कहानी के नायक ने बचपन से गरीबी देखी है उसने अपनी मां को दूसरे घरों में काम औरगरीबी से संघर्ष करते हुए देखा है जवान होते -होते अमीर बनने की चाहत में वह गलत कार्य करने लगता है जब मां को इस बात का पता लगता है तो वे उसका त्याग कर देती है किंतु कहानी के अंत में नायक को इस बात का एहसास होता है कि उसकी मां उसके लिए क्या है जुनैद की लिखी कहानी मां भारती मां के प्यार और त्याग की कहानी है ,अमित तिवारी जी की आवाज
ये केस सिर्फ जीत -हार का नही बल्कि उस सिस्टम को संतुलित और पवित्र करने का एक माध्यम एक आधार बनेगा जो बिक ही नही गया बल्कि सत्ता और पावर की दलाली का मुख्य केंद्र मुख्य शक्ति बन गया है” … कहानी में एक 30 साल की युवती शादीशुदा गरीब युवती सायरा बी जिसके साथ कुछ दरिंदों ने बलात्कार किया है | पैसे के अभाव के कारण कोई भी वकील उसका साथ नहीं दे रहा था | ऐसे में एक व्यक्ति न्याय दिलाने के लिए सामने आता है |कौन है वह व्यक्ति?? और क्या कारण था उसके पीछे?? और वह क्या न्याय दिला पाएगा?? जाने के लिए सुनते हैं कहानी ONE MEN JUSTICE
“प्रेम सिर्फ प्रेम होता है, ना यह गांव देखता है… ना शहर ..और ना सरहदें ….”” एक ऐसी प्रेम कहानी जिसमें एक ग्रामीण युवक कार्तिक , एक युवती अवनी अवनी से बाल्यकाल से बेतहाशा प्रेम करता है किंतु अवनी उसका उपहास करती है | क्या होता है उस उपहास के कारण युवक कार्तिक के साथ ?? जानते हैं कहानी आई हेट यू में…..
अमेरिका में रह रहा आशु आज अंग्रेजी संस्कार से लिप्त अपनी बेटी का विचलित कर देने वाला व्यवहार देखता है उसे भी अपने बीते दिनों की याद आ जाती है आज आशु इतना विचलित क्यों है उसका बीता हुआ पल उसे याद क्यों आ रहा है क्या है आशु की मनोस्थिति पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं जुनैद की भावपूर्ण कहानी कम बैक अमित तिवारी जी की आवाज में
सुमित एक सीधा साधा मेधावी छात्र है जो दिव्या से प्यार करता है| किंतु दिव्या उसके प्यार को अस्वीकार कर देती है| इस बात से सुमित काफी हताश हो जाता है |अमजद, सुमित का दोस्त है जो उसे इस मुश्किल से निकालने में मदद करता है |आज सुमित एक रानीपुर का एस.पी है और दिव्या उसके पास पुनः लौटना चाहती है किंतु दोस्ती और प्यार में सुमित किसको चुनता है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जुनैद की लिखी कहानी दोस्ती, अमित तिवारी की आवाज में
“यह समाज है मेरी जान… वह समाज जिसके आगे राम विवश नजर आए … जिसने ईशा को सलीब दी… जिसने बुद्ध को विक्षिप्त होने का तमगा दिया …” समाज के इस रूप को जोड़ती कहानी जिसमें एक वृद्ध व्यक्ति और उसकी विधवा बहू के बीच के स्नेह संबंध को bhi समाज गलत नजरों से देखता है……
छोटन की आत्मा एकदम चीत्कार उठी थी कि बेंगा को न कैंसर था, न एड्स, न टी बी – महज दस्त और बुखार से पीडित था, फिर भी दो दो अस्पताल से गुजर कर भी वह इलाज नहीं पा सका। वह सिहर उठा था कि आज गरीबों के लिये इलाज किस कदर हास्यास्पद और मुश्किल हो गया है। कल इन्हें फोडे फ़ुन्सी, सर्दी खांसी और सरदर्द से भी मरना पड सकता है। मानो इनके लिये हर रोग ही कैंसर और एड्स बनने जा रहा है। इलाके का इकलौता अस्पताल है जहां का डॉक्टर कौतुक गरीब लोगों के इलाज करने से बेपरवाह अपने यार दोस्तों में ही व्यस्त रहता है उसी अस्पताल में छोटन नाम का एक डोम होता है जिससे यह सब देखा नहीं जाता कहानी में जानते हैं किस प्रकार गरीबों की जान के साथ खिलवाड़ होता है |बेहद मार्मिक कहानी है कीड़े पतंगे
कहानी में 60 साल के एक हीरे के व्यापारी धनपाल जी का उन्हीं की हवेली में हत्या हो जाती है |परिवार में उनकी पहली पत्नी की बेटी नमिता,उनके भाई का बेटा घनश्याम और उनकी दूसरी पत्नी सोनिया रहते हैं | हत्या के रहस्य से उलझा यह केस प्राइवेट डिटेक्टिव अविनाश के पास आता है |किस प्रकार अविनाश इस हत्या के इस रहस्य को सुलझा पाता है? कौन है धनपाल जी का हत्यारा? अमित कुमार पांडे द्वारा लिखी सस्पेंस से भरी कहानी हत्या हवेली, में जानते हैं अमित तिवारी की आवाज में
‘अंबर’ नाम का एक हष्ट पुष्ट युवक एक तैराक है |बचपन में उसके पिता मछली पकड़ने जाते हैं ,और वापस नहीं लौटते | तब से प्रतिदिन वह अपने पिता को ढूंढने समुद्र में जाता है, इसी क्रम में वे एक अच्छा तैराक बन जाता है |एक दिन उससे एक मत्स्यकन्या से मुलाकात हो जाती है |फिर क्या होता है उसके साथ ??? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कहानी ‘मनुष्य और मत्स्यकन्या कन्या ‘……..
मुझे पता नहीं कि भूमध्य रेखा से वह जगह कितनी दूर थी कि जहाँ हमारा सरकारी मिडिल स्कूल स्थित था और मुझे यह नहीं पता था कि हम अपने हेडमास्टर साहब के हाथों पृथ्वी के गोलार्ध में पिट रहे थे अथवा दक्षिणी गोलार्द्ध में-परन्तु यह बात स्पष्ट है कि जब मुझे भूगोल पढ़ना तथा समझना चाहिए था, तब मैं नितान्त अभौगोलिक किस्म की हरकतों में मुब्तिला था।भूगोल विषय को समझना इतना दुष्कर क्यों होता है और उसको समझना जरूरी क्यों होता है इसी बात पर व्यंग करते हुए ज्ञान चतुर्वेदी जी द्वारा लिखा गया भूगोल समझना सुनते हैं अमित तिवारी जी की आवाज
बड़े-बूढ़े कुछ झूठ नहीं कह गए हैं कि परदेश जाए तो ऐसे चौकन्ने रहें, जैसे बुढ़ापें में ब्याह करने वाला अपनी जवान जोरू से रहता है। हम चौकन्नेपन क्या, दसकन्नेपन की सिफारिश करते हैं, वरना ईश्वर न करे किसी पर ऐसे बीते, जैसी परदेश में हम पर बीती, यानी हम साढ़े पांच हाथ के जीते-जागते मौजूद रहे और परदेश ने हमारे मुंह पर कानूनी तमाचा मारकर कुछ देर के लिए यह साबित कर दिया कि हम फौत शुद यानी मर गए।कहानी का पात्र जो परदेश में है वहां उसके साथ क्या घटना घटती है पूरा वृतांत जानने के लिए सुनते हैं अमृतलाल नागर जी के द्वारा लिखी गई कहानी जब बात बनाए ना बनी,अमित तिवारी जी की आवाज में
चाय की प्याली तो एक माध्यम है उसके बहाने दो पीढ़ियों का अंतर स्पस्ट किया गया है, किसी पर आरोप नहीं लगाया , बस अपनी बात कही गयी है ।
जो झूठ बोलने का आदी है, उसके सच बालने पर भी लोग कभी विश्वास नहीं करते।पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी जी के द्वारा लिखी गई कहानी भेड़िया, भेड़िया’ , निधि मिश्रा की आवाज में
एक मकान मालिक की व्यथा अपना सारा खर्चा और अपने सारे शौक अपने पेइंग-गेस्ट के जरिए पूरा कर लेता है वह पेइंग-गेस्ट उनके यहां से चला जाता है अब उनके घर का सारा खर्चा और उनके शौक कौन पूरा करें इसी बात को बड़े व्यंग्यात्मक शैली में कमलेश पांडे जी द्वारा लिखी गई कहानी तुम कब आओगे अतिथि सुनते हैं अमित तिवारी जी की आवाज में
रामअवतार लाम पर से वापस आ रहा था। बूढ़ी मेहतरानी अब्बा मियां से चिट्ठी पढ़वाने आई थी। अभी उसकी शादी को रचाए साल भर भी न बीता था कि राम अवतार की पुकार आ गई। ब्याह कर आई तो क्या मसमसी थी गौरी नाम की गौरी थी पर कमबख्त स्याह बहुत थी। हाँ आवाज में बला की कूक थी। गौरी क्या थी, बस एक मरखना लंबे सींग वाला बजार था, कि छुटा फिरता था । रत्तीराम के आने के बाद वह बिल्कुल बदल गई ।लेकिन गाँव वालों को दाल में कुछ काला नजर आ रहा था। सब राम अवतार के लौटने का इंतजार कर रहे थे।
हीराबाई को नवाब साहब से बेगम के कनफूल नही चाहिए थे नज़राने के तौर पे। उसने एक छोटा सा नज़राना माँगा… नवाब साहब खुशी खुशी तैयार भी हो गए वो नज़राना देने को….. ….पर हीराबाई ने ऐसा क्या माँग लिया, जिस फ़रमाइश को सुनकर नवाब साहब के पैरों तलें ज़मीन खिस
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