सोमा बुआ एक बूढ़ी, गरीब और अकेली महिला है जिसका जवान पुत्र 20 साल पहले गुजर गया है |पति भी घर-बार त्याग कर तीरथ वासी बन गया है किंतु सोमा बुआ दूसरों की खुशियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेकर अपनी खुशी और अपना अकेलापन दूर करने की कोशिश करती है किंतु क्या समाज भी उन्हें उसी रूप में स्वीकार कर पाता है और वह प्यार व सम्मान दे पाता है जैसा वह दूसरों को देना चाहती है भावुक कर देने वाली देने वाली मन्नू भंडारी की कहानी है अकेली आरती श्रीवास्तव जी की आवाज में |
the writers is involved in extra marital affair and makes her life कहानी की नायिका अपने बॉस शिंदे से प्रेम करने लगती है |शिंदे एक शादीशुदा आदमी है |शिंदे नायिका को लुभावने सपने दिखाता है |क्या नायिका को इस बात का एहसास होता है कि वह एक खिलौना मात्र है जिसे जब तक मन चाहा खेला और फिर ठुकरा दिया नायिका समाज में औरतों को अपने अनुभवों से क्या समझाना चाहती है पूरी बात जानने के लिए सुनते हैं मन्नू भंडारी जी के द्वारा लिखी गई कहानी स्त्री सुबोधिनी आरती श्रीवास्तव जी की आवाज में
गर्मियों का मौसम है टी हाउस में काफी भी है गे-लॉर्ड भी भरा हुआ है वहां बैठे युवक-युवतियों और अन्य सभी लोगों के बीच अलग-अलग तरह की बातचीत हो रही है क्या है टी- हाउस का माहौल ?किस प्रकार की बातचीत वहां चल रही है ?इसका पूरा आनंद लेने के लिए मन्नू भंडारी की कहानी एक प्लेट सैलाब सुनते हैं आरती श्रीवास्तव जी की आवाज में
सयानी बुआ का नाम वास्तव में ही सयानी था या उनके सयानेपन को देखकर लोग उन्हें सयानी कहने लगे थे, । बचपन में ही वे समय की जितनी पाबंद थीं, अपना सामान संभालकर रखने में जितनी पटु थीं, और व्यवस्था की जितना कायल थीं, उसे देखकर चकित हो जाना पडता था| कहानी में सयानी बुआ के चरित्र को और अच्छे से समझने के लिए मनु भंडारी जी के द्वारा लिखी गई कहानी सयानी बुआ सुनते हैं माधवी शंकर जी की आवाज में
कहानी एक लड़की तनु की है- तनु एक ऐसे परिवार की लड़की है जिसके मां -बाप का स्वयं प्रेम विवाह हुआ था तनु की मां अपनी बेटी को यह बात बताया करती है किस प्रकार इस सिलसिले में उसने अपने पिता से मोर्चा लिया था आज आज यही स्थिति स्वयं उनकी है तनु भी एक लड़के शेखर से प्रेम करने लगी है जानते हैं कि क्या आज अभिभावक के रूप में इस बात को स्वीकार कर पाते हैं या इस बात से इनकार करते हैं
जब कवि सम्मेलन में नेताओं की ऐसी फजीहत देखी तो मेरे तन बदन में आग लग गई। मैंने अपनी कहानी द्वारा कवि महाशय को प्रत्युत्तर देने के लिए एक सर्वगुण संपन्न नेता को गरीब परिवार में जन्म दिया। किंतु गरीबी के कारण वह पथ से भ्रष्ट होकर चोर बन गया । मैंने उसको खत्म कर दिया ,और एक बार फिर हौसला करके एक नए नेता की नए परिवेश में रचना की। वह करोड़पति सेठ के घर जन्मा किंतु उसकी रईसी ने उसे पथ से डिगा दिया और मुझे उसको भी खत्म करना पड़ा। लेकिन अब फिर एक बार हिम्मत न जुटा पाई और मैं हार गई।
साधारणत: धोबियों का रंग साँवला पर मुख की गठान सुडौल होती है ।बिबिया ने यह विशेषता गेंहएँ रंग के साथ पाई है । उसका हँसमुख स्वभाव उसे विशेष आकर्षण देता है। सुडौल, गठीली शरीर वाली बिबिया को धोबिन समझना कठिन था। पर थी वह धोबिनों में भी सबसे अभागी धोबिन। अपना ही नहीं वह दूसरों का काम करके भी आनंद का अनुभव करती थी। पाँचवें वर्ष में ब्याह हो गया। पर गौने से पहले ही वर की मृत्यु ने इस संबंध को तोड़ दिया। जिस प्रकार उच्च वर्ग की स्त्री का गृहस्थी बसा लेना कलंक है उसी प्रकार नीच वर्ग की स्त्री का अकेला रहना सामाजिक अपराध है। कन्हैया ने उसका दोबारा ब्याह रचा दिया लेकिन——-
मनुष्य का मन बड़ा चंचल होता है। उसको वश में करने के लिए ना जाने कितने वर्षों जप- तप किए जाते हैं। सरहपाद ने भी मन को वश में कर लिया था । किंतु एक चौदह वर्षीय बालिका के आगे मन हार बैठे। तो क्या उनकी सारी सिद्धियाँ, सारी तपस्या व्यर्थ हो गई ?
“वरिष्ठ पत्रकार, फिल्म समीक्षक, और पद्मश्री सम्मानित शीला झुंझुनवाला ने 97 वर्ष की आयु में भी लेखन और समाजसेवा में अपनी सक्रियता को बनाए रखा है। उनका नया उपन्यास “”पतझड़ में वसंत”” वृद्ध व्यक्तियों की त्रासदी को बखूबी प्रस्तुत करता है।
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किसी की अमानत हड़प कर इंसान सुखी नहीं रह सकता। इसका उदाहरण है, बाबू हरिदास। मगन सिंह उनके ईद के पजावे पर काम करने वाला बालक था, जिस पर उन्हें बड़ी दया आती थी । किंतु जब उन्हें मदन सिंह के पुरखों द्वारा गाए गए खजाने का पता चला तो उनकी नियत खराब हो गई और उसी गड़े हुए खजाने के लालच में वे चल बसे। वही हाल उनके सुपुत्र प्रभु दास का हुआ किंतु वह भी मगन सिंह के खजाने को भोग ना सका और अंत में खजाना मगन सिंह को मिल गया।
साधारणत: धोबियों का रंग साँवला पर मुख की गठान सुडौल होती है ।बिबिया ने यह विशेषता गेंहएँ रंग के साथ पाई है । उसका हँसमुख स्वभाव उसे विशेष आकर्षण देता है। सुडौल, गठीली शरीर वाली बिबिया को धोबिन समझना कठिन था। पर थी वह धोबिनों में भी सबसे अभागी धोबिन। अपना ही नहीं वह दूसरों का काम करके भी आनंद का अनुभव करती थी। पाँचवें वर्ष में ब्याह हो गया। पर गौने से पहले ही वर की मृत्यु ने इस संबंध को तोड़ दिया। जिस प्रकार उच्च वर्ग की स्त्री का गृहस्थी बसा लेना कलंक है उसी प्रकार नीच वर्ग की स्त्री का अकेला रहना सामाजिक अपराध है। कन्हैया ने उसका दोबारा ब्याह रचा दिया लेकिन——-
कहानी ऐसी लड़की की है जिसके लिए विवाह जैसी बातों का कोई मतलब नहीं है | वह पूरी तरह लीव इन पार्टनर जो यूज एण्ड थ्रो में विश्वास करती है। उसके लिए डेटिंग एक फिजिकल डिमांड है , अपनी बायलोजिकल नीड्स को पूरा करने के लिए |उसके व्यवहार में यह बात क्यों शामिल हुई जानने के लिए सुनते हैं स्वाति तिवारी के द्वारा लिखी गई कहानी रिश्तों के कई रंग ,अंजू जेटली की आवाज में
Credit: Josh Talk
कौओं और उल्लुओं में स्वाभाविक बैर क्यों चला रहा है ?इसके पीछे एक रोचक कथा है| पंचतंत्र की कहानियों में सुनते हैं कहानी कौवे और उल्लू के बैर की कथा शिवानी आनंद की आवाज में…
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