गुरु नानक देव जी की 500 जयंती के अवसर पर अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की स्थापना की गई।यह पंजाब राज्य विधानमंडल द्वारा पारित एक अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया था। विश्वविद्यालय को यूजीसी द्वारा “उत्कृष्टता की क्षमता वाले विश्वविद्यालय” का दर्जा भी दिया गया है।
आज ही के दिन 24 अक्टूबर 1946 को व्हाइट सैंड्स मिसाइल रेंज (White Sands Missile Range) से सैनिकों और वैज्ञानिकों ने एक वी-2 मिसाइल (V-2 missile) लॉन्च की, जिसमें 35-मिलीमीटर मोशन पिक्चर कैमरा था. इसके जरिए अंतरिक्ष से पृथ्वी की पहली तस्वीर ली गई. इन तस्वीरों को बाहरी अंतरिक्ष (Outer Space) की शुरुआत से ठीक ऊपर 65 मील की ऊंचाई पर लिया गया था. इन तस्वीरों को जिस कैमरे में लिया गया था, वो लैंडिंग के दौरान क्रैश से इसलिए बच गया, क्योंकि इसे स्टील कैसेट में बंद किया गया था. ये पहली बार नहीं था, जब पृथ्वी की कर्व को तस्वीर में देखा गया था.
8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने रात को 8 बजे अचानक राष्ट्र को संबोधित करते हुए जानकारी दी कि रात 12 बजे के बाद 500 और 1000 रुपये के नोट को बंद कर दिया जाएगा |अर्थव्यवस्था के लिए काला धन खतरा बन जाता है। इसके चलते अर्थव्यवस्था को सुदृढ करने के लिए नोटबंदी की घोषणा की गई थी।
हृदय रोगों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 29 सितंबर 2012 को WHF ने WHO के साथ मिलकर विश्व हृदय दिवस की घोषणा की।
विशेषतः महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करने वाले समाज- सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर का जन्म दिवस
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ़ भारत की आज़ादी की मांग करते हुए जिसने हंसते-हंसते अपनी अपनी आखिरी सांस भी कुर्बान करने में ऐसी निडरता दिखाई जो भारतीय इतिहास के पन्नों में एक मिसाल बन अंकित हो गई। महान क्रांतिकारी भगत सिंह के यह स्वर ‘इंकलाब जिंदाबाद’ सबकी रगों में देशभक्ति का संचार कर गया।
भारत के सर्वाधिक करिश्माई नेताओं में से भारत रत्न विजेता अटल बिहारी वाजपेई को 1994 में भारत का सर्वश्रेष्ठ सांसद चुना गया 1996 और 1998 में वे दो बार प्रधानमंत्री बने 1977 में UN में अपना पहला हिंदी में भाषण दिया UN जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और हिंदी भाषा का उन्होंने मान बढ़ाया।
यतीन्द्रनाथ दास का जन्म 27 अक्टूबर 1904 को कोलकता में हुआ था। जब वे नौ वर्ष के थे तभी उनकी माँ का देहान्त हो गया था। उनके पिता ने उनका पालन पोषण किया। पढ़ाई के दौरान ही जब गांधी जी ने असहयोग आन्दोलन आरम्भ किया तो यतीन्द्र भी आन्दोलन में कूद पड़े थे।
इंसान ना जाने क्यों अपने आपको मशीन समझने लगा है ?बस दिन-रात बिना रुके,संभले दौड़ता चला जा रहा है | इंसान यह नहीं समझ पा रहा कि वास्तव में मशीन में लगी जंग को तो मिटाया जा सकता है किंतु इंसान के अंदर जो जंग लग जाती है वह कैसे हटाई जा सकती है? दुनिया में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ और कंपैरिजन ने आज इंसान को किस दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है ? यह बात किस हद तक सही है ?इस तथ्य को रखती हुई कहानी है किस्सा एक त्रासद फंतासी का ,सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज़ में….
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