सुधा अरोड़ा की एक कहानी में एक औरत के वास्तविक रूप के पारदर्शिता साफ तौर पर झलकती है कि एक स्त्री की संपूर्णता उसके घर तक सीमित क्यों रह जाती है ? क्या वास्तव में एक स्त्री का जीवन सिर्फ अपने घर -परिवार तक ही सीमित होना चाहिए या फिर स्वयं के लिए भी उसे एक हिस्सा रखना चाहिए ? एक स्त्री के इतना सब कुछ करने के बावजूद क्या उसका खुद का कोई अस्तित्व बन पाता है? ऐसे ही प्रश्नों के ताने-बाने में उलझी हुई यह कहानी एक औरत तीन बटा चार सुनते हैं, शिवानी आनंद की आवाज में..
यह कहानी कृषक वर्ग की चुनौतियों को हमारे सामने रखती है जिसके चलते उन्हें कई बार अपनी जान तक देनी पड़ती है।
ये एक ऐसे युगल की कहानी है जो कार से ड्राइव करते हुए दूर किसी पार्टी में जा रहे हैं और उनमें निरंतर एक अन्य युगल, जिसका नाम मिस्टर एंड मिसेज मेहता है की आमदनी और जीवनशैली को लेकर बातचीत और नोकझोक चल रही है। अंततः एक फोन से उन्हें अवगत कराया जाता है कि मिस्टर मेहता का सारा दिखावा झूठ था और अब वह दिवालिया हो गए हैं।
यह कहानी कृषक वर्ग की चुनौतियों को हमारे सामने रखती है जिसके चलते उन्हें कई बार अपनी जान तक देनी पड़ती है।
जिससे तुम्हारा नुकसान हो रहा हो, उससे अलग ही रहना अच्छा है, चाहे वह उस समय के लिए तुम्हाहरा दोस्तु भी क्यों न हो।पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी जी के द्वारा लिखी गई कहानी दो घड़े, निधि मिश्रा की आवाज में
पाषाणी मृगमयी नाम की एक लड़की की कहानी है, जिससे अपूर्व नाम के लड़के को प्रेम होता है तथा वह उससे विवाह भी करता है। किंतु मृगमयी की प्रकृति से बचपना है की जाने का नाम नहीं लेता। परिस्थितियां विपरीत तब होती हैं जब अपूर्व कई वर्षो के लिए कलकत्ता चला जाता है और लौट कर नहीं आता…
कुसुम जिसे घाट पर बैठकर घंटो पानी की लहरें देखना अच्छा लगता था, अपने वैधव्य के बाद प्रेम में पड़कर उसे न पा सकने के दुख को बर्दाश्त न करते हुए उसी घाट पर उन्ही लहरों में समा गई।
एक बार विजय नगर में बाढ़ आ गई | राहत के नाम पर मंत्री जी ने काफी सारा धन राजकोष से ले लिया |तेनालीरामा को मंत्री जी की के क्रियाकलापों से संशय उत्पन्न हुआ कि वह धनराशि जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचाई जा रही है| तेनालीरामा ने ऐसा क्या किया कि कृष्णदेव राय को भी सच्चाई का पता चल गया ?जानते हैं इस रोचक किस्से को तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी बाढ़ और बचाव ,शिवानी आनंद की आवाज में…
कहानी में मन्नो की बड़ी बहन शैलजा जो महज जब वह 17 वर्ष की थी ,मृत्यु हो जाती है| आज उस बात को बीते कई वर्ष बीत चुके हैं| किंतु मन्नो अपनी बहन की मृत्यु के दर्द की पीड़ा से अभी मुक्त नहीं हो पाई है| क्या उसके अपने भी इस दर्द को समझ पाएंगे |शैलजा की यादें मन्नो किस प्रकार अपने अंदर समेटे हुए हैं| जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ की भावुक कर देने वाली कहानी लाल डायरी ,पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
बेहद भावुक कर देने वाली मनु भंडारी जी के द्वारा लिखी गई कहानी जिसमें समाज बीमार व्यक्ति की चिंता करता है किंतु उस व्यक्ति का कोई ख्याल नहीं रखता जो उसकी दिन-रात सेवा करता है कहानी में अम्मा जो अपने खाने-पीने और सोने का ध्यान ना रखते हुए अपने अपने कैंसर से पीड़ित बीमार पति की दिन-रात सेवा करती है उनके पति की मृत्यु हो जाती है तब भी क्या किसी का ध्यान अम्मा के ऊपर जाता है जानते हैं आरती श्रीवास्तव की आवाज में कहानी मुक्ति
कहानी विदेश में रह रहे एक भारतीय परिवार की है ।जहां उन्हीं के बेटे का शादी का कार्ड आज उनके पास आया है ।कार्ड में मां -बाप का नाम भी नहीं है विदेशी संस्कृति से प्रभावित बेटे में भारतीय संस्कृति और संस्कार की छाप कहीं भी नज़र नहीं आ रही है ।ऐसा क्यों हुआ? क्या यह पीढ़ी का अंतर है या फिर देशांतर लेकिन आज जिस बात के लिए मां-बाप अपने बेटे के लिए अफ़सोस कर रहे हैं, क्या वह स्वयं इस बात के लिए जिम्मेदार हैं ?इस प्रश्न को समेटे हुए कहानी किस मोड़ पर रूकती है सुनते हैं सुदर्शन प्रियदर्शिनी की लिखी कहानी देशांतर, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में..
इंसान ना जाने क्यों अपने आपको मशीन समझने लगा है ?बस दिन-रात बिना रुके,संभले दौड़ता चला जा रहा है | इंसान यह नहीं समझ पा रहा कि वास्तव में मशीन में लगी जंग को तो मिटाया जा सकता है किंतु इंसान के अंदर जो जंग लग जाती है वह कैसे हटाई जा सकती है? दुनिया में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ और कंपैरिजन ने आज इंसान को किस दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है ? यह बात किस हद तक सही है ?इस तथ्य को रखती हुई कहानी है किस्सा एक त्रासद फंतासी का ,सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज़ में….
Reviews for: Ek aurat teen bata char (एक औरत : तीन बटा चार)