शल्य पर्व में कर्ण की मृत्यु के पश्चात कृपाचार्य द्वारा सन्धि के लिए दुर्योधन को समझाना, सेनापति पद पर शल्य का अभिषेक, मद्रराज शल्य का अदभुत पराक्रम, युधिष्ठिर द्वारा शल्य और उनके भाई का वध, सहदेव द्वारा शकुनि का वध, बची हुई सेना के साथ दुर्योधन का पलायन, दुर्योधन का ह्रद में प्रवेश, व्याधों द्वारा जानकारी मिलने पर युधिष्ठिर का ह्रद पर जाना, युधिष्ठिर का दुर्योधन से संवाद, श्रीकृष्ण और बलराम का भी वहाँ पहुँचना, दुर्योधन के साथ भीम का वाग्युद्ध और गदा युद्ध और दुर्योधन का धराशायी होना, क्रुद्ध बलराम को श्री कृष्ण द्वारा समझाया जाना, दुर्योधन का विलाप और सेनापति पद पर अश्वत्थामा का अभिषेक आदि वर्णित है। महाभारत की कहानियों में से एक कहानी शल्य पर्व में. जिसे सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में…
Saguni was a poor little girl, whose dream was to study in a school, Ipsa, another little girl of class five make Saguni’s dream come true.
जहां चाह वहां राह की कहावत को सार्थक करती कहानी। जिसमें चार चोर चोरी की राह छोड़ एक आम इंसान का जीवन बिताते हुए सबके लिए कहानी वाले बाबा बन जाते हैं।
पांडु जेष्ठ पुत्र युधिष्ठिर धर्मराज के रूप में विश्व में जाने जाते रहे हैं |कहानी में इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण मिलता है| जब यक्ष के प्रश्नों का उत्तर युधिष्ठिर के अन्य भाई नहीं दे पाते हैं ,तो उन सबको मृत्यु प्राप्त हो जाती है किंतु युधिष्ठिर यक्ष के प्रश्नों के उत्तर देकर यक्ष को प्रसन्न कर देते हैं और अपना मनचाहा वरदान भी प्राप्त कर लेते हैं |कैसे? इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी यक्ष और युधिष्ठिर संवाद भाग -1 शिवानी आनंद की आवाज में …
ये कहानी एक बकरी के बेचने और खरीदने के बहुत ही सरल माध्यम से हमे यह सिखाती है कि हमे यूं तो कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए लेकिन अगर कोई आपके साथ बुरा करे तो उसे सबक ज़रूर सिखाना चाहिए।
कहानी में हरिदत्त नाम का एक ब्राह्मण अपने खेत में सांप के बिल के पास प्रतिदिन पूजा कर दूध रखता है और अगले दिन उसे दूध वाले पात्र में एक स्वर्ण मुद्रा प्राप्त होती है | इसके आगे की कहानी जानने के लिए सुनते हैं पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी ब्राह्मण और सर्प, शिवानी आनंद की आवाज में…
महाभारत के युद्ध में गुरु द्रोणाचार्य जी की मृत्यु के पश्चात कर्ण को कौरवों का सेनापति बनाया गया |कर्ण के युद्ध कौशल से पांडु पुत्रों की हार सुनिश्चित लगने लगी ,किंतु कर्ण का सामना जब सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी अर्जुन के सामने हुआ तो युद्ध अपने चरम सीमा पर पहुंच गया | कर्ण किसी भी तरीके से अर्जुन से धनुर्विद्या में कम ना था किस प्रकार पांडु पुत्र अर्जुन के द्वारा कर्ण का वध हुआ? इस प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी कर्ण और अर्जुन का संग्राम और कर्ण वध, शिवानी आनंद की आवाज में…
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