति थीं। वे लक्ष्मीबाई की हमशक्ल भी थीं इस कारण शत्रु को गुमराह करने के लिए वे रानी के वेश में भी युद्ध करती थीं। अपने अंतिम समय में भी वे रानी के वेश में युद्ध करते हुए वे अंग्रेज़ों के हाथों पकड़ी गयीं और रानी को किले से भाग निकलने का अवसर मिल गया।
उद्भव – Stories of Indian Scientists | Gaatha Original
विज्ञान की हर खोज एक प्रश्न से शुरू होती है, और हर वैज्ञानिक की यात्रा एक जिज्ञासा से।
उद्भव भारत के उन वैज्ञानिकों की कहानियों की श्रृंखला है जिन्होंने सीमित संसाधनों, सामाजिक चुनौतियों और अनगिनत असफलताओं के बीच ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के नए रास्ते बनाए।
यह सीरीज़ हमें प्रयोगशालाओं के भीतर ही नहीं, बल्कि उन मानवीय संघर्षों, संकल्प और सपनों के करीब ले जाती है जो हर खोज के पीछे छुपे होते हैं।
यहाँ आप सुनेंगे— किसी का बचपन, किसी की असफल प्रयोगशालाएँ, किसी का समाज से टकराव,
और अंततः उस क्षण की कहानी जब विचार ने खोज का रूप लिया।
उद्भव केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों की गाथा नहीं है—
यह सोचने, सवाल करने और कभी न रुकने की प्रेरणा है।
🎧 सुनिए उन दिमाग़ों की कहानियाँ जिन्होंने भारत के भविष्य की नींव रखी।
उद्भव – Stories of Indian Scientists | Gaatha
Share Market में आने से पहले, ये जानो 💯 – Share Market Guide – Vivek Bajaj – Josh Talks Hindi
पद्मश्री उड़न सिख मिल्खा सिंह का जन्मदिन है। स्वर्गीय मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवंबर,1929 को मौजूदा पाकिस्तान के गोविंदपुरा शहर में हुआ था। उनका जीवन खेल को ही समर्पित रहा। मिलखा सिंह मरते दम तक खिलाड़ियों में जोश भरने का काम करते रहे।
Reviews for: Jaisi drashti (जैसी दृष्टि)