यतीन्द्रनाथ दास का जन्म 27 अक्टूबर 1904 को कोलकता में हुआ था। जब वे नौ वर्ष के थे तभी उनकी माँ का देहान्त हो गया था। उनके पिता ने उनका पालन पोषण किया। पढ़ाई के दौरान ही जब गांधी जी ने असहयोग आन्दोलन आरम्भ किया तो यतीन्द्र भी आन्दोलन में कूद पड़े थे।
महेंद्र लाल सरकार भारत के चिकित्सक, समाज सुधारक और वैज्ञानिक के रूप में प्रसिद्ध हुए ।इनके द्वारा ‘इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस’ की स्थापना की गई।
10 नवंबर 1908 को कनाई लाल दत्त को मात्र 20 बरस की आयु में फांसी हुई। खुदीराम बोस के बाद फांसी के फंदे पर झूलने वाले वह दूसरे क्रांतिकारी थी।
साल 1996 में 20 अक्टूबर को पहली बार विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस (World Osteoporosis Day) मनाया गया था। जिसकी शुरुआत यूनाइटेड किंगडम के नेशनल ऑस्टियोपोरोसिस सोसाइटी ने यूरोपीय आयोग के साथ मिलकर एक अभियान के साथ की थी।
कन्नड़ राज्योत्सव का ऐतिहासिक महत्व साल 1956, 1 नवंबर को दक्षिणी भारत के कन्नड़ भाषी क्षेत्रों को मिलाकर कर्नाटक राज्य बनाया गया। इस दिन को कर्नाटक राज्योत्सव (Karnataka Rajyotsava 2023) के रूप में मनाया जाता है। कन्नड़ राज्योत्सव का सीधा और सरल अनुवाद “कर्नाटक का राज्य महोत्सव” है।
भारत की महान क्रांतिकारी में से एक मातंगिनी हाजरा को ‘बूढ़ी गांधी’ के नाम से के नाम से जाना जाता है।’कर बंदी’ आंदोलन को दबाने के लिए बंगाल में इन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया। हजारों लोगों के साथ सरकारी डाक बंगले पर पहुंचकर इन्होंने अपना जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। 72 वर्ष की आयु में इन्हें अंग्रेजों ने गोलियों से छलनी कर दिया किन्तु मरते दम तक तिरंगे को इन्होंने गिरने नहीं दिया। आखिरी समय में भी उनके मुंह से वंदे मातरम ही निकलता रहा।
31 अक्टूबर, 2019 — जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 लागू हुआ। दोनो केंद्रशासित प्रदेशों के उप-राज्यपालों को जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा पद की शपथ दिलवाई गई
ये कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने जीवन में कभी हार नहीं मानी।, जीवन में बहुत सी विसम परिस्तिथियाँ आई पर उनके क़दम कभी नहीं डगमगाए और वो हर मुश्किल का सामना करते हुए , सकरात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते गए , इनकी कहानी हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है
1874 में गठित हुई ‘यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन’ की याद में जापान के टोक्यो में 09 अक्टूबर 1969 को आयोजित विश्व डाक संघ के सम्मेलन में इसी दिन ‘विश्व डाक दिवस’ मनाए जाने की घोषणा की गई और तभी से प्रतिवर्ष 09 अक्टूबर को ही अंतरराष्ट्रीय डाक सेवा दिवस मनाया जा रहा है।
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