गोपालदास नीरज की कविता संग्रह फिर फिर दीप जलेगा से ली गयी कविता मिट्टी वाले में कवि ने उन सभी पर कटाक्ष किया है जो मिट्टी का मोल लगाते ह़ै कवि का मानना है कोई भी इसका मोल नहीं लगा सकता। क्या इस मिट्टी का इतिहास इतना सस्ता है कि कुछ मोल चुका कर इसे कोई भी खरीद सकता है ?आज इसी मिट्टी के लिए हम युद्ध की स्थिति तक पहुंच जाते हैं, तो क्या ऐसी मिट्टी का कोई मोल हो सकता है ,वह तो अमूल्य है | कवि अपने स्पष्ट शब्दों में समझाना चाह रहा है कि यह मिट्टी अपना मोल नहीं चाहती बल्कि सिर्फ मिट्टी अपनी कुर्बानी चाहती है| कविता के माध्यम से इसका पूर्ण भाव को समझते हैं, भावना तिवारी की आवाज में…
निशा निमंत्रण से लिया गया यह गीत जिसमें शाम होने पर किस प्रकार वातावरण बदल जाता है बड़ी ही खूबसूरती के साथ उल्लेख किया गया है
तूफान अपने साथ क्या मंजर लेकर आता है इन पंक्तियों में इसका उल्लेख किया गया है
अरुण वर्मा एक ईमानदार फॉरेस्ट ऑफिसर है |ईमानदारीसे किसी भी तरीके से समझौता न करने के कारण अरुण वर्मा का बार-बार तबादला करा दिया जाता है |इस बार तो अरुण वर्मा ने एमएलए के भतीजे का ट्रक पकड़ा है |इस बात का क्या प्रभाव पड़ेगा अरुण वर्मा की जिंदगी में ?क्या वह सच्चाई और ईमानदारी का रास्ता छोड़ देगा या फिर अपनी बात पर अडिग रहेगा| जानने के लिए सुनते हैं सूर्यबाला के द्वारा लिखी गई कहानी होगी जय, होगी जय… हे पुरुषोत्तम नवीन , निधि मिश्रा की आवाज में
कहानी का नायक ब्रजराज अपनी पत्नी इन्दो की बातों से विचलित रहता है | ब्रजराज के हृदय में एक अलग ही विरक्ति आ जाती है |और ब्रजराज घर छोड़ने का निश्चय कर लेता है |आगे क्या होता है ब्रजराज की जिंदगी में? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जयशंकर प्रसाद के द्वारा लिखी गई कहानी भीख ,शिवानी आनंद की आवाज में
अंतिम समय में विद्या के पिता ने श्याम बाबू को बुला कर विद्या की ज़िम्मेदारी उन्हें सौप दी। तब से लेकर आज तक श्याम बाबू ने विद्या को अपने बेटी से ज़्यादा प्यार दिया है। और विद्या ने भी श्याम बाबू को अपने पिता ज़्यादा समझा है। “कहाँ बाबू जी. जो आपने और माँ ने मेरे लिए किया है उसके आगे तो ये कुछ भी नहीं है। आप दोनों ने एक अनाथ लड़की को अपने बेटे जैसे प्यार दिया है। उसका एहसान तो मैं सारी ज़िंदगी नहीं चुका सकती”। विद्या श्याम बाबू जी की सगी बेटी ना होते हुए भी उनके ना रहने के बाद भी उनके परिवार को एक मां की तरह संभालती है कहानी नहीं पड़ता है इंसानियत के रिश्ते खून के रिश्तो से ज्यादा अपने हो जाते हैं
जीन बैप्टस सीमेन चार्डिन ने 200 से अधिक चित्रों की रचना की। इनका पसंदीदा विषय खेलने वाला बच्चा रहा। घरेलू अंदरूनी शैली के चित्रों का को इन्होंने बखूबी चित्रित किया। उनकी चित्रकारी में बच्चों और घरेलू गतिविधियों को बखूबी दर्शाया गया है
Reviews for: Mai Vidrohi Hoon (मैं विद्रोही हूँ)
Average Rating
project@project
Pragati Sharma