यह मनी ऑर्डर तेरे दादा दादी के लिए संजीवनी है उनका मानसिक संबल है यह बात उन्हें एहसास लाती है कि उनका बड़ा बेटा उन्हें भूला नहीं और अपने कर्तव्य से विमुख नहीं हुआ | मात्र ₹1000 के मनीआर्डर आने पर जो कि उनके बड़े बेटे के द्वारा भेजा जाता है दादा दादी गदगद हो जाते हैं जबकि छोटा बेटा और परिवार अपने मां-बाप की सेवा पूरे दिल से करता है ऐसे में उनकी पोती के मन में कई प्रकार के संशय पैदा होते हैं | दिल को छू लेने वाली कहानी
पुनर्विवाह का दूसरा नाम है समझौता । हर परिस्थिति से , हर हालात से समझौता करना ही पुनर्विवाह है। हालात से तो समझौता किया जा सकता है लेकिन प्यार में समझौता ? कभी नहीं । फिर ऐसा समझौता क्यों करना पड़ा ? क्या मजबूरी थी ?
सफर छोटा हो या बड़ा , अगर हम सफर अच्छा हो, तो सफर अच्छा हो जाता है। वरना वास्तव में सफर करना पड़ता है। नई नवेली दुल्हन जब पहली बार पीहर जाती है तो कितने ही मीठे सपने लेकर जाती है लेकिन कई बार यह सपने चूर-चूर हो जाते हैं। तब सवाल उठता है पूरी जिंदगी काटने का।
अनकहा सच – Malti Joshi (मालती जोशी) – Arti Srivastava
अपना घर अपना ही होता है फिर चाहे उसमें कितनी कमियाँ क्यों ना हो । लेकिन घर बनता है परिवार से और परिवार की मुख्य स्तंभ होती है माँ । माँ जिसकी हर खुशी हम से जुड़ी होती है और जब हम माँ से दूर जाते हैं तो वह पल – पल हमारे लौट आने की राह देखती है। हमारे सुखी जीवन के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती है। लेकिन कभी-कभी हमें समझने में बहुत देर हो जाती है।
शादी एक जुआ है।सही दाव लग गया तो पौ बारह, लेकिन अगर दाव उल्टा पड़ गया तो जिंदगी जहन्नुम बन जाती है।इस फ़न में हर कोई माहिर नही होता।वो विरले ही होते है जो इस फ़न में माहिर होते हैं ।
जब मन से रिश्ता नहीं जुड़ता है| तब हम किसी भी रिश्ते से सामाजिक रुप से जुड़ भी जाए ,वह सिर्फ एक धोखा होता है |वह आपसे अलग भी हो जाए तो उसके प्रति कोई शोक नहीं होता इसी बात को बड़ी गंभीरता से अपनी कहानी नो सिंपैथी प्लीज मैं मालती जोशी ने प्रस्तुत किया है
भौतिकवादी युग में प्यार भी हिसाब किताब से नापतोल कर किया जाता है भावुकता और संवेदनशीलता जैसी चीजें आउटडेटेड होती जा रही है कहानी में पिंकी और उसका मित्र कार्तिक इसी भावना के साथ जीवन में किसी के साथ संबंध जोड़ना चाहते हैं| कहानी के अंत में कहा गया है टूटकर प्रेम करने वाले लोग अब कहां रहे वह पीढ़ी वक्त कब से इतिहास बन गई है सुनते हैं कहानी कैलकुलेशन
निशा निमंत्रण से लिया गया यह गीत जिसमें शाम होने पर किस प्रकार वातावरण बदल जाता है बड़ी ही खूबसूरती के साथ उल्लेख किया गया है
अगर मर्द बिना मूछों के रहे तो वह मर्द नहीं लगता |एक मूंछ ही तो मर्दाना चेहरे के लिए अनिवार्य होती है और मेरे पति ने एक नौकरानी की भूमिका निभाने के लिए अपनी मूंछे कटवा ली |अब तो शायद ने उन्हें प्यार भी ना कर सकूं| और मर्दों में मूछों के बिना कोई आकर्षण नहीं | मर्दों की मूछों को लेकर एक स्त्री अपनी दोस्त से यह सब बातें क्यों कह रही है ?इसके पीछे क्या वजह हो सकती है? इसे जानने के लिए सुनते हैं गाय दी मोपासां की कहानी मूंछ,नयनी दीक्षित की आवाज में …
कहानी के मुख्य पात्र निशिकांत के मन की उस दशा को चित्रित किया गया है जहां पर वह स्वयं शादीशुदा होकर भी किसी दूसरी स्त्री के रूप ,सौंदर्य की तरफ आकर्षित है किंतु जब वह अपनी पत्नी को इस रूप में सोचता है कि जैसे वह किसी पराई स्त्री के प्रति आकर्षित है वैसे कोई और भी उसकी पत्नी के प्रति भी आकर्षित हो सकता है |तो क्या वह इसे स्वीकार कर पाएगा| निशिकांत की इस बंद को मन के द्वंद को समझते हैं विष्णु प्रभाकर के द्वारा लिखी गई कहानी निशिकांत नयनी दिक्षित की आवाज में
हिंदुस्तान -पाकिस्तान में जब बंटवारा हुआ था तब कुछ ऐसे स्वार्थ परस्त लोग जो मजहब ,धर्म का नाम लेकर, उसकी आड़ लेकर सिर्फ -सिर्फ अपना फायदा करने में लगे हुए थे। उनके लिए किसी के भी जज्बात कोई मायने नहीं रखते थे। ऐसे ही एक शख्स की कहानी है।”मलबे का मालिक”
जीवन का रसायन कब और कैसे इतना कसैला हो गया जीवन के भौतिक शास्त्र में सारे द्रव्य एकत्र करते-करते शायद वह अपने अस्तित्व का द्रव्य ही गवां बैठी। धरा कैमेस्ट्री में एम.एससी. है | फिर भी घर में कितनी उपेक्षित है इसका धरा को एहसास हो रहा है | अब धरा अपने अस्तित्व के लिए क्या करती है जानते हैं ज्योत्सना सिंह के द्वारा लिखी गई कहानी रसायन में
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pragati sharma