6 अक्टूबर 1893 में बंगाल प्रेसीडेंसी में मेघनाथ साहा का जन्म हुआ ।साहा सुप्रसिद्ध खगोल वैज्ञानिक रहे। गणित और भौतिकी के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान रहे ।साहा इक्वेशन के लिए यह प्रसिद्ध हैं। जिसके जरिए तारों में भौतिक एवं रासायनिक स्थिति की व्याख्या की जा सकती है ।साहा नाभिकीय भौतिकी संस्थान में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
पिकासो ने 1907 से क्यूबिज़्म की शैली में काम किया। इस प्रवृत्ति को ज्यामितीय आकृतियों के उपयोग से अलग किया जाता है जो वास्तविक वस्तुओं को आदिम आकृतियों में तोड़ते हैं|मानव वेदना का जीवित दस्तावेज कहीं जाने वाली इन कलाकृतियों को बनाने के लिए पिकासो ने अपना सब कुछ कल को समर्पित कर दिया|
गोपबंधु दास का जन्म 9 अक्टूबर, 1877 को उड़ीसा के पुरी ज़िले में साक्षी गोपाल के निकट सुआंडो नामक गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम दैतारि दास तथा माता का नाम स्वर्णमायी देवी था। इनका सम्बन्ध एक ग़रीब ब्राह्मण परिवार से था। गोपबंधु दास ने पुरी, कटक तथा कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में शिक्षा ग्रहण की थी
होमी जहांगीर भाभा, भारतीय परमाणु वैज्ञानिक और एकीकृत परमाणु ऊर्जा विकास के प्रमुख आदिकारी, 30 अक्टूबर 1909 को मुंबई, भारत में जन्मे थे। उन्होंने अपने जीवन के दौरान भारतीय परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।होमी भाभा को भारत सरकार द्वारा भारतीय सिविल विभूषण और भारतीय रत्न से सम्मानित किया गया था। उनका योगदान भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण था और उन्होंने भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में स्वायत्तता प्राप्त करने में मदद की।
स्वेज नहर मिस्र में भूमध्य सागर पर बन्दरगाह सईद से दक्षिण की ओर स्वेज शहर (स्वेज की खाड़ी के उत्तरी किनारे पर स्थित) तक 120 मील तक फैली हुई है। नहर मिस्र के बड़े हिस्से को सिनाई प्रायद्वीप से अलग करती है। इसे बनने में 10 साल लगे और इसे आधिकारिक तौर पर 17 नवंबर, 1869 को खोला गया।
6 नवंबर 1913 को दमनकारी कानून के खिलाफ द ग्रेट मार्च निकाला। 2,000 से ज्यादा लोगों ने गांधीजी के नेतृत्व में नटाल तक मार्च किया। गांधीजी गिरफ्तार हुए। जमानत पर छूटे तो फिर मार्च में शामिल हो गए।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ मनाने का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है। पहली बार विश्व मानसिक स्वास्थ्य संघ ने इसके लिए पहल की ।150 से भी अधिक देश इसके सदस्य हैं। इस बार की थीम ‘राइट टू मेंटल हेल्थ’ यानी मानसिक स्वास्थ्य का अधिकार रक्खा गया है।
एक कामकाजी महिला के ऊपर समाज किस प्रकार शोषण करता है इसी बात दर्शाती है कहानी एक फलसफा जिन्दगी कहानी में सुभद्रा सुंदर सुशिक्षित लड़की है |जिसको कई बार नौकरी में शोषित किया जा रहा है| सुभद्रा कैसे इस बात से बाहर निकलती है जानने के लिए सुनते हैं स्वाति तिवारी की लिखी हुई कहानी एक फलसफा जिन्दगी ,अंजू जेटली की आवाज में
दुनिया की शहरी चुनौतियों पर जोर देने और नए शहरी एजेंडा की दिशा में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को शामिल करने के लिए 2014 में यूएन-हैबिटेट द्वारा अर्बन अक्टूबर की शुरुआत की गई थी।
आपको अपनी किस्मत खुद लिखनी होगी 🔥- Rise Above Hard Times – CA Poonam Pathak- Josh Talks Hindi
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