प्यार में जुदाई के आलम को दशाया गया है इस कविता में
अच्छे पलों को किसी की नजर लग जाना आम बात है और अगर वही पल हम किसी के साथ बिताएं तो ये डर और बढ़ जाता है। तो ऐसे ही भावों को दर्शा रही है ये कविता।
मैं कैसी लगती हूँ – Arvind saxena – Priya bhatia
“मुझको मालूम नहीं… हुस़्न की तारीफ, मेरी नज़रों में हसीन ‘वो’ है, जो तुम जैसा हो..”
धुंए के छल्ले – Arvind saxena – Priya bhatia
जो तूने_दिया उसे हम याद करेंगे, हर पल तेरे मिलने की #फ़रियाद करेंगे, चले_आना जब कभी ख्याल आये मेरा, हम रोज़ खुदा से पहले “तुझे” याद करेंगे।
“मां का हमारे जीवन में क्या महत्व है ये कविता बख़ूबी बताती है। मां के होने से ही हमारा जीवन सुखी है। कविता के भाव जानने के लिए जरूर सुनें ये कविता।”
सीने में उठने वाला वो दर्द जब अलग हो जाए हमसे वो इंसान जिससे हम बेहद मोहब्बत करते हैं। उसी दर्द को दर्शाती है यह कविता।
तुम मुझे कभी भुला न पाओगे – Arvind saxena – Priya bhatia
हमरी किस्मत में तो सिर्फ यादें हैं तुम्हारी, जिसके नसीब में तू है उसे ज़िन्दगी मुबारक।
धुंए के छल्ले – Arvind saxena – Priya bhatia
जो तूने_दिया उसे हम याद करेंगे, हर पल तेरे मिलने की #फ़रियाद करेंगे, चले_आना जब कभी ख्याल आये मेरा, हम रोज़ खुदा से पहले “तुझे” याद करेंगे।
“मां हमारे जीवन का आधार होती है। बचपन से वही हमें सब कुछ सिखाती है। यह कविता बखान कर रही है मां के ऐसे ही अनमोल गुणों को”
न बुझा तू बत्तिया – Arvind saxena – Priya bhatia
लुटी है एक बेटी, तो लुटा सम्मान सबका है!!
मैं कैसी लगती हूँ – Arvind saxena – Priya bhatia
“मुझको मालूम नहीं… हुस़्न की तारीफ, मेरी नज़रों में हसीन ‘वो’ है, जो तुम जैसा हो..”
अचानक रात को संजीव के पास एक अनजान नंबर से मैसेज आने शुरू होते हैं |मैसेज करने वाली लड़की का दावा है कि वह संजीव से प्यार करती है और 10 साल से उसका इंतजार कर रही है |किंतु संजीव ऐसी किसी भी लड़की को नहीं जानता है कौन है वह अनजान लड़की ?और आगे कहानी में क्या होता है ?जानने के लिए सुनते हैं नज़्म सुभाष की लिखी हुई कहानी किसी नज़र को तेरा,अमित तिवारी की आवाज़ में….
डरी हुयी औरत – रवींद्र कालिया – पूजा श्रीवास्तव
यूं तो तुलना और गौतम एक खुशहाल शादीशुदा ज़िन्दगी व्यतीत कर रहे हैं ।इन दोनों यानि कि तुलना और गौतम का एक बेहद करीब मित्र है खुशवंत। तुलना कहीं ना कहीं खुशवंत के व्यक्तित्व से प्रभावित है।क्या यही वजह है कि तुलना के मन में एक अजीब सा भय है कि कहीं उसकी खुशवंत के प्रति जो भावना है वह उसकी शादी- शुदा ज़िन्दगी को प्रभावित ना कर दे?क्या गौतम को भी इस बात का अंदाजा है? पूरी कहानी जानने के लिए सुने रवीन्द्र कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी डरी हुई औरत,पूजा श्रीवास्तव की आवाज़ में…
सीने में उठने वाला वो दर्द जब अलग हो जाए हमसे वो इंसान जिससे हम बेहद मोहब्बत करते हैं। उसी दर्द को दर्शाती है यह कविता।
मकान को घर और लोगो को परिवार बनाने के लिए उज्जवला द्वारा किये गये समर्पण की कहानी है ” Perfection “
नौ साल छोटी पत्नी – रवींद्र कालिया – विनीता श्रीवास्तव
कुशल और तृप्ता पति -पत्नी है। तृप्ता, कुशल से 9 साल छोटी है। तृप्ता का कुछ अतीत है जो कुशल को लगता है शायद तृप्ता उससे छुपा रही है किंतु कुशल, तृप्ता की इस मासूमियत को समझता है और इस बात को लेकर ज्यादा गंभीर भी नहीं है। किंतु तृप्ता इस बारे में क्या सोचती है? पति-पत्नी की छोटी-छोटी, मीठी-मीठी नोंक झोंक से सजी लेखक रविंद्र कालिया की कहानी 9 साल छोटी पत्नी सुनिए विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में
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