खूनी खेल – महेश दुबे – नयनी दीक्षित
खेल खेलना तो सबको पसंद होता है बच्चों को, बड़ों को ,बूढ़ों को ,जवान को और फिर उस खेल को खेलने के लिए अगर 2500000 रुपए मिले तो क्या आप उसे खेल कहेंगे या कोई बिजनेस या फिर शौक? 2500000 का इनाम खुद को बचाने के लिए है या फिर दूसरे के मर्डर के लिए। ऐसे ही कुछ दिलचस्प कहानी है खूनी खेल, जिसमें खेल तो है 2500000रूपयों का इनाम भी है लेकिन यह खेल कोई ऐसा- वैसा खेल नहीं खूनी खेल है, जिसमें लोग को मजा़ भी ले रहे हैं और रकम भी दे रहे हैं लेकिन उस रकम का क्या मतलब , जिसका मतलब सिर्फ मौत है! कौन है वह छह खिलाड़ी ?क्या वह इस खेल में जीते? क्या शिकारी खुद शिकार हुआ? यह सारे रहस्य जानने के लिए सुनिए महेश दुबे के द्वारा लिखी गई कहानी खूनी खेल, नयनी दीक्षित की आवाज़ में…
धीरेंद्र अस्थाना की कहानी मुहिम में, समाज में जो निर्धन और धनी के बीच बीच में जो भेदभाव है| उसी के चलते एक बालक मन ना चाहते हुए भी किस तरह जाने -अनजाने में गलत रास्ते पर, क्राइम की राह पर चल पड़ता है?किस तरह उसके मन में क्राइम को सच समझ लेने की मुहिम पैदा हो जाती है
चट्टानो में आग – Ibnesafi ( इब्नेसफी) – Nayani Dixit
जासूसी कहानी चट्टानों में आग की पूरी कहानी एक मिलिट्री अफ़सर के इर्द-गिर्द घूमती है ।जो नशीली पदार्थों की तस्करी करने वाला गिरोह है। कर्नल ज़रग़ाम उस गिरोह में जब नहीं शामिल होना चाहता तो उसे धमकियाँ मिलनी शुरू हो जाती है ।ऐसे में परेशान ज़रग़ाम ,कैप्टन फ़ैयाज़ से मदद के लिए लिखता है और कैप्टन फ़ैयाज़ ,इमरान को उसकी मदद के लिए भेजता है क्या इमरान अपनी सूझबूझ से नकली दवाइयां बेचने वाले गिरोह को गिरोह का पर्दाफाश कर पाएगा पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं चट्टानों में आग, नयनी दीक्षित की आवाज में..
कहानी में दो कबाड़ उठाने वाले दो दोस्त लिबॉयस और मेलचॉन,एक स्त्री से पांच ट्रेंट में 5 फ्रै़ंक मिनट में एक गधा खरीदते हैं और सिर्फ अपने आमोद -प्रमोद के लिए उस गधे को बड़ी क्रूरतासे उसका वध करते हैं लेकिन इसके बाद कहानी में बहुत मरे हुए गधे से क्या करते हैं? इसे जानने के लिए सुनते हैं गाय दी मोपासां की कहानी गधा ,नयनी दीक्षित की आवाज में …
ब्रज की होली की बात किए बगैर होली की बात अधूरी है। देश-विदेश से लोग ब्रज की होली का आनंद उठाने आते हैं।इस कविता में छंद के माध्यम से आप भी आनंद लीजिए कि किस तरह कन्हैया और उनके साथी मिलकर गोपियों को परेशान कर उनके संग होली खेल रहे हैं?
विश्व रेडियोग्राफी दिवस पहली बार साल 2012 में मनाया गया था| इस दिन को मनाने की पहल यूरोपियन सोसाइटी ऑफ रेडियोलॉजी, रेडियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका और अमेरिकन कॉलेज ऑफ रेडियोलॉजी की तरफ से की गई थी|तभी से हर साल दुनियाभर में इस दिन को 8 नवंबर को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है|
धीरेंद्र अस्थाना की कहानी चीख में, एक अबोध बालक के मन पर मारपीट का प्रभाव उसके जीवन को कहां तक उधर- पुथल के रास्ते पर ले जा सकता है ? इन बातों का प्रभाव एक छोटे से बच्चे के मन पर पड़ता है जो युवा होने के बाद भी उसका पीछा नहीं छोड़ता और किस तरफ अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है | यह कहानी समाज के सामने एक प्रश्न रखती है कि क्या इस तरह की चीजों से निपटना सामाजिक दायित्व नहीं है?
शांति घोष का जन्म 22 नवंबर, 1916 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था| उनके पिता का नाम देवेंद्र नाथ घोष था, जो प्रोफेसर और राष्ट्रवादी थे इसलिए शांति घोष पर बचपन से ही राष्ट्रभक्ति का प्रभाव था| वह बचपन से ही क्रांतिकारियों के बारे में पढ़ा करती थीं इसलिए उनका रुझान स्वतंत्रता आंदोलन की तरफ बढ़ने लगा|
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