कहानी मज़हब, जात –पात, हिंदू -मुसलमान इन सब कट्टरपंथी सोच से अलग विचारधारा बनाने के लिए प्रेरित करती है |कहानी एक ऐसे हिंदू युवक की है, जो लाहौर में बी.ए की परीक्षा देने गया हुआ है| वहां पर युवक बुरी तरीके से बीमार हो जाता है| ऐसी विषम परिस्थितियों में उसे पानी की आवश्यकता है किंतु क्या वह अपनी उस मानसिकता से ऊपर उठकर मुसलमान युवक से पानी ले पाएगा? क्या होता है उसके साथ ?विष्णु प्रभाकर द्वारा लिखी गई कहानी पानी की जाति सुनते हैं, नयनी दीक्षित की आवाज में…
कहानी बेहद भावपूर्ण है एक लेखक निशिकांत अपने दोस्त रमेश के पास जाता है जो एक अनाथालय चला रहा है | बंगाल से आई एक प्यारी सी मासूम अनाथ लड़की मीनू से उसकी मुलाकात होती है |निशिकांत के जीवन में मीनू की क्या भूमिका रहती है और क्या है मीनू का अतीत? विष्णु प्रभाकर की कहानी मुक्ति में जानते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में…
निशिकांत ट्रेन से दिल्ली जा रहा है |कहीं ना कहीं उसका निजी अनुभव अहिंदू कौम के लिए कुछ खट्टास पैदा कर रहा है लेकिन ट्रेन में कुछ ऐसी घटना होती है जिससे निशिकांत की सोच में एक बहुत बड़ा परिवर्तन आता है|क्या है वह घटना ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं विष्णु प्रभाकर के द्वारा लिखी गई कहानी परिवर्तन नयनी दीक्षित की आवाज में
सहानुभूति और प्रेम के बिना दुनिया में कुछ भी नहीं |जब अपनापन किसी को वास्तव में मिलता है तो दुनिया की किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है |कहानी ने कुछ ऐसा ही है निशीकांत घर में अकेला है और ज्वर से पीड़ित है |कमला उसकी देखभाल हेतु आती है फिर क्या निशिकांत को काफी अच्छा लगता है| आखिर क्या है कमला का निशीकांत से क्या रिश्ता है इस रहस्य को समझने के लिए सुनते हैं विष्णु प्रभाकर की कहानी रहस्य नयनी दीक्षित की आवाज में…
निशिकांत लेखक बनना चाहता है हिंदी के प्रति उसका असीम प्रेम उसे यह करने की प्रेरणा दे रहा है किंतु निशिकांत द्वारा लिखी गई पहली कहानी अपने मित्र को दिखाता है तो मित्र उसकी कहानी को किसी बड़े लेखक की कहानी की नकल बताता है अब ऐसे में निशिकांत का क्या आत्मविश्वास डगमगा जाता है या फिर से कोशिश करता है विष्णु प्रभाकर के द्वारा लिखी गई कहानी जानते हैं
निशिकांत एक सरकारी दफ्तर में कार्यरत है |12 साल की नौकरी में बहुत खुश नहीं है| अपनी योग्यता के हिसाब से ही पद की इच्छा रखता है | वास्तव में उसकी इच्छा अपने देश की स्वतंत्रता में योगदान देने की है| ऐसे में आखिर उसके साथ क्या होता है ?क्या होता है आगे निशिकांत की जीवन में ?जानने के लिए सुनते हैं विष्णु प्रभाकर की द्वारा लिखी गई कहानी अरुणोदय, नयनी दीक्षित की आवाज में
नकली नाक – Ibnesafi ( इब्नेसफी) – Nayani Dixit
इब्ने सफ़ी अपने जानदार जासूसी उपन्यासों के लिए जाने जाते हैं । जिसमें बहुत सारी कल्पना और जानकारियाँ शामिल होती है। नकली नाक कहानी का मुख्य किरदार जैसे जाबिर एक चालबाज बूढ़ा है जाबिर बेहद पेचीदा श़ख्स है जिसे किसी भी किस्म का इंसानी ज़ज्बा छू भी नहीं पाता और वह आखिर में फ़रीदी जैसे होशियार डिटेक्टिव को भी चकमा देकर हर बार निकल जाता है ।क्या अंत में जाबिर पकड़ा जायेगा ?मगर कैसे? जासूसी कथा नकली नाक मेंजानिए नयनी दीक्षित की आवाज. में…
शारीरिक निर्बलता नेत्रहीन होना एक कृषक के बेटे नॉर के लिए जैसे अभिशाप बन गया हो |माता -पिता की मृत्यु के पश्चात उ उसे आसपास के लोगों की प्रताड़ना अलग-अलग रूप में सहनी पड़ी |किसी के लिए हंसी का पात्र होता ,यहां तक कि उसके अपने भी उसके साथ भिखारी जैसा व्यवहार करते | क्या नॉर अपनी शारीरिक निर्बलता को अपने ऊपर हावी होने देगा या या फिर डटकर मुकाबला करेगा कहानी में आगे क्या होगा उसके साथ इसे जानने के लिए गाय दी मोपासां की कहानी बेहद मार्मिक कहानी नेत्रहीन, सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में
खूनी खेल – महेश दुबे – नयनी दीक्षित
खेल खेलना तो सबको पसंद होता है बच्चों को, बड़ों को ,बूढ़ों को ,जवान को और फिर उस खेल को खेलने के लिए अगर 2500000 रुपए मिले तो क्या आप उसे खेल कहेंगे या कोई बिजनेस या फिर शौक? 2500000 का इनाम खुद को बचाने के लिए है या फिर दूसरे के मर्डर के लिए। ऐसे ही कुछ दिलचस्प कहानी है खूनी खेल, जिसमें खेल तो है 2500000रूपयों का इनाम भी है लेकिन यह खेल कोई ऐसा- वैसा खेल नहीं खूनी खेल है, जिसमें लोग को मजा़ भी ले रहे हैं और रकम भी दे रहे हैं लेकिन उस रकम का क्या मतलब , जिसका मतलब सिर्फ मौत है! कौन है वह छह खिलाड़ी ?क्या वह इस खेल में जीते? क्या शिकारी खुद शिकार हुआ? यह सारे रहस्य जानने के लिए सुनिए महेश दुबे के द्वारा लिखी गई कहानी खूनी खेल, नयनी दीक्षित की आवाज़ में…
क्या 2000 का फटा हुआ नोट किसी की किस्मत बदल सकता है ?अच्छी या बुरी ,असली सवाल तो यह है| महेश दुबे जी की बेहद दिलचस्प कहानी है 2000 का नोट , 2000 का फटा नोट अपने आस-पास के काफी़ लोगों की किस्मत बदल रहा है। लेकिन किस्मत किस तरह और किस पलड़े बैठी है ?वही इस कहानी का Main story line है नयनी दीक्षित की आवाज़ में इस बेहतरीन से लव स्टोरी का लुफ़्त उठाएं।
चट्टानो में आग – Ibnesafi ( इब्नेसफी) – Nayani Dixit
जासूसी कहानी चट्टानों में आग की पूरी कहानी एक मिलिट्री अफ़सर के इर्द-गिर्द घूमती है ।जो नशीली पदार्थों की तस्करी करने वाला गिरोह है। कर्नल ज़रग़ाम उस गिरोह में जब नहीं शामिल होना चाहता तो उसे धमकियाँ मिलनी शुरू हो जाती है ।ऐसे में परेशान ज़रग़ाम ,कैप्टन फ़ैयाज़ से मदद के लिए लिखता है और कैप्टन फ़ैयाज़ ,इमरान को उसकी मदद के लिए भेजता है क्या इमरान अपनी सूझबूझ से नकली दवाइयां बेचने वाले गिरोह को गिरोह का पर्दाफाश कर पाएगा पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं चट्टानों में आग, नयनी दीक्षित की आवाज में..
सत्य की खोज में इंसान हमेशा से रहा है और इसे खोजने के लिए कभी उसने धर्म को गहराई से समझने की कोशिश की है तो कभी सामज को और इन सबके अलावा जीवन आसान नहीं होता , मनुष्य को अत्याचार भी सहने पड़ते हैं कई बार ,,, आसान से शब्दों में कहा जाये तो सत्य , धर्म , राजनीति , सामाजिकता और अत्याचार इन सबसे घिरा इंसान सत्य की खोज कैसे करेगा और इन सब का उस पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
जब मन अपनी प्रेयसी के बिछड़ने पर शिथिल हो जाता है ,तो पुनः उसे ऊर्जावान बनाने के लिए उन साथ बिताए हुए पलों को याद कर लेना चाहिए | इसी तरह की भावना से ओतप्रोत है, कविता की यह पंक्तियां….
सत्य की जीत के इस प्रसंग में द्युत सभा में युधिष्ठिर जब द्रौपदी को भी हार जाते हैं तब दुशासन द्वारा द्रौपदी का द्युत सभा में चीरहरण करने के आगे बड़ने पर भी समस्त धर्माचार्य भीष्म पितामह ,द्रोणाचार्य ,विदुर सहित सभी इस दृश्य को देख मौन हैं ऐसे में सिर्फ कौरवों में विकर्ण पुरज़ोर विरोध करता है ऐसे में कर्ण क्या कहता है। द्वारिका प्रसाद महेश्वरी के द्वारा लिखी गई महाभारत में द्युत सभा का वर्णन नयनी दीक्षित की आवाज़ में
यतीन्द्रनाथ दास का जन्म 27 अक्टूबर 1904 को कोलकता में हुआ था। जब वे नौ वर्ष के थे तभी उनकी माँ का देहान्त हो गया था। उनके पिता ने उनका पालन पोषण किया। पढ़ाई के दौरान ही जब गांधी जी ने असहयोग आन्दोलन आरम्भ किया तो यतीन्द्र भी आन्दोलन में कूद पड़े थे।
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