सुधा अरोड़ा की कहानियां आम लोगों के जीवन से कहीं ना कहीं जुड़ी हुई होती है |कहानी सत्ता संवाद में स्पष्ट रूप से इस बात की झलक मिलती है |कहानी में घर की सत्ता घर की महिला के पास है कहानी में घर की मुख्य कर्ताधर्ता महिला किस प्रकार का व्यवहार करती है? ऐसे में वह किस प्रकार घर में सभी से संवाद करती है?इसे बेहद रोचक ढंग से कहानी में प्रस्तुत किया गया है|
राघव अपनी अमेरिकन बीवी स्टेला और दो बच्चों – पॉल और जिनि के साथ भारत अपने मां-बाप के यहां आया हुआ है | जिनि, जो बस चार महीने की है| अब कहानी में दो पीढ़ियों में बच्चों की परवरिश को लेकर एक अंतर स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है |कैसे? इसे जानने के लिए सुनते हैं सुधा अरोड़ा के द्वारा लिखी गई कहानी सुरक्षा का पाठ ,शिवानी आनंद की आवाज में..
सुधा अरोड़ाअरोड़ा की लिखी कहानी डेजर्ट फोबिया उर्फ समुद्र में रेगिस्तान ,जिसमें कहानी की नायिका उस पड़ाव में पहुंच चुकी है जब वह बिल्कुल अपने आप को एकाकी महसूस कर रही है | यह एकाकीपन उसके चित्रों में साफ झलक रहा है |आज उसके घर की खिड़की से दिखाई देने वाला गहरा नीला समंदर भी मटमैला होते-होते मानो एक हताश रेगिस्तान में तब्दील हो चुका है | नायिका क्यों ऐसा महसूस कर रही है ?क्यों है नायिका के जीवन में इतना एकाकीपन ?
सुधा अरोड़ा के द्वारा लिखी गई कहानी रहोगी तुम वही, में देखा जाए तो ऐसी वास्तविकता से परिचय कराया गया है जिसमें एक पति वास्तव में अपनी पत्नी से क्या चाहता है? एक पति अपनी पत्नी को किस रूप में देखना चाहता है? खुद पति को भी मालूम नहीं होता नहीं होता और और फिर भी वह अपनी और अपनी दुविधा का दोष भी वह सिर्फ पत्नी पर डालता है | जानते हैं कैसे ?इसी बात को बेहद रोचक ढंग से कहानी में प्रस्तुत किया गया है ,शिवानी आनंद की आवाज में..
बाँकुड़ा में रहने वाली एक लड़की अन्नपूर्णा शादी के बाद मुंबई जा बसी है |आज 1 साल के बाद हो अपने मां -बापू को खत लिख रही है| बचपन में बरसात के आने पोखर पर जाकर के केंचुओं को मार देती थी जो उसके लिए आनंद का कार्य था किंतु आज वही अन्नपूर्णा को बरसात अच्छी नहीं लगती और केंचुओं से उसे डर लगता है क्यों ? ऐसा क्या हो गया अन्नपूर्णा के साथ जो उसके लिए जो आनंद था आज मैं उसका भय का कारण हो गया? इसे जानने के लिए सुनते हैं सुधा अरोड़ा के द्वारा लिखी गई कहानी अन्नपूर्णा मंडल की आखिरी चिट्ठी, शिवानी आनंद की आवाज में…
सुधा अरोड़ा के द्वारा लिखी गई कहानी करवाचौथी औरत में व्यंग का अच्छा -खासा पुट शामिल किया गया है कहानी इस ओर संकेत कर रही है किस प्रकार एक पालतू कुत्तिया के नखरे घर वालों के लिए एक करवाचौथी औरत औरत की अपेक्षा ज्यादा अहमियत रखता है?
एक ऐसी मुसलमान राजकुमारी की कहानी जिसने अपनी सेना के हिंदु सेनापति के लिए अपना धर्म और राज्य सब छोड़ दिया लेकिन अपने प्रेम को ना प्राप्त कर सकी।
सामाजिक व्यवस्था के उस रूप को देखकर गरीब व्यक्ति की उस मनोदशा को दर्शाती यह कहानी जब वह श्रमजीवी लोगों को अपनी जैसी स्थिति में पाता है तो वह बिना श्रम के ही अपना जीवन व्यतीत करना चाहता है ऐसे में वह सारे मानवीय और आत्मीय रिश्तो को दफन कर देता है वो संवेदनाओ से विहीन होकर किसी अपने की मृत्यु का भी शौक नहीं करता अपितु उस बात का फायदा उठाकर अपनी जिंदगी का लुत्फ उठाना चाहता है । हृदयस्पर्शीऔर मार्मिक कहानी है मुंशी प्रेमचंद्र की कफन।
हिंदुस्तान -पाकिस्तान में जब बंटवारा हुआ था तब कुछ ऐसे स्वार्थ परस्त लोग जो मजहब ,धर्म का नाम लेकर, उसकी आड़ लेकर सिर्फ -सिर्फ अपना फायदा करने में लगे हुए थे। उनके लिए किसी के भी जज्बात कोई मायने नहीं रखते थे। ऐसे ही एक शख्स की कहानी है।”मलबे का मालिक”
शक्तिसत्य पर विजय पाती हैबात की सार्थकता समझने के लिए सुनते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी जी के द्वारा लिखी गई कहानी शिकार को निकला शेर,निधि मिश्रा की आवाज में
कहानी का नायक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर है |उसकी एक शिष्या शाश्वती उसी के मार्गदर्शन में हिंदी साहित्य में पी.एच.डी कर रही है| शाश्वती का अपने गुरु के प्रति एक अलग प्रकार का आत्मीय रिश्ता जुड़ जाता है जिसके कारण प्रोफेसर साहब की जिंदगी में उथल-पुथल हो जाती है | गुरु और शिष्या के संबंधों के बीच क्या होगा? जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ जी द्वारा लिखी गई कहानी शाश्वती ,पूजा श्रीवास्तव की आवाज..
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