तुम दिल पर क्यों लगाती हो। कहने दिया करो जो कहते हैं। हम तो अब तिड़के घड़े का पानी ठहरे। आज हैं, कल नहीं रहेगें। फेंकने दो कंकर-पत्थर। जो दिन कट जाएं, अच्छा है।”कहानी में वृद्ध और वृद्धा अपने बेटे -बहु के साथ रह रहे हैं |वृद्धावस्था में क्या है उनकी स्थिति ?जानने के लिए सुनते हंं सुभाष नीरव के द्वारा लिखी गई कहानी तिड़के घड़े , शिवानी आनंद के द्वारा
कहानी मकड़ी आपको एहसास दिलाएगी इंसान किस प्रकार बाह्यआडंबर जालके में फंसता चला जाता है| जिस से निकल पाना कितना कठिन होता है |जानने के लिए सुनते हैं सुभाष नीरव द्वारा लिखी गई कहानी मकड़ी ,शिवानी आनंद की आवाज में
सोनू एक बहुत छोटा बच्चा है| धीरे-धीरे सोनू गुमसुम रहने लगा |क्या कारण था सोनू के गुमसुम होने का जानने के लिए सुनते हैं सुभाष नीरव के द्वारा लिखी गई कहानी वाह मिट्टी, शिवानी आनंद के द्वारा
इंसान की उस फितरत को दर्शाती यह कहानी, जिसमें इंसान अपने फायदे के लिए अपना रंग बदलने से परहेज नहीं करता |ऐसा ही कुछ बेटे -बहू ने अपने वृद्ध पिता के साथ किया |क्या किया और कैसे? जानने के लिए सुनते हैं सुभाष नीरव के द्वारा लिखी गई कहानी कमरा ,शिवानी आनंद की आवाज में
मनोहर लाल जब मंत्री बने तो उन्होंने जनता के सामने जिन बातों का वादा किया |क्या वह खुद उन बातों पर अडिग रहे? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सुभाष नीरव के द्वारा लिखी गई कहानी रंग परिवर्तन ,शिवानी आनंद की आवाज में
रहमत मियां के बेटे सुक्खन जब गोश्त लेने बाजार गए तो उनकी लापरवाही से पूरे कस्बे में क्या कांड घटित हुआ ?जानने के लिए सुनते हैं सुभाष नीरव द्वारा लिखी गई कहानी एक और कस्बा, शिवानी आनंद की आवाज में
महाभारत के युद्ध में कर्ण के बाणों से युधिष्ठिर का शरीर आच्छादित हो चुका था और उनकी पराजय लगभग तय थी किंतु उसी क्षण ऐसा क्या हुआ युधिष्ठिर अपने प्राण कर्ण के बाणों से बचा पाए ,पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में महाभारत की कहानी में से एक कहानी युधिष्ठिर की पराजय
विवाह एक ऐसा बंधन है जिसमें बंधकर हर लड़की को अपने प्रियजनों से विदा लेनी पड़ती है। हेम भी इसी बंधन में बंध कर अपने पिता से दूर अपने ससुराल चली आई थी किंतु तब ये किसने जाना था कि यह विदा एक दिन अनंत कालीन विदा बन जाएगी।
चौथी पुतली कामकंदला की कथा से भी विक्रमादित्य की दानवीरता तथा त्याग की भावना का पता चलता है कैसे ?पूरी कहानी जानने के लिए के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानी सिंहासन बत्तीसी-चौथी पुतली कामकंदला शिवानी आनंद की आवाज में…
वास्तव में जिसका जैसा स्वाभाविक स्वभाव होता है ,वह हर परिस्थिति में वैसा ही रहता है |कहानी एक गीदड़ के बच्चे की है ,जिसे शेरनी के द्वारा पाला जाता है |विष्णु शर्मा द्वारा लिखी गई पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी गीदड़ -गीदड़ ही रहता है, सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में…
सकारात्मक सोच से जटिल से जटिल समस्याओं का निदान संभव है कुछ ऐसी ही विचारधारा को प्रेरित करती हुई पल्लवी के द्वारा लिखी एक कविता आशना
जब किसी औरत के सिर से उसके पति का साया उठ जाता है तो समाज, बिरादरी, रिश्तेदारी में उसकी कोई इज्जत नहीं रह जाती ।मान सम्मान नहीं रह जाता है । हर शख्स उसे बिना तनख्वाह का नौकर मान लेता है और ऐसे हालात के मारे बच्चे की परवरिश ऊपर वाले के हाथ होती है। कल्लू की जिंदगी में ऐसा मोड़ आया कि उसकी जिंदगी ही बदल गई।
जब मन से रिश्ता नहीं जुड़ता है| तब हम किसी भी रिश्ते से सामाजिक रुप से जुड़ भी जाए ,वह सिर्फ एक धोखा होता है |वह आपसे अलग भी हो जाए तो उसके प्रति कोई शोक नहीं होता इसी बात को बड़ी गंभीरता से अपनी कहानी नो सिंपैथी प्लीज मैं मालती जोशी ने प्रस्तुत किया है
हजूर नौकरी करता हूं, जान दे कर सरकार का नमक हलाल कर सकता हूँ पर ईमान नहीं बेच सकता,सरकार मालिक है। मैंने गद्दारी नहीं की, है………. नहीं की, लेकिन खुदा के रूबरू दरोगहलफी करके आकबत नहीं बिगाड़ सकता। यहाँ आप मालिक है, वहाँ वो मालिक है…। ऐसा कुछ कहानी का नायक उबेद कह रहा है | जो बचपन से बस यही सोचता था की मेहनत और सब्र का फल एक दिन मिलेगा ,खुदा सब कुछ देखता है किंतु क्या वाकई उसकी यह सोच सही साबित हुई? क्या वह अपने जीवन की कशमकश में कभी ऐसे मुकाम पर पहुंचा ,जहां उसे वाकई खुदा की मदद मिली हो| पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं यशपाल जी के द्वारा लिखी गई कहानी खुदा की मदद, नयनी दीक्षित की आवाज में…
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