यह कहानी जगन्नाथ नाम के एक बेहद कंजूस बूढ़े व्यक्ति की है जिसने थोड़ा सा धन बचाने के लिए अपनी बीवी और बहु का उचित इलाज नहीं करवाया, परिणाम स्वरूप उनकी मृत्यु के बाद उसका बेटा भी उसके पोते गोकुल को लेकर घर से पलायन कर जाता है। अपने कंजूस स्वभाव से ग्रस्त जगन्नाथ अपने पोते गोकुल की मृत्यु का कारण बनता है तथा पागल हो स्वयं भी प्राण त्याग देता है।
एकाएक उनका मन हुआ कि वह भी सामने वाले पार्क में जाकर धूप का मज़ा ले लें। लेकिन उन्होंने अपने इस विचार को तुरंत झटक दिया। अपने मातहतों के बीच जाकर बैठेंगे। नीचे घास पर! इतना बड़ा अफ़सर और अपने मातहतों के बीच घास पर बैठे!ऑफिस का एक कर्मचारी किस प्रकार कई वर्षों के बाद धूप की सुखानुभूति करता है जानते हैं कहानी धूप में
कहानी बगुलों और कछुओं की है जिसमें बगुले पेड के कोटर में रह रहे नाग से बदला लेना चाहते हैं क्योंकि नाग उनके बच्चों को मारकर खा जाता है और इधर कछुए भी बगुलों से बदला लेना चाहते हैं क्योंकि बगुले, कछुओं को अपना आहार बना लेते हैं |ऐसे में कहानी में ऐसे में क्या होता है ?क्या कछुए बगुलों से अपना बदला ले पाते हैं? ,जानने के लिए सुनते हैं पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी शत्रु की सलाह ,शिवानी आनंद की आवाज में…
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