स्वतंत्रता सेनानी वीर चंद्र गढ़वाली अपने सांप्रदायिक सौहार्द के लिए मशहूर रहे। जब अंग्रेजों ने निहत्ते पठानों पर गोली चलाने का आदेश दिया तो वीर चंद्र गढ़वाली ने गोली चलाने से मना किया तो इन्हें फांसी की सज़ा ब्रिटिश हुकूमत ने सुना दी। ‘पेशावर कांड के नायक’ के रूप में प्रसिद्ध वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की स्मृति में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना की शुरुआत की गई।
विश्व व्यावसायिक चिकित्सा दिवस हर वर्ष 27 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसे पहली बार 27 अक्टूबर 2010 को मनाया गया था। द वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट (WFOT) व्यावसायिक चिकित्सा पेशे का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें बैश्विक स्तर पर 101 राष्ट्रीय व्यावसायिक चिकित्सा पेशेवर संगठन शामिल हैं।
शांति घोष का जन्म 22 नवंबर, 1916 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था| उनके पिता का नाम देवेंद्र नाथ घोष था, जो प्रोफेसर और राष्ट्रवादी थे इसलिए शांति घोष पर बचपन से ही राष्ट्रभक्ति का प्रभाव था| वह बचपन से ही क्रांतिकारियों के बारे में पढ़ा करती थीं इसलिए उनका रुझान स्वतंत्रता आंदोलन की तरफ बढ़ने लगा|
स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले बिपिन चंद्र पाल का जन्म 7 नवंबर, 1858 को अविभाजित भारत के हबीबगंज जिले में (अब बांग्लादेश में) एक संपन्न कायस्थ परिवार में हुआ था।स्वतंत्रता संग्राम के दौरान गरम राष्ट्रवादी विचारों के प्रतीक रहे।
10 अक्तूबर के दिन वर्ष 1970 में 96 वर्ष के ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के बाद फिजी को आधिकारिक रूप से स्वतंत्रता प्रदान की गई थी। फिजी दक्षिण प्रशांत महासागर में एक देश और द्वीप समूह है। यह न्यूज़ीलैंड के आकलैंड से करीब 2000 किमी |
यह दिन पहली बार 20 अक्टूबर 2010 को मनाया गया था और तब से हर 5 साल में मनाया जाता है|विश्व सांख्यिकी दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा की गई थी।2020 में तीसरा विश्व सांख्यिकी दिवस मनाया जाएगा| इस बार की थीम- कनेक्टिंग द वर्ल्ड विद डाटा वी कैन ट्रस्ट रखी गई है’|
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में महज़ 21 वर्ष की आयु में वीर योद्धा सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल नेअपनी मातृभूमि के लिए शहीद हो गए ।दुश्मन के 10 टैंक्स में 5 टैंक्स अकेले उन्होंने नष्ट किया ।उन्हें ‘बसंतर के युद्ध’ का युद्धा के नाम से भी जाना जाता है। भारत सरकार ने सर्वोच्च सैन्य अलंकरण परमवीर चक्र से सम्मानित किया।
अकबर के सवालों के सटीक जवाब बीरबल के पास होते थे। आईये जानते हैं इन दोनों का ऐसा ही एक रोचक किस्सा, जिसमें अकबर ने बीरबल से ईश्वर से जुड़े तीन प्रश्न पूछे थे। मोनीषा मुकुंदन की अकबर बीरबल की कहानियां,अंजू जेटली की आवाज में
किचन के बर्तनो के माध्यम से एक दुसरे के महेत्वा को स्वीकार करने की बात इस कहानी ‘ गुडबाय डार्लिंग’ में कही गई है।
किसी की अमानत हड़प कर इंसान सुखी नहीं रह सकता। इसका उदाहरण है, बाबू हरिदास। मगन सिंह उनके ईद के पजावे पर काम करने वाला बालक था, जिस पर उन्हें बड़ी दया आती थी । किंतु जब उन्हें मदन सिंह के पुरखों द्वारा गाए गए खजाने का पता चला तो उनकी नियत खराब हो गई और उसी गड़े हुए खजाने के लालच में वे चल बसे। वही हाल उनके सुपुत्र प्रभु दास का हुआ किंतु वह भी मगन सिंह के खजाने को भोग ना सका और अंत में खजाना मगन सिंह को मिल गया।
साईं की कृपा हम सब पर होती है लेकिन हम उसका शुक्रियादा करना भूल जाते हैं। शुक्र मनाइए हर उस चीज का जो आपको मिली है।
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