6 नवंबर 1913 को दमनकारी कानून के खिलाफ द ग्रेट मार्च निकाला। 2,000 से ज्यादा लोगों ने गांधीजी के नेतृत्व में नटाल तक मार्च किया। गांधीजी गिरफ्तार हुए। जमानत पर छूटे तो फिर मार्च में शामिल हो गए।
चंडिका दास अमृत राव देशमुख’ एक प्रसिद्ध समाजसेवी थे। लेकिन जन- समाज में वह ‘नानाजी देशमुख’ के नाम से काफ़ी लोकप्रिय रहे। 1999 में उनको ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया ।2019 में मरणोपरांत ‘भारत रत्न ‘से भी वह नवाज़ा गया।
10 नवंबर 1920 को महाराष्ट्र के वर्धा जिले के अरवी में जन्मे दत्तोपंत ठेंगड़ी ने श्रमिक आंदोलनों को एक नयी दृष्टि और चेतना दी। राष्ट्र के औद्योगीकरण के साथ श्रम के राष्ट्रीयकरण के पक्षधर दत्तोपंत ठेंगड़ी ने भारतीयता के दर्शन को अपने जीवन में उतार कर उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने वैश्वीकरण को आर्थिक पक्ष तक सीमित न रह कर मानवतावादी सोच का आह्वान किया
सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को गुजरात के नाडियाड में हुआ। पिता का नाम झावेर भाई और माता का नाम लाडबा पटेल था। माता-पिता की चौथी संतान वल्लभ भाई कुशाग्र बुद्धि के थे। उनकी रुचि भी पढ़ाई में ही ज्यादा रही।आज एकता के सूत्र में बंधे भारत के लिए देश सरदार पटेल का ही ऋणी है। कहा जाता है कि एक बार उनसे किसी अंग्रेज ने इस बारे में पूछा तो सरदार पटेल ने कहा- मेरा भारत बिखरने के लिए नहीं बना।सरदार पटेल’,’लोह पुरुष’ और ‘भारत का बिस्मार्क’ की उपाधियों से इन्हें सम्मानित किया गया 1991 में ‘भारत रत्न’ से भी इन्हें सम्मानित किया गया इनका जन्म दिवस ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है
ऑपरेशन पवन: श्रीलंका की धरती पर भारतीय सेना का खतरनाक मिशन|इस मिशन के बाद भारतीय सेना ने लिट्टे को काफी हद तक कमज़ोर कर दिया था. 1987 था जब भारतीय शांति सेना ने श्रीलंका में जाफना को लिट्टे के कब्जे से मुक्त कराने के लिए ऑपरेशन पवन शुरू किया था।
विट्ठल भाई पटेल भारत के प्रख्यात विधान वेत्ता होने के साथ ही साथ एक महान क्रांतिकारी भी रहे। यह सरदार वल्लभभाई पटेल के बड़े भाई थे। पूर्ण स्वराज पाने के लिए वह किसी भी तरह अंग्रेजों से कोई भी समझौता नहीं करना चाहते थे। इनका संपूर्ण जीवन सिर्फ़ और सिर्फ़ देश के लिए ही समर्पित रहा।
शांति घोष का जन्म 22 नवंबर, 1916 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था| उनके पिता का नाम देवेंद्र नाथ घोष था, जो प्रोफेसर और राष्ट्रवादी थे इसलिए शांति घोष पर बचपन से ही राष्ट्रभक्ति का प्रभाव था| वह बचपन से ही क्रांतिकारियों के बारे में पढ़ा करती थीं इसलिए उनका रुझान स्वतंत्रता आंदोलन की तरफ बढ़ने लगा|
9 नवंबर 1947 के दिन जूनागढ़ का भारत में विलय हो गया|बाद में एक जनमत भी कराया गया, जिसमें जूनागढ़ की जनता ने खुद फैसला किया था कि उन्हें भारत के साथ रहना है. 20 फरवरी 1948 को हुए इस जनमत में 190870 लोगों ने भारत को चुना था, जबकि पाकिस्तान के लिए सिर्फ 91 लोगों ने मतदान किया था |
आसिफ़ अहमद की फ़र्श से अर्श तक की कहानी, बचपन से आर्थिक तंगी से गुज़रने वाले आसिफ़ अहमद का बड़ा बनने का जुनून ,उनका आत्मविश्वास और अपने सपनों की डोर को हमेशा थामें रखने का हुनर उन्हें एक मामूली से बिरयानी का ठेला लगाने वाले शख़्स से आज 70 करोड़ टर्न ओवर के मालिक होने की पहचान दिला रहा है। यह सब कैसे हुआ? आसिफ़ अहमद की आम आदमी से ख़ास आदमी बनने की क्या रही कहानी ?इसे जानते हैं अमित तिवारी के द्वारा
This is a 5 minutes talk of Dr. Anil Rajvanshi broadcast by All India Radio via 62 channels all over India on 10th January 2019. Here Dr. Rajvanshi sheds light on Gandhi ji’s innovative streak. He was a tinkerer and engineer. He was not anti science
Reviews for: Gandhiji’s march – 6 Nov