भौतिकवादी युग में प्यार भी हिसाब किताब से नापतोल कर किया जाता है भावुकता और संवेदनशीलता जैसी चीजें आउटडेटेड होती जा रही है कहानी में पिंकी और उसका मित्र कार्तिक इसी भावना के साथ जीवन में किसी के साथ संबंध जोड़ना चाहते हैं| कहानी के अंत में कहा गया है टूटकर प्रेम करने वाले लोग अब कहां रहे वह पीढ़ी वक्त कब से इतिहास बन गई है सुनते हैं कहानी कैलकुलेशन
अनिकेत – Malti Joshi (मालती जोशी) – Arti Srivastava
माँ की मृत्यु के बाद वीरेश और विशाखा ने जिया में ही अपनी माँ को देखा । लेकिन नई बहू उसे सास के रूप में स्वीकार नहीं कर सकी । वह जिया को साथ रखना नहीं चाहती थी । पिता की मृत्यु के बाद वीरेश को जिया की चिंता सताने लगी क्योंकि वह सच्चाई से अनभिज्ञ नहीं था । ऐसी क्या सच्चाई थी जिसकी वजह से वीरेश को जिया की इतनी चिंता थी ? वह जिया के लिए इतना बेचैन क्यों था?
उत्तरा 50 साल की एक महिला है जिसका विवाह गिरीश से हुआ है |उसकी दो बेटियां हैं निशि और आशु |उत्तरा के जीवन में कहीं ना कहीं एक सन्नाटा पसरा हुआ है |उत्तरा को ऐसा क्यों महसूस हो रहा है| क्या वह अपने अंदर चल रहे इन बातों को को समाज को दिखा पाती है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं मालती जोशी की लिखी कहानी सन्नाटा, पूजा श्रीवास्तव की आवाज में…
भगवान कबीर दास जी ने एक जगह लिखा है जियत बाप को पानी न पूछे, मरे गंग नहलाये |जब तक मां बाप जीवित होते हैं तब उनकी कोई सेवा नहीं करना चाहता परंतु उनकी मृत्यु के बाद लोग दिखावे के लिए श्राद्ध का ऐसा विराट आयोजन होता है कि आश्चर्य होता है मालती जी की कथा बुंदेली पुट लिए हुए हैं भाग्यवान बुढ़िया
कहानी में विक्की के मां-बाप उसकी शादी अपनी मर्जी से कराना चाह रहे हैं विक्की के ना आने पर विक्की की मां विकी के पिताजी की बीमारी का झूठा बहाना बनाती है इधर विक्की भी किसी दूसरे धर्म की लड़की से प्रेम करता है यह बात वह सिर्फ अपनी बहन को बताता है क्या मां-बाप के दबाव में विक्की शादी करेगा बहन का इस संदर्भ में क्या सोचना है मालती जोशी की पारिवारिक पृष्ठभूमि पर लिखी हुई कहानी शर्मनाक जिसे आवाज दी है शिवानी खरे ने
मीरा ने आनंद का एक अलग ही पहलू देखा । जिसमें उसे दंभी ,तानाशाह, हिप्पोक्रेट व्यक्ति नजर आया । जिसने उसकी कला की प्रशंसा ना करके उसे उससे अलग होने का हुक्म दे डाला । क्या हमारे समाज में शादी के बाद सिर्फ लड़की को ही नए परिवेश में ढलना होता है ?होता होगा। पर अब नहीं। अब जमाना बदल चुका है । यह नए दौर का जमाना है , जिसमें लड़कियाँ लड़कों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। तो फिर मीरा कैसे चुप रह सकती है ?
हमारी भारतीय समाज में पति विहीन नारी की हमेशा उपेक्षा की जाती है |हमारी मानसिकता अभी भी नहीं बदली पति कैसा भी हो स्त्री का सुहाग होता है ,किंतु उसके बिना जैसे उस स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं रहता और उसका वजूद महा शून्य में तब्दील हो जाता है इसी संदर्भ में सुनते हैं इस मार्मिक कहानी को महा शून्य को मालती जोशी जी की आवाज में
चाय की प्याली तो एक माध्यम है उसके बहाने दो पीढ़ियों का अंतर स्पस्ट किया गया है, किसी पर आरोप नहीं लगाया , बस अपनी बात कही गयी है ।
किसी भी इंसान की वाह्य और आंतरिक रुप में बहुत अंतर होता है ऐसा ही कुछ निशिकांत के साथ है निशिकांत की का विवाह रजनी नाम की साधारण रंग रूप की युवती से हुआ है| यूं तो निशिकांत के सामने प्रेम पूर्वक व्यवहार करता है किंतु कहीं ना कहीं उसके मन में सुंदर युवती से विवाह करने की इच्छा रही है तो क्या ऐसे में वह रजनी के साथ सच्चा प्रेम कर पाएगा? क्या होता है आगे रजनी के साथ क्या होता है इसको जानने के लिए सुनते हैं विष्णु प्रभाकर के द्वारा लिखी गई कहानी छाती के भीतर नयनी दीक्षित की आवाज में
उसी रात माँ ने देर रात तक बात की जिसका सार था कि मेरे मरुस्थल से जीवन में वही एक हरा-भरा कोना है। और है ही क्या मेरे जीने की वजह तू या वह। मैं कुछ समझी, कुछ नहीं। प्रेम में शक्ति होती है जो किसी मरुस्थल को भी हरा भरा कर सकता है| इस बात का रहस्य एक लड़की को तब समझ में आता है जब मैं खुद उस दौर से गुजरती है |कहानी में एक लड़की अपनी मां को हमेशा बुझा -बुझा सा पाती है किंतु धीरे-धीरे किंतु उनके चेहरे की रौनक बढ़ने लगती है इसके साथ ही साथ लड़की के मन में कई प्रश्न जन्म लेते हैं पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ द्वारा लिखी गई कहानी प्रश्न का पेड़,पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
पति -पत्नी का रिश्ता जो एक दूसरे के साथ पूरा जीवन बिता देते हैं किंतु क्या यह सच्चाई नहीं कि वह एक दूसरे के मन की तालों को जीवन भर नहीं खोल पाते ।एक खूबसूरत विपिन जैन की कहानी अलमारी और कागज का टुकड़ा में इस अहसास को किस तरीके से रखा गया है जानिए विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में…
बिन्नी और टीनू की गर्मियों की छुट्टियां हो गई है और दोनों अपने दादा जी के यहां गए हुए हैं| अब दादा जी के यहां मस्ती भरे दिन बिताने के बाद क्या बिन्नी और टीनू को वापस लौटने का मन करेगा? पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं संजीव ठाकुर के द्वारा लिखी गई कहानी हमें नहीं जाना, निधि मिश्रा की आवाज में
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