राजा विक्रमादित्य ने एक बार अद्भुत- अलौकिक स्वप्न देखा| उस अद्भुत- अलौकिक सपने की उन्होंने ज्योतिषियों से अपने सपने की चर्चा की और उन्हें इसकी व्याख्या करने को कहा। सारे विद्वान और पण्डित इस नतीजे पर पहुँचे कि महाराजाधिराज ने सपने में स्वर्ग का दर्शन किया है तथा सपने का अलौकिक महल स्वर्ग के राजा इन्द्र का महल है। देवता शायद उन्हें वह महल दिखाकर उन्हें सशरीर स्वर्ग आने का निमन्त्रण दे चुके है। किंतु क्या वास्तव में सपने की सत्यता यही साबित हुई इसे जानने के सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी अट्ठाईसवीं पुतली वैदेही स्वर्ग की यात्रा, शिवानी आनंद की आवाज में…
राजा कृष्णदेव राय के प्रिय सुनहरे पौधे को बकरी के खा जाने पर माली को दिए जाने वाले दंड को किस प्रकार तेनाली रामा राजा को अनुचित निर्णय लेने से रोकते हैं ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी सुनहरा पौधा शिवानी आनंद की आवाज में
माया सुर के द्वारा युधिष्ठिर के लिए एक ऐसी सभागार का निर्माण हुआ जिसमें बहुत सी बातें भ्रम पैदा कर रही थी |इसी सभागार में दुर्योधन उपहास का पात्र बन गए| दुर्योधन ने उपहास का बदला लेने के प्रयोजन से दुर्योधन के मामा शकुनि के साथ मिलकर द्यूत-क्रीड़ा के लिए युधिष्ठिर को आमंत्रित किया | मामा शकुनि की धूर्तता के कारण इस द्यूत-क्रीड़ा का क्या परिणाम निकला और युधिष्ठिर के साथ क्या-क्या हार गए| इस पूरे प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी कौरवों का कपट ,शिवानी आनंद की आवाज में ..
राजा विक्रमादित्य अद्भुत कला-पारखी थे। एक आदमी ने अद्भुत कारीगरी का काठ का घोड़ा विक्रमादित्य को महंगे दाम में बेचा | आगे क्या हुआ पूरा जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में कहानी सिंहासन बत्तीसी-आठवीं पुतली पुष्पवती
राजा विक्रमादित्य जैसा न्यायप्रिय, दानी और त्यागी और कोई न था | राजा को एक बार दो व्यक्ति दिखाई दिए एक मानव मुण्डों की माला पहने बीभत्स दिखने वाला कापालिक है तथा दूसरा एक बेताल है |उन दोनों में किसके लिए द्वंद चल रहा है और राजा किस प्रकार निर्णय देते हैं इस रोचक कहानी को आवाज दी है शिवानी आनंद में..
एक बार पुरुषार्थ और भाग्य में इस बात पर ठन गई कि कौन बड़ा है। राजा विक्रमादित्य ने किस प्रकार झगड़े का अंत किया ? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सिंहासन बत्तीसी-तीसरी पुतली चन्द्रकला
राजा विक्रमादित्य वृद्ध हो गए थे तथा अपना योग बल से उन्होंने यह भी जान लिया था कि उनका अंतिम समय काफी निकट आ गया है विक्रमादित्य की मृत्यु के पश्चात उनका पुत्र सिंहासन पर नहीं बैठ पाया, अंत में उनके पुत्र ने राजा विक्रमादित्य के सिंहासन के लिए क्या और कैसे निर्णय लिया ? इस पूरी कहानी इकत्तीसवीं पुतली कौशल्या विक्रमादित्य की मृत्यु को जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में ..
नवीं पुतली- मधुमालती ने जो कथा सुनाई उससे विक्रमादित्य की प्रजा के हित में प्राणोत्सर्ग करने की भावना झलकती है। कैसे ?पूरी कहानी जानने के लिए के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सिंहासन बत्तीसी-नवीं पुतली – मधुमालती शिवानी आनंद की आवाज में…
Reviews for: Sinhasan Battisi – twentyeighth Putli Vaidahi (सिंहासन बत्तीसी -अट्ठाईसवीं पुतली- वैदेही )