साधारणत: धोबियों का रंग साँवला पर मुख की गठान सुडौल होती है ।बिबिया ने यह विशेषता गेंहएँ रंग के साथ पाई है । उसका हँसमुख स्वभाव उसे विशेष आकर्षण देता है। सुडौल, गठीली शरीर वाली बिबिया को धोबिन समझना कठिन था। पर थी वह धोबिनों में भी सबसे अभागी धोबिन। अपना ही नहीं वह दूसरों का काम करके भी आनंद का अनुभव करती थी। पाँचवें वर्ष में ब्याह हो गया। पर गौने से पहले ही वर की मृत्यु ने इस संबंध को तोड़ दिया। जिस प्रकार उच्च वर्ग की स्त्री का गृहस्थी बसा लेना कलंक है उसी प्रकार नीच वर्ग की स्त्री का अकेला रहना सामाजिक अपराध है। कन्हैया ने उसका दोबारा ब्याह रचा दिया लेकिन——-
साधारणत: धोबियों का रंग साँवला पर मुख की गठान सुडौल होती है ।बिबिया ने यह विशेषता गेंहएँ रंग के साथ पाई है । उसका हँसमुख स्वभाव उसे विशेष आकर्षण देता है। सुडौल, गठीली शरीर वाली बिबिया को धोबिन समझना कठिन था। पर थी वह धोबिनों में भी सबसे अभागी धोबिन। अपना ही नहीं वह दूसरों का काम करके भी आनंद का अनुभव करती थी। पाँचवें वर्ष में ब्याह हो गया। पर गौने से पहले ही वर की मृत्यु ने इस संबंध को तोड़ दिया। जिस प्रकार उच्च वर्ग की स्त्री का गृहस्थी बसा लेना कलंक है उसी प्रकार नीच वर्ग की स्त्री का अकेला रहना सामाजिक अपराध है। कन्हैया ने उसका दोबारा ब्याह रचा दिया लेकिन——-
उस दिन मैं बिना कुछ सोचे हुए ही भाई निराला जी से पूछ बैठी थी,” आपके किसी ने राखी नहीं बांधी?” ” कौन बहन हम जैसे भुक्कड़ को भाई बनावेगी?” मे, उत्तर देने वाले के एकांकी जीवन की व्यथा थी, या चुनौती ? यह कहना कठिन है ।पर जान पड़ता है किसी अन्य चुनौती के आभास ने ही मुझे उस हाथ के अभिषेक की प्रेरणा दी। उनके अस्त-व्यस्त जीवन को व्यवस्थित करने के असफल प्रयास का स्मरण कर मुझे आज भी हंसी आ जाती है। संयोग से उन्हें कहीं से ₹300 मिले। उन्होंने मुझे अपने खर्च का बजट बनाने का आदेश दिया। अस्तु : नमक से लेकर नापित तक और चप्पल से लेकर मकान के किराए तक का अनुमान- पत्र मैंने बनाया। उन्हें पसंद आया ।पर दूसरे ही दिन वह सवेरे आ पहुँचे। ₹50 चाहिए किसी विद्यार्थी की परीक्षा शुल्क भरना है वरना—–
नीलाभ ग्रीवा के कारण मोर का नाम नीलकंठ और उसकी छाया के समान रहने के कारण मोरनी का नामकरण हुआ राधा। नीलकंठ ने अपने आप को चिड़ियाघर का सेनापति और संरक्षक नियुक्त कर लिया ।उसके अपत्य स्नेह का हमें ऐसा प्रमाण मिला कि हम विस्मित रह गए। एक शिशु खरगोश साँप की पकड़ में आ गया। नीलकंठ ने साँप को चोंच से घायल कर दो खंडों में विभाजित कर दिया। नीलकंठ और राधा साथ रहते थे किंतु नई मोरनी, कुब्जा को यह कतई पसंद नहीं था । वह नीलकंठ के साथ रहना चाहती थी । नीलकंठ व्याकुल रहने लगा और अंततः मर गया।
उनकी देहयष्टि में ऐसा कुछ उग्र या रौद्र नहीं था, जिसकी हम वीर गीतों की कवियत्री में कल्पना करते हैं। बहन सुभद्रा का चित्र बनाना कुछ सहज नहीं है। गोल मुख , चौड़ा माथा , सरल भ्रकुटियाँ , बड़ी भावस्वात आँखें, छोटी सुडौल नासिका, हँसी को जमा कर गढ़े हुए से होंठ, दृढ़ता सूचक ठुड्डी, सब कुछ मिलकर अत्यंत निश्चल, कोमल, उदार व्यक्तित्व वाली भारतीय नारी। एक बार मृत्यु की चर्चा चल पड़ी थी। उन्होंने कहा ,”मेरे तो मन में मरने के बाद भी धरती छोड़ने की कल्पना नहीं है । मैं चाहती हूँ मेरी समाधि हो। जिसके चारों ओर नित्य मेला लगता रहे। बच्चे खेलते रहे ।स्त्रियाँ गाती रहे और कोलाहल होता रहे।
महादेवी जी के द्वारा लिखी गई कहानी गिल्लू उनकी चर्चित कहानियों में से एक है| कहानी एक गिलहरी (गिल्लू) और लेखिका के बीच के स्नेह की है |गिल्लू किस प्रकार लेखिका को मिला और उन दोनों के बीच में किस प्रकार का स्नेह था ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में कहानी गिल्लू
चीनी फेरीवाला फाटक से बाहर आता दिखाई दिया । उसके कंधे पर भूरे कपड़े का गट्ठर था। मैंने कहा कि मैं फॉरेन नहीं खरीदती, तो सरल विस्मय के साथ उसने कहा कि हम क्या फारन है ? हम तो चाइना से आता है । मैंने अपनी नहीं को और अधिक कोमल बनाकर कहा, मुझे कुछ नहीं चाहिए भाई । चीनी भी विचित्र निकला,’ हमको भाई बोला है ।तुम जरूर लेगा। बहुत अच्छा सिल्क आता है सिस्तर। और उस दिन से उसे मेरे घर में आने जाने की परवानगी मिल गई
अनिकेत – Malti Joshi (मालती जोशी) – Arti Srivastava
माँ की मृत्यु के बाद वीरेश और विशाखा ने जिया में ही अपनी माँ को देखा । लेकिन नई बहू उसे सास के रूप में स्वीकार नहीं कर सकी । वह जिया को साथ रखना नहीं चाहती थी । पिता की मृत्यु के बाद वीरेश को जिया की चिंता सताने लगी क्योंकि वह सच्चाई से अनभिज्ञ नहीं था । ऐसी क्या सच्चाई थी जिसकी वजह से वीरेश को जिया की इतनी चिंता थी ? वह जिया के लिए इतना बेचैन क्यों था?
अपहरण – Malti Joshi (मालती जोशी) – Arti Srivastava
हमारे समाज में लड़की देखने दिखाने का चलन काफी पुराना है ।जब कोई लड़का देखने आने वाला होता है तो पूरा घर उसके स्वागत में बिछ-बिछ जाता है।एक अलग ही माहौल होता है।लड़की डरी – सहमी होती है लेकिन मन में अनेक विचार भी जन्म ले रहे होते है। एेसे में अगर लड़के को कोई और लड़की पसंद आ जाए तो उस लड़की पर क्या बीतती है जो अपने मनमंदिर में आपको जगह देती है। उसे हीनता का एहसास होने लगता है।उसका अपने ऊपर से विश्वास उठ जाता है। लेकिन कब ,क्या होगा ? कोई नही जानता।
सोमा बुआ एक बूढ़ी, गरीब और अकेली महिला है जिसका जवान पुत्र 20 साल पहले गुजर गया है |पति भी घर-बार त्याग कर तीरथ वासी बन गया है किंतु सोमा बुआ दूसरों की खुशियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेकर अपनी खुशी और अपना अकेलापन दूर करने की कोशिश करती है किंतु क्या समाज भी उन्हें उसी रूप में स्वीकार कर पाता है और वह प्यार व सम्मान दे पाता है जैसा वह दूसरों को देना चाहती है भावुक कर देने वाली देने वाली मन्नू भंडारी की कहानी है अकेली आरती श्रीवास्तव जी की आवाज में |
बाँदी यानी दासी, गुलाम। जिसकी अपनी कोई मर्जी नहीं होती, अपना कोई अस्तित्व नहीं होता। वो खरीदी जाती है, घर सँभालने के लिए ।हर जरूरत को पूरा करने के लिए। वह पत्नी की तरह सारे फर्ज निभाती है। लेकिन पत्नी का दर्जा नहीं पाती । उसे वह इज्जत ,वह ओहदा नहीं मिलता । आखिर क्यों ?और नवाबों के शौक, उनकी रंगीन तबीयत , बड़े ऊँचे खानदान की बहू बेटियों की रंगरलियाँ। सब छुप जाते हैं उनके दौलत के परदे के पीछे । तो क्या गरीब होना इतना बड़ा जुर्म है? अभिशाप है?
जब ऐसा व्यक्ति जो कहने को अपनी समस्त प|रिवारिक जिम्मेदारियों को पूर्ण कर चुका है, उसका शरीर कमजोर हो गया हो |तब भी क्या वास्तव में इस सांसारिक संवेदना से परे है ? ऐसी स्थिति में उसकी क्या मनोदशा होती है इस गीत के माध्यम से समझते हैं “ मैं हूं 78 का “….
दुःशासन शस्त्र-बल को सब कुछ समझता है। उसे धर्म-शास्त्र और धर्मज्ञों में कोई विश्वास नहीं है। इन्हें तो वह शस्त्र के आगे हारने वाले मानता है
हेमराज को कन्हैयालाल समझदार मानता था। हेमराज ने समझाया-बहू को प्यार तो करना ही चाहिए, पर प्यार से उसे बिगाड़ देना या सिर चढ़ा लेना भी ठीक नहीं। औरत सरकश हो जाती है, तो आदमी को उम्रभर जोरू का गुलाम ही बना रहना पड़ता है शादी के बाद औरत को काबू में रखने के प्रयोजन से कन्हैयालाल शादी के बाद लाजो पर विभिन्न प्रकार की यातनाएं देने लगता है किंतु जब करवा चौथ का वाले दिन कन्हैयालाल उसी प्रकार लाजो को प्रताड़ित करता है तो लाजो का सब्र टूट जाता है क्या इतना सब कुछ होने के बाद लाजो कन्हैयालाल के लिए व्रत रखेगी? कन्हैयालाल को क्या अपनी गलती का एहसास होगा? क्या होगा उनके वैवाहिक जीवन का ?पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं यशपाल जी के द्वारा लिखी गई कहानी करवा का व्रत ,सुमन वैद्य की आवाज में
दंगे में सिराजुद्दीन की पत्नी मर जाती है |मरते समय वह अपनी बेटी सकीना को दंगाइयों से दूर रखने के वास्ते सिराजुद्दीन से उसे लेकर भागने के लिए कहती है| सिराजुद्दीन उसे लेकर गाड़ी में बैठता है लेकिन वहां पर वह बेहोश हो जाता है जब उसे होश आता है तो उसे सकीना नजर नहीं आती| क्या हुआ सकीना का ? क्या सिराजुद्दीन अपनी बेटी सकीना को पुनः को ढूंढ पाएगा? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सआदत हसन मंटो की लिखी कहानी ‘खोल दो ‘, अनुपम ध्यानी की आवाज में
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