पाषाणी मृगमयी नाम की एक लड़की की कहानी है, जिससे अपूर्व नाम के लड़के को प्रेम होता है तथा वह उससे विवाह भी करता है। किंतु मृगमयी की प्रकृति से बचपना है की जाने का नाम नहीं लेता। परिस्थितियां विपरीत तब होती हैं जब अपूर्व कई वर्षो के लिए कलकत्ता चला जाता है और लौट कर नहीं आता…
पाषाणी मृगमयी नाम की एक लड़की की कहानी है, जिससे अपूर्व नाम के लड़के को प्रेम होता है तथा वह उससे विवाह भी करता है। किंतु मृगमयी की प्रकृति से बचपना है की जाने का नाम नहीं लेता। परिस्थितियां विपरीत तब होती हैं जब अपूर्व कई वर्षो के लिए कलकत्ता चला जाता है और लौट कर नहीं आता…
पाषाणी मृगमयी नाम की एक लड़की की कहानी है, जिससे अपूर्व नाम के लड़के को प्रेम होता है तथा वह उससे विवाह भी करता है। किंतु मृगमयी की प्रकृति से बचपना है की जाने का नाम नहीं लेता। परिस्थितियां विपरीत तब होती हैं जब अपूर्व कई वर्षो के लिए कलकत्ता चला जाता है और लौट कर नहीं आता…
पाषाणी मृगमयी नाम की एक लड़की की कहानी है, जिससे अपूर्व नाम के लड़के को प्रेम होता है तथा वह उससे विवाह भी करता है। किंतु मृगमयी की प्रकृति से बचपना है की जाने का नाम नहीं लेता। परिस्थितियां विपरीत तब होती हैं जब अपूर्व कई वर्षो के लिए कलकत्ता चला जाता है और लौट कर नहीं आता…
फणिभूषण और मणिमल्लिका के प्रेम, मिलन और विछोह की रहस्यमई कहानी।
यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो अपनी बाल विधवा पड़ोसन से प्रेम तो करता है किंतु समाज और अन्य भय से कह नहीं पाता। वहीं उसका एक मित्र जो कि उसी से कविताएं सीखने आता है, उसी की लिखी कविताएं सुनाकर उसकी पड़ोसन से प्रेम विवाह कर लेता है।
सुभाषिनी नाम की ऐसी लड़की की कहानी जो बोल नहीं सकती, इसलिए उसकी मित्रता भी मूक प्राणियों से अधिक है जिसे बोलने वाले समाज से हमेशा निरादर ही प्राप्त हुआ।
फणिभूषण और मणिमल्लिका के प्रेम, मिलन और विछोह की रहस्यमई कहानी।
The story shows how the groom side of the family used to take upperhand in every area during a marriage settlement and the social custom like dowry issue sometimes goes to such extent that leads to death, exploitation and mental torture. In this occasion the bride ultimately died as a result of this social customary evil.
सुबल और सुशील नामक पिता और पुत्र की ऐसी कहानी जिसमे इच्छा पूरी करने वाली देवी उन्हें अदला बदली का वरदान देकर उनकी इच्छा पूरी करती हैं लेकिन इस वरदान से तंग आकर वे पुनः देवी से उन्हें पहले जैसा कर देने की प्रार्थना करते हैं।
आज छठा दिन था। बच्चे स्कूल छोड़े घरों में बैठे ,अपनी और सारे घर वालों की जिंदगी मुसीबत किए दे रहे थे । कोई और मामूली दिन होता तो कमबख्तों से कहा जाता कि बाहर मुँह काला करके गदर मचाओ। लेकिन चंद रोज से शहर का वातावरण इतना खराब था कि शहर के सारे मुसलमान एक तरह से नजरबंद थे। झटपट सामान बँधने लगा। अम्मा ने जाने से साफ इनकार कर दिया। लाख समझाने के बावजूद वे राजी़ न हुई । सारा घर खाली हो गया ।और अम्मा उजाड़ सहन में आकर खड़ी हुई तो उनका बूढ़ा दिल नन्हे से बच्चे की तरह सहम कर कुम्हला गया।
दो भाईयों की ऐसी कहानी जो अपनी पत्नियों के रोज़ रोज़ के झगड़े से आहत हैं। एक दिन खाना मांगने पर न मिलने से क्रुद्ध हो एक भाई अपनी पत्नी के सर पर प्रहार करता है जिससे कि उसकी मृत्यु हो जाती है लेकिन दूसरा भाई सबके सामने बताता है कि खून भाई ने नहीं बल्कि उसकी पत्नी ने किया है क्योंकि उसका मानना है कि पत्नी तो उसे और मिल जाएगी लेकिन भाई तो दूसरा नहीं मिल सकता।
भक्तिन का यह नाम मेरा दिया हुआ है। पाँच वर्ष की अवस्था में वह ब्याह दी गई और नौ वर्ष की बालावस्था में गौना भी कर दिया गया । गेंहुए रंग और बटिया जैसे मुख वाली कन्याओं को जन्म देने के कारण जेठानियाँ उसकी उपेक्षा करने लगी। पति की मृत्यु के पश्चात उसकी जायदाद पर जेठों की नजर थी। किंतु वह एक सुई की नोक के बराबर भी जायदाद देने को तैयार ना थी। अपनी जायदाद को बचाने के लिए उसने क्या किया?
नानक चंद जी धर्मनिष्ठ, दिल के मजबूत आदमी वाले महाजन है |उनके पास एक धमकी भरा पत्र आता है |जिसमें उनसे ₹25000 की मांग की गई है| नानक चंद जी इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं और उनका क्या होता है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद जी के द्वारा लिखी गई कहानी खुदाई फौजदार ,सुमन वैद्य जी की आवाज में
एक ऐसा गुरु- शिष्य की कहानी जहां गुरु श्रापित है, कि जब तक उसे कोई योग्य शिष्य नहीं मिल जाता तब तक उसकी आत्मा इसी संसार में अटकी रहेगी क्या उसकी आत्मा को मुक्ति मिल पाती है ? और यदि मिल पाती है तो ,क्या होता है उस शिष्य का यह सब जानने के लिए सुनते हैं कहानी ” ब्रह्मराक्षस का शिष्य “
हर बात को जहाँ तक हो, सँवारना चाहिए। । सूर्यकांत त्रिपाठी जी की लिखी कहानी गधा और मेंढक सुनते हैं निधि मिश्रा की आवाज में
Reviews for: Pashani (पाषाणी) – Part-3