यूनुस खान एक क्रांतिकारी है जो लोग काफिर है उनके लिए उसके दिल में कोई हमदर्दी नहीं है लेकिन यूनुस खान को एक खून से लथपथ एक छोटी बच्ची जब दिखती है जो कि काफिर है उसका कठोर दिल भी पिघल जाता है और क्या रिश्ता है उस बच्ची और यूनुस खान के बीच में पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कृष्णा सोबती की लिखी कहानी मेरी मां कहां अमित तिवारी जी की आवाज
आजादी के पावन पर्व पर जब पूरी नगरी सज रही थी । तब कोठों पर भी रंग बिरंगी झालर सजाई जा रही थी। शम्मो जान का कोठा भी जगमगा रहा था ।मुन्नी बाई ने शम्मोजान से पूछा कि यह आजादी का जश्न आज क्यों हो रहा है? हम तो कब के आजाद हो चुके हैं! है ना ! तो क्या वास्तव में आजादी सभी को मिल सकी है ? क्या वास्तव में मुन्नी जान जैसी कितनी ही मुन्नीजान आजाद है ?
मेहराँ अपने हरे -भरे घर को देखती है और सुख में भीग जाती है। छह वर्ष की लंबी प्रतीक्षा के बाद उसकी गोद भरी थी। आज तीन बेटों और दो बेटियों की माँ है। मेहराँ की सास, दादी -अम्मा तो उठते -बैठते बोलती है, झगड़ ती है। झुकी कमर पर हाथ रख कर बाहर आती है, तो जो सामने हो ,उस पर बरसने लगती है। घर के पिछवाड़े जिसे दादी अम्मा अपनी चलती उम्र में कोठरी कहा करती थी। उसी में आज वह अपने पति के साथ रहती है। मेहराँ तो कुछ ना कुछ कह कर चोट करने से भी नहीं चूकती। लड़ने में तो दादी भी कम नहीं पर, दोपहर को जब नौकर अम्मा के यहाँ से अनछुई थाली उठा लाया तो मेहराँ का माथा ठनका। अम्मा के पास जाकर बोली खाने का मन ना हो तो अम्मा दूध ही पी लो। दादी अम्मा ने न हाँ, कहा न ना । मेहराँ सास के ठंडे हो रहे पैरों को छूकर याचना भरी दृष्टि से बिछुरती आँखों से बोली, अम्मा बहुओं को आशीष देती जाओ। मेहराँ के गीले कंठ में आग्रह था, विनय थी।
यूनुस खान एक क्रांतिकारी है जो लोग काफिर है उनके लिए उसके दिल में कोई हमदर्दी नहीं है लेकिन यूनुस खान को एक खून से लथपथ एक छोटी बच्ची जब दिखती है जो कि काफिर है उसका कठोर दिल भी पिघल जाता है और क्या रिश्ता है उस बच्ची और यूनुस खान के बीच में पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कृष्णा सोबती की लिखी कहानी मेरी मां कहां अमित तिवारी जी की आवाज
महात्मा गांधी को गोली मार दी गई”। इस खबर से सारा देश सन्न रह गया। अटकलें लगने लगी, कि गोली मारने वाला मुसलमान शरणार्थी था । लेकिन फिर सब दंग रह गए। बापू, महात्मा, जिनके लिए सरहद कोई मायने नहीं रखती थी। वह हम सबके थे।
शाहनी एक बड़ी उम्र की महिला है | शाह जी के ना रहने के बाद शाहनी उनकी ऊंची हवेली और जायदाद होने के बावजूद बिल्कुल अकेली है| शेरा शाहनी के पास ही पलकर बड़ा हुआ है| आज शाहनी ने जो शाह जी के मरने के बाद उनकी अमानत को संभाल के रखा था वह वह क्यों उनसे छीना जा रहा है? उसे कौन धोखा दे रहा है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कृष्णा सोबती के द्वारा लिखी गई कहानी सिक्का बदल गया ,अंजू जेटली की आवाज में…
धीरे-धीरे दोनों के बीच का फासला कम होता गया। जगदेई ने बेटी को किनारे कर लिया था। उसका हृदय तेजी से धड़क रहा था। दोनों व्यक्ति बराबर से निकले तो एक चुभती हुई दृष्टि उन्होंने सोनपती के गठे हुए सुडौल, मांसल शरीर पर डाली। सोनपती को शरीर में झुरझुरी-सी अनुभव होने लगी। हल्की-पीली चांदनी में उसके चेहरे का रंग तपे हुए तांबे के समान चमक उठा। बड़ा संभाल-संभालकर उसे कदम रखने पड़ रहे थे ताकि कड़े आपस में टकराने न पाएं। जगदेई और उसकी बेटी सोनपती एक रास्ते से गुजर रही है उसी रास्ते में दो अनजान व्यक्ति उन्हें अपना पीछा करते हुए लग रहे हैं| इससे दोनों भयभीत हो जाती हैं |बाद में क्या होता है पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं कहानी भय
राजभवन की अतिथिशाला में सजावट के लिए एक पुरातन दीपदान को सिगरेट दानी के रूप में सुशोभित किया जाता है |जबकि उस दीपदान में भगवान श्री गणेश की सुंदर मूर्ति भी स्थापित होती है| हमारी सरकार में सर्कुलर होना गर्व की बात मानी जाती है | इसी तर्ज पर भगवान का नाम लेना सर्कुलर होने पर बाधा होता है| बड़ी खूबसूरती के साथ इसी बात को रखते हुए कहानी राजभवन की सिगरेट दानी में व्यंग किया गया है|
बंशी रखकर साकी क्षणभर बेगम के पास आकर खडी हुई। उसका शरीर काँपा, ऑंखें जलने लगी, कंठ सूख गया। वह घुटने के बल बैठकर बहुत धीरे-धीरे अपने आंचल से बेगम के मुख का पसीना पोंछने लगी। इसके बाद उसने झुककर बेगम का मुँह चूम लिया। बादशाह जब शिकार से लौटते हैं ,तो अपनी बेगम को बेसुध देखकर बहुत क्रोधित होते हैं |बेगम सलीमा इस बात से अनभिज्ञ होती है ,उसके समीप रहने वाली साकी एक पुरुष है |बादशाह को जब यह ज्ञात होता है तो इसका जिम्मेदार बेगम सलीमा को समझते हैं | बेगम सलीमा बिना किसी खता होने पर भी अपने को इस बात का जिम्मेदार समझते हुए मृत्यु को अपना लेती है | क्या होता है? जब बादशाह को इस बात का पता चलता है कि इस पूरे प्रकरण में उनकी बेगम सलीमा का कोई दोष नहीं था | जानने के लिए सुनते हैं आचार्य चतुरसेन शास्त्री के द्वारा लिखी गई नामालूम सी एक खता ,अमित तिवारी जी की आवाज में…
“यह समाज है मेरी जान… वह समाज जिसके आगे राम विवश नजर आए … जिसने ईशा को सलीब दी… जिसने बुद्ध को विक्षिप्त होने का तमगा दिया …” समाज के इस रूप को जोड़ती कहानी जिसमें एक वृद्ध व्यक्ति और उसकी विधवा बहू के बीच के स्नेह संबंध को bhi समाज गलत नजरों से देखता है……
एक नवविवाहित जोड़ा पूरी रात एक दूसरे के अतीत को जाने के लिए बात करते हैं उनकी बातचीत का क्या आशय है जानने के लिए सुनते हैं कामतानाथ के द्वारा लिखी कहानी सारी रात अमित तिवारी जी की आवाज में
रिश्तो के रंग को बदरंग करने की मेरी सजा आज पूरी हुई” ईर्ष्या और द्वेष से” लिप्त यह दो बहनों की कहानी है| जो उनके जीवन को विष के समान कर देती है | आखिर इस भावना का जन्म क्यों होता है और किस हद तक इसका प्रभाव उन दोनों के जीवन पर पड़ता है? जानने के लिए सुनते हैं ज्योत्सना सिंह के द्वारा लिखी गई कहानी सन्यासिनी
आज राजी एक शादीशुदा महिला है पति और बच्चे सब है | किंतु आज राजी को अपने बचपन के दोस्त की याद बहुत आ रही है |बचपन के वह बिताए हुए दिन, किस्से –कहानियां, वह हंसी ,वह सब कुछ | राजी के बचपन में ऐसा क्या था और वह अपनी कौन सी बातों को स्मरण कर रही है ?जानने के लिए सुनते हैं सूर्यबाला के द्वारा लिखी गई कहानी कागज की नाव में चांदी के बाल ,निधि
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कहानी कुल्लू की खूबसूरत वादियों में घूमने आए एक पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर की है |वहां पर सेबों से लदे पेड़ों को देखकर उनका मन प्रफुल्लित हो उठता है और एक लड़के को इसलिए दंडित करते हैं क्योंकि उसने वहां से एक सेब को चुराया है वही प्रोफेसर साहब प्राचीन मंदिर से मूर्ति उठाकर अपने अपने साथ ले आते हैं तब उनके अंतर्मन से क्या अंतर्मन से क्या आवाज आती है? जानने के लिए सुनते हैं अज्ञेय के द्वारा लिखी गई कहानी सेब और देव
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कहानी में नायिका संजय से बहुत प्रेम करती है| नायिका को कोलकाता एक इंटरव्यू के सिलसिले में जाना है वहां उसका एक पुराना प्रेमी निशिथ रहता है|जिसे नायिका अब बहुत पीछे छोड़ चुकी है कोलकाता में नायिका की मुलाकात निशिथ से होती है निशिथ नायिका की हर तरीके से मदद करता है क्या वह निशिथ का प्रेम है या कुछ और? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं मन्नू भंडारी द्वारा लिखी गई कहानी यही सच है ,पूजा श्रीवास्तव की आवाज में आवाज में
उत्तरा 50 साल की एक महिला है जिसका विवाह गिरीश से हुआ है |उसकी दो बेटियां हैं निशि और आशु |उत्तरा के जीवन में कहीं ना कहीं एक सन्नाटा पसरा हुआ है |उत्तरा को ऐसा क्यों महसूस हो रहा है| क्या वह अपने अंदर चल रहे इन बातों को को समाज को दिखा पाती है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं मालती जोशी की लिखी कहानी सन्नाटा, पूजा श्रीवास्तव की आवाज में…
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