दीपक के पाँच संदेश – भाग 4
दिवाली पर संदीप द्विवेदी के पाँच संदेश.
क्या आप जानते हैं कि जीवन में बड़ी सफलता कहाँ छुपी होती है और हमें वह कैसे प्राप्त होती है? इस संदर्भ में सुनते हैं संदीप द्विवेदी को…
विपरीत परिस्थितियों में जब सारे रास्ते बंद हो जाए ,ऐसे में आपको उन परिस्थितियों से कौन बाहर निकाल सकता है? इसके बारे में क्या कहते हैं संदीप द्विवेदी…
यह कविता आपको इस आधार पर प्रेरित करेगी और ईश्वर के प्रति आपका विश्वास तथा प्रेम बढायेगी कि कई बार ईश्वर को जब निखारना होता है तो वो आपको हमें मुश्किलों से घेर देते हैं। क्योंकि तभी हम निकलने का प्रयास करेंगे और इस परीक्षा से निकलने के बाद एक अलग ही ऊर्जा रहेगी। सफलता का अलग ही आनंद होगा।। इसके लिए हमने भगवान् श्री कृष्ण और महारथी कर्ण के बीच की गाथा को लिया है। कर्ण कौरव पक्ष की ओर होकर भी इसलिए वंदनीय है क्योंकि उसने सब बहुत संघर्ष से हासिल किया है। अपने आपको कई गुणों से सज्जित किया है। भगवान् कृष्ण भी कर्ण की प्रशंसा करते नही थकते लेकिन उन्होंने कभी अधिक पक्ष नही लिया और फिर भी कर्ण की कीर्ति सारे संसार में है।। और यह कविता कर्ण की कीर्ति का कारण श्री कृष्ण को मानते हुए बढ़ती है। अब ये किस तरह.. यह कविता सुनते हुए स्पष्ट होगा। आशा है यह कविता आपको प्रेरित करेगी। महाकवि दिनकर जी की ‘रश्मिरथी’ और शिवा जी सावंत जी की ‘मृत्युंजय’और बी आर चोपड़ा जी की ‘महाभारत’ से कर्ण का त्यागी जीवन परिचय मिला है मुझे।इनको पढ़ता हूँ।प्रेरित होता हूँ।।। बस वही से कर्ण को जो समझा।। उसी से ये कल्पना भीतर बढ़ी और प्रयास किया।
दीपक के पाँच संदेश – भाग 2
दिवाली पर संदीप द्विवेदी के पाँच संदेश.
कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया परमवीर चक्र (29 नवंबर 1935 – 5 दिसंबर 1961) एक भारतीय सैन्य अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान के सदस्य थे। वह परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले एकमात्र संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक हैं। वह किंग जॉर्ज के रॉयल मिलिट्री कॉलेज और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र थे।
कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह (श्री पीरू सिंह शेखावत भी) (20 मई 1918 – 18 जुलाई 1948) भारतीय सैनिक थे। उनका 1947 के भारत-पाक युद्ध में निधन हुआ। उन्हें 1952 में मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया जो शत्रु के सामने वीरता प्राप्त करने के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च भारतीय सम्मान है।
विपरीत परिस्थितियों में जब सारे रास्ते बंद हो जाए ,ऐसे में आपको उन परिस्थितियों से कौन बाहर निकाल सकता है? इसके बारे में क्या कहते हैं संदीप द्विवेदी…
जदुनाथ सिंह परमवीर चक्र विजेता (21 नवंबर 1916 -6 फरवरी 1948 )नौशेरा के झांगर पोस्ट में मात्र अपने 9 सिपाहियों के साथ डटे इस नौजवान ने सैकड़ों पाकिस्तानी सैनिकों को अपने जोश और ज़ज़्बे से कामयाब नहीं होने दिया। पाकिस्तानी सैनिकों ने लगातार तीन बार कोशिश की लेकिन अपने सारे साथियों के वीरगति प्राप्त होने के बावजूद अकेले- दम सीने पर 11 गोलियां खाकर भी पाकिस्तानी सैनिकों को तब तक मुंह -तोड़ जवाब दिया जब तक हिंदुस्तानी सेना वहां नहीं आ गयी। 6 फरवरी 1948 को हमारा यह वीर सैनिक शहीद हो गया ।भारत सरकार की ओर से अपने सर्वोच्च सैन्य अलंकरण परमवीर चक्र से मरणोपरांत इन्हें सम्मानित किया गया।
दीपक के पाँच संदेश – भाग 4
दिवाली पर संदीप द्विवेदी के पाँच संदेश.
This is a 5 minutes talk of Dr. Anil Rajvanshi broadcast by All India Radio via 62 channels all over India on 10th January 2019. Here Dr. Rajvanshi sheds light on Gandhi ji’s innovative streak. He was a tinkerer and engineer. He was not anti science
“How To Make Money By Playing Video Games AJ Gaming Anmol Jaiswal Josh Talks”.
चुडैल – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
एक अविवाहित स्त्री का मां बनना और बच्चा जन्म लेना, उसके चरित्र हीनता की निशानी है।इस कहानी की नायिका अविवाहित है और अपने जन्मे बच्चे के साथ जाने-अनजाने अत्याचार करती है। समाज़ में अपने जीवन-यापन के लिए वह किस तरीके से पाप के गर्त में गिरती चली जाती है और समाज़ उसे चुड़ैल का नाम देता है।एक पुरुष प्रधान समाज़ में ऐसी एक नारी की क्या स्थिति होती है इस पर समाज़ से प्रश्न करती हुई फ्रेंच लेखक Guy de Maupassant की कहानी चुड़ैल ,जिसे भाव प्रधान आवाज़ दी है नयनी दीक्षित ने…
रणभूमि का शव tu बन जा, पर रंगमंच की प्रीत ना बन” वास्तविकता में जीवन इसी भांति जीना चाहिए | कविता के शब्दों मे रूप से स्पष्ट रूप से प्रकट किया गया है |अनुपम ध्यानी की आवाज में कविता” Ban, na Ban “…
Reviews for: Tayagi Purush Dikhta Kaisa Hai (त्यागी पुरुष दिखता कैसा है)