मानवता- वरदान या अभिशाप ? |Hindi Kavita | हिंदी कविता | Motivational Poems by Anupam Dhyani
Maanavta- kho rahi hai!
SSR ki mrityu aur Bollywood ki underbelly – bhayaavah chehre- ko dekh kar aisa man hua ki kuch shabd likhun.– maanavta par- Humanity par. sawaal uthaun ki vilupt hoti maanavta kaise hame kha rahi hai!
Jai Hind!
Have you every wanted a vacation from being a Human. I have. कभी आपको मनुष्य बनने से छुट्टी की इच्छा हुई है मुझे हुई है !
यह कविता कोरे पन्ने पर लिखे शब्दों से इस दुनिया को आकार देते कवि और उसकी कल्पना का महत्व दर्शाती है
मैं अपना दिल किराये पे चढ़ाना चाहता हूँ ! यह कविता इस युग के प्रेमियों के लिए है !
संदेह | Doubt |Hindi Kavita |हिंदी कविता | Motivational Hindi Poems by Anupam Dhyani
Doubt Everything. A curious mind is doubtful. Not cynical. But doubtful till the true nature of the truth is perceived.
I hope in the current scenario in India Justice is meted out and the perpetrators are punished
JAI HIND!
मन और हृदय अलग-अलग संवेदना से क्यों गुजर रहे हैं? अगर मन स्थिर और शांत है फिर क्यों हृदय में संग्राम छिड़ा हुआ है ?बेहद खूबसूरत शब्दों से पिरोया है इस दुविधा को अनुपम ध्यानी जी ने अपनी कविता मन में कोहरा, कोहराम हृदय में अपनी स्वयं की आवाज से
30 seconds of positive energy, positive poetry.
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कई दिनों तक – Arvind saxena – Priya bhatia
एक ऐसा एहसास जब सारी बातें, सारे लोग ब़ेगाने से लगने लगे,जो कभी हमारी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा हुआ करते थे। ऐसा कब होता है ?और यह एहसास कब जन्म लेता है ?खूबसूरत शब्दों में पिरोया हुआ यह एहसास अरविंद सक्सेना की कविता कई दिनों से में सुनते हैं प्रिया की आवाज़ में..
30 seconds of positive energy, positive poetry.
सृष्टि संकल्प – भाग -3
Dr. Dharmveer भर्ती जी द्वारा रचित कृति कनुप्रिया का ये तृतीय खंड है
सृष्टि संकल्प में तीन कविताएँ हैं
कृष्ण जा चुके हैं
राधा विरह के दर्द से उद्वेलित है। वो नही समझ पा रही है कि अगर वो अपने कनु के मन में बसती है, और निखिल सृष्टि वो खुद है, यदि महासाग, हिमशिखर, मेघ घटाएं, सबमें वो ही व्याप्त है, तो फिर वो एकांत में भयभीत क्यों हो जाती है?
राधा विरह के क्षणों में वेदना से, आग्रह से, दर्द से अपने कनु को बार बार यही ज्ञात करने में प्रयत्नशील रहती है कि समस्त सृष्टि में बस राधा है और उसका कनु
राधा का मानसिक उद्वेलन व द्वंद अत्यंत खूबसूरती से इन तीनो कविताओं से व्यक्त होता है
एक तन्हा सा मै था – Arvind saxena – Priya bhatia
मैं हूँ, दिल है, तन्हाई है तुम भी होते अच्छा होता|
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