नोबेल के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक डायनामाइट का आविष्कार है.| नाइट्रोग्लिसरीन नामक एक रासायनिक पदार्थ में असीमित विस्फोटक शक्ति होती है. |नोबेल ने नाइट्रोग्लिसरीन की इस ताकत को पहचाना और उससे एक ऐसी खोज की, जिसने मानव इतिहास की दिशा बदल दी|अल्फ्रेड नोबेल शाही स्वीडिश वैज्ञानिक अकादमी के सदस्य भी थे| यही अकादमी अब नोबेल पुरस्कारों के लिए दुनिया भर से योग्य उम्मीदवारों का चयन करती है|
दुनिया को रोशनी दिखाने वाले थॉमस एल्वा एडिसन ने आज ही के दिन, 18 अक्टूबर 1931 को अपनी आखिरी सांस ली थी. एक अमेरिकी वैज्ञानिक और बिजनेसमैन थे. उन्होंने बिजली के उपकरण, संचार, साउंस रिकॉर्डिंग और वीडियोग्राफी जैसे क्षेत्रों में कई डिवाइस इजाद किए
दुनिया की शहरी चुनौतियों पर जोर देने और नए शहरी एजेंडा की दिशा में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को शामिल करने के लिए 2014 में यूएन-हैबिटेट द्वारा अर्बन अक्टूबर की शुरुआत की गई थी।
लचित बरफूकन का जन्म 24 नवंबर, 1622 को अहोम साम्राज्य के एक अधिकारी सेंग कालुक-मो-साई और माता कुंदी मराम के घर हुआ था। उनका पूरा नाम ‘चाउ लाचित फुकनलुंग’ था। लचित को अहोम साम्राज्य के राजा चक्रध्वज सिंह की शाही घुड़साल के अधीक्षक और महत्वपूर्ण सिमलूगढ़ किले के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया। बहादुर और समझदार लचित जल्दी ही अहोम साम्राज्य के सेनापति बन गए। ‘बरफूकन’ लचित का नाम नहीं, बल्कि उनकी पदवी थी।
23 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस के रूप में मनाया जाता है। 23 अक्टूबर 2013 को, किर्गिस्तान के बिश्केक में हिम तेंदुए के संरक्षण के लिए एक घोषणा को अपनाया गया था। सभी 12 हिम तेंदुओं की रेंज के देशों ने इस संकल्प को अपनाया।
9 अक्टूबर 1949 आधुनिक प्रादेशिक सेना का गठन किया गया। प्रादेशिक सेना अधिनियम 1948 में पारित होने के बाद इसका गठन किया गया। पहले गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी ने इसका उद्घाटन किया ।1962 ,1965 और 1971 के सैन्य अभियानों में इसकी सक्रिय रूप से इसे शामिल किया गया। रक्षा से जुड़ी कई ज़िम्मेदारियां निभाने में प्रादेशिक सेवा का अहम भूमिका रही है ।आतंक विरोधी अभियान में सेना की मदद ली जाती रही है। कपिल देव और महेंद्र सिंह धोनी भी प्रादेशिक सेना का हिस्सा हैं।
हृदय रोगों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 29 सितंबर 2012 को WHF ने WHO के साथ मिलकर विश्व हृदय दिवस की घोषणा की।
एकाएक उनका मन हुआ कि वह भी सामने वाले पार्क में जाकर धूप का मज़ा ले लें। लेकिन उन्होंने अपने इस विचार को तुरंत झटक दिया। अपने मातहतों के बीच जाकर बैठेंगे। नीचे घास पर! इतना बड़ा अफ़सर और अपने मातहतों के बीच घास पर बैठे!ऑफिस का एक कर्मचारी किस प्रकार कई वर्षों के बाद धूप की सुखानुभूति करता है जानते हैं कहानी धूप में
स्वेज नहर मिस्र में भूमध्य सागर पर बन्दरगाह सईद से दक्षिण की ओर स्वेज शहर (स्वेज की खाड़ी के उत्तरी किनारे पर स्थित) तक 120 मील तक फैली हुई है। नहर मिस्र के बड़े हिस्से को सिनाई प्रायद्वीप से अलग करती है। इसे बनने में 10 साल लगे और इसे आधिकारिक तौर पर 17 नवंबर, 1869 को खोला गया।
Reviews for: Alfred Bernhard Nobel – 21 Oct