बेताल, विक्रमादित्य से पूछता है कि यदि मां और पुत्री में अगर एक ऐसा रिश्ता बन जाए कि पुत्री अपनी मां की ही सास बन जाए और मां ,अपनी पुत्री की बहू.. तो बताओ राजन् कि माँ-बेटी के जो बच्चे हुए, उनका आपस में क्या रिश्ता हुआ ?क्या विक्रमादित्य बेताल के इस प्रश्न का उत्तर दे पाते हैं ,इसे जानने के लिए सुनते हैं बेताल पच्चीसी की कहानियों में से एक कहानी मां -बेटी के बच्चों में क्या रिश्ता हुआ?, शिवानी आनंद की आवाज में..
दो सहपाठी लड़कियों की कहानी जो एक दूसरे से स्पर्धा रखती हैं किंतु एक तो खुद को उससे बढ़कर दिखाने की होड़ में सही गलत का फर्क भी भूल जाती है।
बनवारी जो पत्नी से बेहद प्रेम करता है, अपने हालदार परिवार के के बड़े बेटे होने का फर्ज न निभाते हुए केवल उसकी खुशी के लिए ही सब करता है लेकिन परिस्थिति तब बदल जाती है जब उसे पता चलता है कि उसकी पत्नी किरण की नज़र में उसका कोइ मोल नहीं और वह जी जान से अपने देवर के पुत्र हरिदास की देखभाल करते हुए कब उसकी पत्नी से ज्यादा हालदार परिवार की बड़ी बहू बन गई बनवारी को पता ही नहीं चला।
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