मोहाना रियासत के महाराज की बीमारी भी उनकी प्रतिष्ठा के अनुरूप प्रसिद्ध हो गई थी | देश -विदेश के ना जाने कितने प्रतिष्ठित डॉक्टरों ने महाराज के इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन बीमारी ऐसी, जिसका उपचार करने में सभी असफल हुए | अब ऐसे में मुंबई मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर संघटिया ने ऐसा क्या कर दिया कि महाराज स्वस्थ हो गए ?व्यंग से भरपूर रोचक यशपाल के द्वारा लिखी गई रोचक कहानी महाराजा का बीमारी, सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में….
कहानी में मालकिन के हाथ में सोने का कड़ा ना देखकर, उसकी 17 वर्षीय बेटी मंटू ने कड़े के संदर्भ में अपनी मां से पूछा तो पूरे घर में सोने के कड़े की खोज चालू हो गई| होली के माहौल है ,घर में बहुत से मेहमान भी है ,नौकरानी किलसिया भी है |आखिर कड़ा कहां गया ? किसने लिया वह कड़ा और क्या हुआ? इस मजेदार हास्य- व्यंग से भरपूर यशपाल द्वारा लिखी गई कहानी होली का मज़ाक सुनते हैं ,नयनी दीक्षित की आवाज में …
जयराज एक चित्रकार है और रानीखेत की सुंदर वादियों में प्रकृति के सुंदर चित्र बनाता है किंतु इन चित्रों में मनुष्य की अनुपस्थिति उसे अपने चित्र में अधूरे पन का एहसास दिलाती है इसी बीच उसके एक मित्र का पत्र आता है कि वह अपने पत्नी के अच्छे स्वास्थ्य के लिए उसे रानीखेत भेज रहा है जयराज का चित्रकार मन नारी के सौंदर्य को चित्रित करने की कल्पना की उड़ान लेने लगता है क्या होता है जब उसकी मुलाकात नीता से होती है क्या वास्तव में उसकी कल्पना यथार्थ हो पाती है पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं यशपाल जी के द्वारा लिखी गई कहानी चित्र का शीर्षक सुमन वैद्य जी की आवाज में
मक्रील का दृश्य बेहद सुहावना है वहां एक वृद्ध कवि अपने स्वास्थ्य सुधार के लिए आता है | मक्रील में कवि का भव्य स्वागत होता है| वृद्ध कवि मक्रील की नदी देखना चाहता है |तभी उसकी मुलाकात उसी होटल में खूबसूरत युवती से होती है| इसके बाद कहानी में एक बहुत बड़ा बदलाव आता है| वृद्ध कवि और उस खूबसूरत युवती के बीच क्या हुआ ?यशपाल जी के द्वारा लिखी गई कहानी मक्रील में जानते हैं, सुमन वैद्य जी की आवाज में
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कहानी उस ओर संकेत करती है कि समाज में पुरुष सिर्फ अपने पुरुषत्व को दिखाने की चाहत में स्त्रियों पर अत्याचार करने में अपना गौरव महसूस करते हैं |कहानी का मुख्य पात्र कन्हैयालाल की जब नई-नई शादी होती है तो आपके दोस्तों के समझाने पर अपनी नई नवेली दुल्हन लाजो पर अत्याचार शुरू कर देता है |करवा चौथ वाले दिन भी लाजो के प्रति रूखे व्यवहार से लाजो खिन्न हो जाती हो जाती है |कहानी में आगे क्या होता है? क्या लाजो कन्हैयालाल को छोड़ देती है? कन्हैयालाल को अपनी भूल का अहसास होता है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं यशपाल के द्वारा लिखी गई कहानी करवा का व्रत, नयनी दीक्षित की आवाज में…
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हजूर नौकरी करता हूं, जान दे कर सरकार का नमक हलाल कर सकता हूँ पर ईमान नहीं बेच सकता,सरकार मालिक है। मैंने गद्दारी नहीं की, है………. नहीं की, लेकिन खुदा के रूबरू दरोगहलफी करके आकबत नहीं बिगाड़ सकता। यहाँ आप मालिक है, वहाँ वो मालिक है…। ऐसा कुछ कहानी का नायक उबेद कह रहा है | जो बचपन से बस यही सोचता था की मेहनत और सब्र का फल एक दिन मिलेगा ,खुदा सब कुछ देखता है किंतु क्या वाकई उसकी यह सोच सही साबित हुई? क्या वह अपने जीवन की कशमकश में कभी ऐसे मुकाम पर पहुंचा ,जहां उसे वाकई खुदा की मदद मिली हो| पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं यशपाल जी के द्वारा लिखी गई कहानी खुदा की मदद, नयनी दीक्षित की आवाज में…
तिलिस्मी दुनिया जहां बड़े लोग, बड़े व्यापार, बड़ी पार्टियां, बड़ी सुंदरता ,बड़ी मारकाट ,बड़ी सफलता और चकाचौंध कर देने वाली जिंदगी को पाने के लिए इंसान ऐसी नींद के आगोश में चला जाता है कि उसके कारण वह अपने सच्चे रिश्ते, सच्चा प्यार और यहां तक की अपने से भी प्यार करना भूल जाता है |वह समझ नहीं पाता है कि उस नींद के बाहर की दुनिया अब उसके लिए कितनी अजनबी हो चुकी है ?एक आम -इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी में आए हुए कई बदलावों को चित्रित करती हुई धीरेंद्र अस्थाना की कहानी नींद के बाहर ,सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में
जब पंडित गोपाल शंकर को रक्त मंडल गिरोह से चिट्ठी मिली जो उससे पहले कई धनी लोगों को मिल चुकी थी तो उन्होंने मिस्टर केमिन की मदद लेनी चाहिए गोपाल शंकर का नेपाल जाना रक्त मंडल के गिरोह को पता चल गया अब पंडित गोपाल शंकर नेपाल जाकर कौन सा काम करते थे जिसका राज मिस्टर केम इन के अलावा किसी और को नहीं पता क्या वह कोई अनैतिक या गैर कानूनी काम करते थे और भक्त मंडल के गिरोह को इसके बारे में पता चल गया था इसके आगे के किस्से को जानने के लिए सुनते हैं कहानी रक्त मंडल का भाग 4 नयनी दीक्षित की आवाज में
शोलागढ़@34km – Kumar Rehman (कुमार रहमान) – Nayani Dixit
श्रेया को अगवा करने वाले लोगों से बचाकर सोहराब ,सलीम और श्रेया कोठी की तरफ चले जाते हैं। मालगाड़ी से सोहराब ,सलीम और श्रेया कहां रवाना हुये ? क्या वज़ह है कि वे टैक्सी से ना जाकर मालगाड़ी से रवाना हुए ?कौन है वह चार लोग जिन्होंने श्रेया को अगवा किया था ?हाशना को किस चीज की तलाश है? श्रेया का पूरे मामले में क्या रोल है ? क्या शेयाली को जंगलियों से आज़ाद कराया जा सका ?ऐसे बहुत से प्रश्नों के राज़ खोलने के लिए सुनते हैं शोलागढ़@34 का यह भाग
रक्त मंडल के भाग 8 में सुना कि पंडित गोपाल शंकर बूढ़े का भेष बनाकर किले के अंदर से जरूरी सामान जैसे ज़हाज ,बेतार के तार के यंत्र सब कुछ जरूरी सामान लेकर चकमा हो जाता है ।इधर नगेंद्र रक्त मंडल गिरोह के सेनापति के रूप में नियुक्त किया जाता है। और वह युद्ध की तैयारियों में लग जाता है। वापस आने के बाद गोपाल शंकर जी की मुलाकात वाहिद अली खान और मैकडॉनल्स सलाइस् से हुई जो उस प्रांत के लाड साहब है। मृत्यु किरण देखने और जानने के बाद गोपाल शंकर और मैकडॉनल्ड में क्या बातचीत हुई इसे पूरा जानने के लिए सुनते हैं रक्त मंडल भाग 9 नयनी दीक्षित की आवाज़ में..
कहानी एक 86 साल के एक बूढ़े आदमी की है जो अपनी सेहत को लेकर बड़ा सजग है और बेहद चुस्त -दुरुस्त ,तंदुरुस्त और चंचल ,कर्मठ भी है किंतु अपनी वास्तविक उम्र किसी को नहीं बताता| इस उम्र में होने के बावजूद अपने को वृद्ध नहीं समझता इसके पीछे क्या कारण है ? कहानी को जानने के लिए सुनते हैं गाय दी मोपासां की कहानी एक बूढा व्यक्ति,नयनी दीक्षित की आवाज में
सयानी बुआ का नाम वास्तव में ही सयानी था या उनके सयानेपन को देखकर लोग उन्हें सयानी कहने लगे थे, । बचपन में ही वे समय की जितनी पाबंद थीं, अपना सामान संभालकर रखने में जितनी पटु थीं, और व्यवस्था की जितना कायल थीं, उसे देखकर चकित हो जाना पडता था| कहानी में सयानी बुआ के चरित्र को और अच्छे से समझने के लिए मनु भंडारी जी के द्वारा लिखी गई कहानी सयानी बुआ सुनते हैं माधवी शंकर जी की आवाज में
कहानी प्रारंभ से ही उन संकीर्ण मानसिकता वाले पुरुषों और स्त्रियों की मनोदशा से परिचित कराते हुए आगे बढ़ती है कि किस प्रकार एक अकेली युवती को देखकर बिना यथार्थ जाने लोग उसके चरित्र का विश्लेषण करने लग जाते हैं प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानी मनोवृति मनोवृति सुनते हैं भूपेश पांडे जी की आवाज में
पाषाणी मृगमयी नाम की एक लड़की की कहानी है, जिससे अपूर्व नाम के लड़के को प्रेम होता है तथा वह उससे विवाह भी करता है। किंतु मृगमयी की प्रकृति से बचपना है की जाने का नाम नहीं लेता। परिस्थितियां विपरीत तब होती हैं जब अपूर्व कई वर्षो के लिए कलकत्ता चला जाता है और लौट कर नहीं आता…
कहानी एक 86 साल के एक बूढ़े आदमी की है जो अपनी सेहत को लेकर बड़ा सजग है और बेहद चुस्त -दुरुस्त ,तंदुरुस्त और चंचल ,कर्मठ भी है किंतु अपनी वास्तविक उम्र किसी को नहीं बताता| इस उम्र में होने के बावजूद अपने को वृद्ध नहीं समझता इसके पीछे क्या कारण है ? कहानी को जानने के लिए सुनते हैं गाय दी मोपासां की कहानी एक बूढा व्यक्ति,नयनी दीक्षित की आवाज में
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