भौतिकवादी युग में प्यार भी हिसाब किताब से नापतोल कर किया जाता है भावुकता और संवेदनशीलता जैसी चीजें आउटडेटेड होती जा रही है कहानी में पिंकी और उसका मित्र कार्तिक इसी भावना के साथ जीवन में किसी के साथ संबंध जोड़ना चाहते हैं| कहानी के अंत में कहा गया है टूटकर प्रेम करने वाले लोग अब कहां रहे वह पीढ़ी वक्त कब से इतिहास बन गई है सुनते हैं कहानी कैलकुलेशन
जेवर और पीहर बुढ़ापे तक इन दो चीजों का मुंह नहीं टूटता |पीहर के प्रति लगाव इतना जबरदस्त होता है कि उसे बरकरार रखने के लिए कई बार बेटियां अपना जायज हक तक छोड़ देती है| चंद्रहार कहानी में भावनाओं का ताना-बाना इसी बात को लेकर बुना गया है| कहानी ने मीनू 3 साल के बाद अपनी मां से मिलने भारत आती है | मां उसको उसकी पसंद का चंद्रहार देना चाहती है किंतु मीनू उसे लेने से इनकार कर देती है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं मालती जोशी जी की आवाज में कहानी चंद्रहार
ताहदे नज़र एक बयाबान सा क्यू हैं – Malti Joshi (मालती जोशी) – Arti Srivastava
एक औरत जीवन साथी से धोखा खाने के बाद अपनी औलाद से उम्मीदें रखती है । लेकिन वही औलाद जब मुँह मोड़ ले , तो उसके पास जीने के लिए क्या रह जाता है ? रेखा ने हिम्मत नहीं हारी है । उसे उम्मीद है कि शायद एक दिन उसका बेटा ,सक्षम उसके पास लौट आएगा ।
ताहदे नज़र एक बयाबान सा क्यू हैं – Malti Joshi (मालती जोशी) – Arti Srivastava
एक औरत जीवन साथी से धोखा खाने के बाद अपनी औलाद से उम्मीदें रखती है । लेकिन वही औलाद जब मुँह मोड़ ले , तो उसके पास जीने के लिए क्या रह जाता है ? रेखा ने हिम्मत नहीं हारी है । उसे उम्मीद है कि शायद एक दिन उसका बेटा ,सक्षम उसके पास लौट आएगा ।
मां बाप के लिए अपने बच्चे ना कोई बोझ होते हैं ना कोई अवसाद होते हैं वह अपने बच्चों को पूरे स्नेह के साथ उनका लालन-पालन करते हैं क्या कभी बच्चे भी अपने मां-बाप कीउसी प्रकार उनकी देखभाल कर पाते हैं इसी भावना से ओतप्रोत है मालती जोशी जी की लिखी कहानी वो तेरा घर यह मेरा घर ,सुनते हैं पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
कभी कभी जीवन में कुछ फैसले लेने में इतनी देर हो जाती है कि फिर सारा जीवन पछताना पड़ता है। वैसे तो माँ-बाप की जिम्मेदारी बेटों पर होती है लेकिन कभी-कभी यह जिम्मेदारी बेटियाँ भी उठाती है या यूँ कहें कि उन्हें उठानी पड़ती है। तब , जब बेटे माँ बाप से मुँह मोड़ लेते हैं। वीणा ने भी अपने माँ-बाप की जिम्मेदारी उठाई और अपने जीवन की सारी खुशियों को ताक पर रख दिया । लेकिन क्या वह वास्तव में जी रही थी ?
जब मन से रिश्ता नहीं जुड़ता है| तब हम किसी भी रिश्ते से सामाजिक रुप से जुड़ भी जाए ,वह सिर्फ एक धोखा होता है |वह आपसे अलग भी हो जाए तो उसके प्रति कोई शोक नहीं होता इसी बात को बड़ी गंभीरता से अपनी कहानी नो सिंपैथी प्लीज मैं मालती जोशी ने प्रस्तुत किया है
भगवान कबीर दास जी ने एक जगह लिखा है जियत बाप को पानी न पूछे, मरे गंग नहलाये |जब तक मां बाप जीवित होते हैं तब उनकी कोई सेवा नहीं करना चाहता परंतु उनकी मृत्यु के बाद लोग दिखावे के लिए श्राद्ध का ऐसा विराट आयोजन होता है कि आश्चर्य होता है मालती जी की कथा बुंदेली पुट लिए हुए हैं भाग्यवान बुढ़िया
पुरानी रईसी चली जाती है ,पर ठसक नहीं जाती । | इसी झूठी शान का खामियाजा भुगतना पड़ता है परिजनों को |अपनी ही संतान तब भार लगने लगती है ही इन सारी परिस्थितियों का गुबार सहना पड़ता है | करुणा की इस भूमि पर सभी दुखी होने के कारण सास और बहू में भी एक भावनात्मक रिश्ता हो जाता है इन्हीं भावनाओं को चित्रित किया गया है कहानी हम तो ठहरे परदेसी में
घर गृहस्थी की बातों को इतनी सहजता से कहने में पारंगत मालती जोशी की कहानियों में यह कहानी जिसमें गृहस्थी में संतुलन रखने के लिए छोटे-छोटे झूठ बोले जाते हैं जिससे गृहस्थी में शांति और संतुलन बना रहता है इसी बात को बेहद खूबसूरत ढंग के साथ प्रस्तुत किया है मालती जोशी ने अपनी कहानी खूबसूरत झूठ में
नेहा ओम बाबू और निरूपा की बेटी है ओम बाबू हद से ज्यादा अपनी बेटी नेहा से प्रेम करते हैं रघु नेहा को स्कूल के दिनों से प्रेम करता है नेहा की खातिर कुछ भी करने को हमेशा तैयार रहता है इधर नेहा की दोस्ती अर्जुन और फिर रघुवीर से हो जाती है परंतु अचानक से एक दिन कोई दोनों के सिर पर वार कर उन्हें घायल कर देता है नेहा को इस बात की शंका है कि यह काम रघु के द्वारा किया गया है क्या नेहा की शंका सत्य है या इसके पीछे कोई और कारण है प्रेम और सस्पेंस से भरी इस मनोरंज क जुनैद के द्वारा लिखी गई कहानी फितूर को सुनते हैं अमित तिवारी जी की आवाज म
एक रिश्ता किस तरीके से रंग बदलता है| अपर्णा एक मेधावी छात्रा है और बाद में उसी संस्थान में कार्य करने लग जाती है जहां उसके सर दिनेश जी है| दिनेश उसके सामने प्रेम का प्रस्ताव रखता है किंतु दिनेश किसी और से विवाह करता है |क्या हुआ था दिनेश और अपर्णा के बीच प्रेम संबंधों का |पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं विनीता शुक्ला की द्वारा लिखी गई कहानी बदलते रंग, पूजा श्रीवास्तव की आवाज में…
यह कहानी काबुलीवाला और 5 साल की छोटी बच्ची मिनी के बीच के अनोखे रिश्ते की कहानी है काबुलीवाला मिनी को प्रतिदिन बादाम और किशमिश दिया करता और ढेर सारी बातें करता किंतु एक प्रसंग के तहत काबुली वाले को जेल हो जाती है और जब वह वापस आता है तो उस समय मिनी बड़ी हो चुकी होती है क्या था उनके बीच का अनोखा रिश्ता जाने के लिए सुनते हैं रविंद्र नाथ टैगोर की लिखी कहानी काबुलीवाला अमित तिवारी जी की आवाज में
जीवनलाल मामूली ईंटों के भट्टे पर क्लर्क से आज खुद अपने भट्टे के मालिक के साथ-साथ बड़ी-बड़ी इमारतों के ठेकेदार भी है शंभू नाथ की बीवी जीवन लाल के चुंबकीय व्यक्तित्व से अपने को बचा नहीं पाई जीवन लाल की शादी लीला से हुई उस समय तक जीवन लाल स्त्रीे के चरित्र पर विश्वाीस ही न कर पाते और अपनी पत्नीस के सतीत्वा की परीक्षा लेने का स्वभाव बन गया है जिस कारण लीला उन से तंग आ चुकी है क्या उनका यह स्वभाव उनके वैवाहिक जीवन में मतभेद पैदा करेगा लीला किस प्रकार इस बात से जीवन लाल को सबक सिखाएगी
एक मासूम बच्ची…
जो माँ-बाप के बीच बढ़ती दूरियों को अपनी छोटी-सी दुनिया में समझने की कोशिश करती है।
रिश्तों की खामोशी, टूटते भरोसे और एक बच्चे के मन के दर्द को बेहद संवेदनशीलता से उकेरती ममता कालिया की मार्मिक कहानी — “आपकी छोटी लड़की” केवल Gaatha पर।
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pragati sharma