अरुण वर्मा एक ईमानदार फॉरेस्ट ऑफिसर है |ईमानदारीसे किसी भी तरीके से समझौता न करने के कारण अरुण वर्मा का बार-बार तबादला करा दिया जाता है |इस बार तो अरुण वर्मा ने एमएलए के भतीजे का ट्रक पकड़ा है |इस बात का क्या प्रभाव पड़ेगा अरुण वर्मा की जिंदगी में ?क्या वह सच्चाई और ईमानदारी का रास्ता छोड़ देगा या फिर अपनी बात पर अडिग रहेगा| जानने के लिए सुनते हैं सूर्यबाला के द्वारा लिखी गई कहानी होगी जय, होगी जय… हे पुरुषोत्तम नवीन , निधि मिश्रा की आवाज में
आज राजी एक शादीशुदा महिला है पति और बच्चे सब है | किंतु आज राजी को अपने बचपन के दोस्त की याद बहुत आ रही है |बचपन के वह बिताए हुए दिन, किस्से –कहानियां, वह हंसी ,वह सब कुछ | राजी के बचपन में ऐसा क्या था और वह अपनी कौन सी बातों को स्मरण कर रही है ?जानने के लिए सुनते हैं सूर्यबाला के द्वारा लिखी गई कहानी कागज की नाव में चांदी के बाल ,निधि
कहानी नौकरी पेशा पति -पत्नी नीना और शौनक की है |उनकी इस डेढ़ साल की छोटी सी बच्ची है सुजाता| समस्या यह है कि उस मासूम सुजाता के लिए की देखभाल के लिए उन दोनों के पास वक्त नहीं है, ऐसे में उनके द्वारा किए गए सारे प्रयास विफल भी हो रहे हैं| आखिर अब कैसे नीना और शौनक यह समस्या दूर होती है |और सुजाता को भी भरपूर प्यार कैसे मिलता है| जानने के लिए सुनते हैं सूर्यबाला के द्वारा लिखी गई कहानी माय नेम इश ताता , निधि मिश्रा की आवाज में
पत्नियो पर तो आप सबने बहुत चुटकुले और व्यंग सुने होंग़े। सुनिए पतियों पर लिखा गया ये कुछ मीठा और कुछ तीखा व्यँग सूर्यबाला जी की कहानी “गर्व से कहो हम पती हैं”
कहानी की नायिका बेला है, जो कि कंजरो की बस्ती की एक लड़की है | बेला, गोली से प्रेम करती है| कंजरो के सरदार मैकू जबरन बेला का विवाह भूरे से करवा देता है| किंतु यही मैकू ठाकुर के सामने एक हज़ार की बोहनी के लिए एक इंद्रजाल फैलाता है| क्या है मैकू का वह जाल ?क्या हुआ चंदा ,गोली, भूरे और ठाकुर के साथ ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जयशंकर प्रसाद द्वारा लिखी गई कहानी इंद्रजाल ,निधि मिश्रा की आवाज
कहानी की नायिका का नाम रोहिणी है | रोहिणी नंदन भाँट की लडक़ी है। लेखक के दोस्त जीवन से रोहिणी की मुलाकात होती है, उसके बाद से रोहिणी पूरे गांव में घूम- घूम कर गीत गाती है| आखिर उसके गीत में ऐसा क्या है ?जीवन से उसका क्या संबंध है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जयशंकर प्रसाद द्वारा लिखी गई कहानी ग्राम- गीत, निधि मिश्रा की आवाज में
आज राजी एक शादीशुदा महिला है पति और बच्चे सब है | किंतु आज राजी को अपने बचपन के दोस्त की याद बहुत आ रही है |बचपन के वह बिताए हुए दिन, किस्से –कहानियां, वह हंसी ,वह सब कुछ | राजी के बचपन में ऐसा क्या था और वह अपनी कौन सी बातों को स्मरण कर रही है ?जानने के लिए सुनते हैं सूर्यबाला के द्वारा लिखी गई कहानी कागज की नाव में चांदी के बाल ,निधि
पेट में थोड़ी जान पड़ी तो आँखों से आँसू छलछला उठे और अम्मा का रुदन पूरे गाँव में भर गया। नदिया का गाड़ा, जीयतै खाइस, मोइते खाइस।गांव में 90 साल के बब्बा की मृत्यु हो जाती है |मृत्यु के पश्चात क्रिया कर्म करने के लिए भी उनके घर में धन नहीं होता है |बब्बा की वृद्ध पत्नी गोमती अम्मा अभी जीवित है किंतु गरीबी के कारण उनका शरीर भी बेहद कमजोर हो चुका है | ऐसी स्थिति में बब्बा का अंतिम संस्कार कैसे होता है? और उसे कौन कराता है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सविता पाठक के द्वारा लिखी गई नीम के आंसू, निधि मिश्रा जी की आवाज में
रामकृपाल का बेटा दिनेश शहर में अपने मामू मनमोहन जी के यहां से पढ़कर बैंक में नौकरी कर रहा है |नौकरी करते हुए अभी दिनेश को मात्र 6 महीने हुए हैं और उसकी शादी के लिए बहुत सारे रिश्ते आने लगे हैं |अब रामकृपाल दिनेश की शादी बड़े घर की लड़की और नौकरी पेशा लड़की से करना चाहते हैं| रामकृपाल ऐसी बहू क्यों चाहते हैं ?और क्या उनकी मनोकामना पूरी होती है ?जानने के लिए सुनते हैं सिनीवाली के द्वारा लिखी गई कहानी वंशलोचन निधि मिश्रा की आवाज
मेला – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कहानी में प्रयागराज में लगे कुंभ मेले का दृश्य है जहां दूर-दूर से लाखों की संख्या में लोग अपने पाप को धोने के लिए संगम में डुबकी लगाने आते हैं। क्या मात्र डुबकी लगाकर पाप से मुक्त हुआ जा सकता है ?क्या वास्तव में अध्यात्म को भी एक पेशे की दृष्टि से अपनाया जाता है? आस्था ,परंपरा इन सब बातों का अद्भुत संगम है इस कहानी में। इसी बात को रोचक ढंग से आधार बनाकर ममता कालिया ने कहानी मेला का ताना-बाना बुना है,जिसे शेफ़ाली कपूर ने उतने ही अनोखे अंदाज़ से अपनी आवाज़ से निखारा है।
धीरेंद्र अस्थाना जी की कहानी ओरंगउटान इस ओर संकेत करती है कि क्या एक मनुष्य अपने आप को एक ऐसे जीव से तुलना कर सकता है जिसमे की वह अपना अक्स देखता हो? उसी तरह जिस तरह जंगल मे रहने वाला ओरंगउटान काफी बुद्धिमान वनमानुष है किंतु इसके बावजूद भी अकेला रहता है| कभी-कभी इंसान में धीरे-धीरे ऐसी प्रवृत्ति सामाजिक दबाव के चलते उत्पन्न हो जाती है |मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और अपने आप को अकेला महसूस करता है और धीरे-धीरे मानव जाति का हर इंसान ओरंगउटान होता जा रहा|
जिससे तुम्हारा नुकसान हो रहा हो, उससे अलग ही रहना अच्छा है, चाहे वह उस समय के लिए तुम्हाहरा दोस्तु भी क्यों न हो।पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी जी के द्वारा लिखी गई कहानी दो घड़े, निधि मिश्रा की आवाज में
हिंदुस्तान पाकिस्तान बंटवारे के बाद जो कि अमृतसर जा रही है कुछ मुसाफिर जिसमें तीन पठान, सरदार ,बाबू बैठे हुए हैं एक बुढ़िया बैठी हुई है वजीराबाद स्टेशन में हलचल होने लगती है जैसे कहीं दंगा हुआ हूं पठान चढ़े हुए मुसाफिरों के साथ बदसलूकी करने लगता है बाकी यात्री में बैठे हुए हैं अमृतसर पहुंचती है पठानों से बदला लेने लगता है किस लिए ऐसा क्या कारण है इसके पीछे
Punishment” is an incisive morality tale about the way that a lie can quickly develop a life of its own. Tagore ingeniously crafts a story that at first seems like it’s going to focus on one version of violence, but instead is enveloped by another.
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