हिरण्यधनु नामक निषाद का पुत्र एकलव्य भी धनुर्विद्या सीखने के उद्देश्य से द्रोणाचार्य के आश्रम में आया, किन्तु कर्ण के समान ही निम्न वर्ण का होने के कारण द्रोणाचार्य ने उसे अपना शिष्य बनाना स्वीकार नहीं किया। निराश होकर एकलव्य वन में चला गया। उसने द्रोणाचार्य को उनकी मूर्ति के समक्ष अपना गुरु मानकर उनके समक्ष धनुर्विद्या का ज्ञान करने लगा| इस पर द्रोणाचार्य ने एकलव्य से गुरुदक्षिणा के रूप में उसके दाहिने हाथ के अँगूठे की माँग की| आखिर द्रोणाचार्य जी ने गुरु दक्षिणा के रूप में एकलव्य से उसके हाथ का अंगूठा क्यों मांगा ? क्या हुआ उसके बाद एकलव्य के साथ और क्यों इतिहास में एकलव्य का नाम प्रसिद्ध है? इस पूरे प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानी में से एक कहानी एकलव्य की गुरुभक्ति, शिवानी आनंद की आवाज में…
पहली पुतली रत्नमंजरी राजा विक्रम के जन्म तथा इस सिंहासन प्राप्ति की कथा बताती है। वह जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी-पहली पुतली रत्नमंजरी
फणिभूषण और मणिमल्लिका के प्रेम, मिलन और विछोह की रहस्यमई कहानी।
कमजोर से कमजोर लोग भी यदि एकजुट होकर काम करें तो बड़ा से बड़ा कार्य संपन्न किया जा सकता है और बड़े से बड़े शत्रु को भी पराजित किया जा सकता है। हाथी के द्वारा गौरैया का घोंसला तोड़ने के बाद गौरैया किस प्रकार से हाथी से बदला लेती है ?इसे जानने के लिए सुनते हैं पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी गौरैया और हाथी ,शिवानी आनंद की आवाज में…
पांडु जेष्ठ पुत्र युधिष्ठिर ने अर्जुन को कर्ण का वध न कर पाने के कारण धिक्करा और यहां तक कह दिया कि अगर कर्ण का वध नहीं कर पाते हो तो ,अपना गांडीव धनुष किसी दूसरे योद्धा को दे दो |इस बात को लेकर अर्जुन बहुत क्रोधित हुए और और युधिष्ठिर को मारने के लिए तत्पर हो गए |ऐसी विषम परिस्थिति में किस प्रकार अर्जुन शांत इस हो पाए |महाभारत के रोचक प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी युधिष्ठिर का अपमान ,शिवानी आनंद की आवाज में
ये कहानी एक बकरी के बेचने और खरीदने के बहुत ही सरल माध्यम से हमे यह सिखाती है कि हमे यूं तो कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए लेकिन अगर कोई आपके साथ बुरा करे तो उसे सबक ज़रूर सिखाना चाहिए।
राजा कृष्णदेव राय के प्रिय सुनहरे पौधे को बकरी के खा जाने पर माली को दिए जाने वाले दंड को किस प्रकार तेनाली रामा राजा को अनुचित निर्णय लेने से रोकते हैं ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी सुनहरा पौधा शिवानी आनंद की आवाज में
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