शल्य पर्व में कर्ण की मृत्यु के पश्चात कृपाचार्य द्वारा सन्धि के लिए दुर्योधन को समझाना, सेनापति पद पर शल्य का अभिषेक, मद्रराज शल्य का अदभुत पराक्रम, युधिष्ठिर द्वारा शल्य और उनके भाई का वध, सहदेव द्वारा शकुनि का वध, बची हुई सेना के साथ दुर्योधन का पलायन, दुर्योधन का ह्रद में प्रवेश, व्याधों द्वारा जानकारी मिलने पर युधिष्ठिर का ह्रद पर जाना, युधिष्ठिर का दुर्योधन से संवाद, श्रीकृष्ण और बलराम का भी वहाँ पहुँचना, दुर्योधन के साथ भीम का वाग्युद्ध और गदा युद्ध और दुर्योधन का धराशायी होना, क्रुद्ध बलराम को श्री कृष्ण द्वारा समझाया जाना, दुर्योधन का विलाप और सेनापति पद पर अश्वत्थामा का अभिषेक आदि वर्णित है। महाभारत की कहानियों में से एक कहानी शल्य पर्व में. जिसे सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में…
चांद कुमारी एक सुंदर युवती है, किंतु उसकी उसकी मां की वजह से उसका विवाह नहीं हो रहा है |अब तेनाली रामा किस तरीके से चांद कुमारी की का विवाह कराते हैं ?इस पूरे प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी चानन की चमेली शिवानी आनंद की आवाज में..
यह कहानी कृषक वर्ग की चुनौतियों को हमारे सामने रखती है जिसके चलते उन्हें कई बार अपनी जान तक देनी पड़ती है।
आज प्रतिमा ने अपने पति आशुतोष को उसकी एक सहेली अंजलि के साथ उस दृश्य में देख लिया जिससे उसके पैरों के तले मानों ज़मीन ही सरक गई हो। प्रतिमा कैसे अपने पति और अपनी सहेली अंजलि के द्वारा दिया गया यह विश्वासघात सहन पकड़ पाएगी ?प्रतिमा अब इसके आगे क्या फैसला लेती है ?जानिए अलका सैनी की लिखी कहानी विश्वासघात में, शिवानी आनंद की आवाज़ में.।
Amit and sheela are two children who don’t want to leave their house as their father got transferred from one city to another. The story revolves around their emotional and mental strain while leaving their home, city and friends.
एक बार तेनालीराम, महाराज कृष्ण देव राय जी से रूठ गए और उन्होंने दरबार आना बंद कर दिया | जब महाराज को तेनालीराम की कमी महसूस होने लगी तो उन्होंने उन्हें बुलाने की बात सोची लेकिन यह क्या? तेनालीराम तो कई दिनों से अपने घर भी नहीं गए , आखिर तेनालीराम कहां है और राजा ने किस प्रकार उनकी खोज की? इस पूरे रोचक किस्से को सुनते हैं तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी तेनालीराम की खोज शिवानी आनंद की आवाज में
पखेरू वन में जंगल के राजा मोर द्वारा घोंसला बनाओ प्रतियोगिता आयोजित की जाती है कालू कौवा आलस के कारण जैसे -तैसे एक घोंसला बनाता है जब उसे एहसास होता है कि बाकी पक्षियों के घोंसले उससे कहीं ज्यादा सुंदर है तो वह उन्हें नुकसान पहुंचाने का उपाय सोचता है लेकिन क्या यह उसकी चाल सफल हो पाएगी क्या उसे इस अपराध के लिए दंड मिलेगा माधवी गुप्ता द्वारा लिखी गई कहानी घोसले की कहानी कौवे की जुबानी सुनते हैं नयनी दीक्षित दीक्षित की आवाज में
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