Credit: Josh Talk
किसी झूठ की बार- बार पुनरावृत्ति होने पर ,वह सच की भांति प्रतीत होने लगता है किंतु ऐसे समय अपनी बुद्धि का प्रयोग करना अति आवश्यक हो जाता है| ऐसा ही कुछ उस ब्राह्मण के साथ होता हैजब वह अपनी बुद्धि का प्रयोग और अपने पर विश्वास ना करके ठगों के द्वारा ठगा जाता है | किस प्रकार?इसे जानने के लिए सुनते हैं पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी बकरा और ब्राह्मण, शिवानी आनंद की आवाज में…
उस दिन मैं बिना कुछ सोचे हुए ही भाई निराला जी से पूछ बैठी थी,” आपके किसी ने राखी नहीं बांधी?” ” कौन बहन हम जैसे भुक्कड़ को भाई बनावेगी?” मे, उत्तर देने वाले के एकांकी जीवन की व्यथा थी, या चुनौती ? यह कहना कठिन है ।पर जान पड़ता है किसी अन्य चुनौती के आभास ने ही मुझे उस हाथ के अभिषेक की प्रेरणा दी। उनके अस्त-व्यस्त जीवन को व्यवस्थित करने के असफल प्रयास का स्मरण कर मुझे आज भी हंसी आ जाती है। संयोग से उन्हें कहीं से ₹300 मिले। उन्होंने मुझे अपने खर्च का बजट बनाने का आदेश दिया। अस्तु : नमक से लेकर नापित तक और चप्पल से लेकर मकान के किराए तक का अनुमान- पत्र मैंने बनाया। उन्हें पसंद आया ।पर दूसरे ही दिन वह सवेरे आ पहुँचे। ₹50 चाहिए किसी विद्यार्थी की परीक्षा शुल्क भरना है वरना—–
30 seconds of positive energy, positive poetry.
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