धीरेंद्र अस्थाना की कहानी मुहिम में, समाज में जो निर्धन और धनी के बीच बीच में जो भेदभाव है| उसी के चलते एक बालक मन ना चाहते हुए भी किस तरह जाने -अनजाने में गलत रास्ते पर, क्राइम की राह पर चल पड़ता है?किस तरह उसके मन में क्राइम को सच समझ लेने की मुहिम पैदा हो जाती है
धीरेंद्र अस्थाना के द्वारा लिखी गई एक कहानी जिसमें एक इंसान से जाने- अनजाने एक गलती हुई है जिसका उसे पश्चाताप भी है | उस गलती के कारण वह अपनों से नजर भी नहीं मिला पा रहा और आज उसकी उस गलती के कारण वह एक बड़ी बीमारी से ग्रसित हो चुका है |जिसे वह किसी को बता भी नहीं पा रहा है | ऐसे में वह इंसान क्या करें ?क्या वह इंसान घुट घुट कर यूं ही जीता रहे या फिर उसे फिर एक मौका मिलना चाहिए ?ऐसे ही प्रश्नों को लेकर कहानी का ताना-बाना बुना गया है सुनते हैं कहानी Meri Fernadis क्या तुम तक मेरी आवाज पहुंचती है? नयनी दीक्षित की आवाज में
तिलिस्मी दुनिया जहां बड़े लोग, बड़े व्यापार, बड़ी पार्टियां, बड़ी सुंदरता ,बड़ी मारकाट ,बड़ी सफलता और चकाचौंध कर देने वाली जिंदगी को पाने के लिए इंसान ऐसी नींद के आगोश में चला जाता है कि उसके कारण वह अपने सच्चे रिश्ते, सच्चा प्यार और यहां तक की अपने से भी प्यार करना भूल जाता है |वह समझ नहीं पाता है कि उस नींद के बाहर की दुनिया अब उसके लिए कितनी अजनबी हो चुकी है ?एक आम -इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी में आए हुए कई बदलावों को चित्रित करती हुई धीरेंद्र अस्थाना की कहानी नींद के बाहर ,सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में
कहानी “जो है उस धूसर सन्नाटे में “,धीरेंद्र अस्थाना जी ने बहुत ही सजीव ढंग से प्रस्तुत किया है कि आज की दुनिया में किसी भी तरह की संवेदना लोगों में नहीं बची है| खासतौर पर मीडिया, अखबार और किसी भी तरह के सोशल अकाउंट पर| आज की तारीख में किसी का जीना- मरना इस बात का मायने नहीं रखता कि वह इंसान इंपॉर्टेंट था या नहीं |लोग मरते हैं ,मर जाते हैं इस तरह की स्टेटमेंट हमें अक्सर सुनने को मिल जाते हैं |आज का समय जिसमें हम लोग जी रहे हैं, बहुत ही असंवेदनशील है | इस पूरे समाज में जो असंवेदनशील है ,उसमें एक ऐसा इंसान जो किसी एक की मृत्यु होने पर अपना खुद का व्यक्तित्व ही भूल जाता है इस बात पर आधारित है यह कहानी…
कहानी का नायक हरीश अपने अतीत से मानसिक रूप से लड़ रहा है |वास्तव में हरीश का अतीत उसे वर्तमान में नहीं रहने दे रहा| क्या है पूरी कहानी जानने के लिए हैं सुनते हैं धीरेंद्र अस्थाना के द्वारा लिखी गई कहानी भूत,नयनी दीक्षित की आवाज में…
कहानी जीवन की उस सत्यता से परिचय कराती है कि इंसान तभी अपनों की अहमियत का एहसास करता है, जब वह व्यक्ति उसके पास नहीं होता | कहानी में 62 वर्ष के राजीव निगम को जब सुबह यह पता चलता है कि उसकी पत्नी आरती रात में उसे और घर को छोड़कर कहीं चली गई है | तब राजीव निगम एहसास करता है कि आखिर 40 वर्ष साथ गुजारने के बाद, इस उम्र में आरती को यह कठोर फैसला क्यों लेना पड़ा होगा |धीरेंद्र अस्थाना की बेहद रोचक और दिल को छू लेने वाली कहानी है ‘पराधीन ‘,सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में…
खूनी खेल – महेश दुबे – नयनी दीक्षित
खेल खेलना तो सबको पसंद होता है बच्चों को, बड़ों को ,बूढ़ों को ,जवान को और फिर उस खेल को खेलने के लिए अगर 2500000 रुपए मिले तो क्या आप उसे खेल कहेंगे या कोई बिजनेस या फिर शौक? 2500000 का इनाम खुद को बचाने के लिए है या फिर दूसरे के मर्डर के लिए। ऐसे ही कुछ दिलचस्प कहानी है खूनी खेल, जिसमें खेल तो है 2500000रूपयों का इनाम भी है लेकिन यह खेल कोई ऐसा- वैसा खेल नहीं खूनी खेल है, जिसमें लोग को मजा़ भी ले रहे हैं और रकम भी दे रहे हैं लेकिन उस रकम का क्या मतलब , जिसका मतलब सिर्फ मौत है! कौन है वह छह खिलाड़ी ?क्या वह इस खेल में जीते? क्या शिकारी खुद शिकार हुआ? यह सारे रहस्य जानने के लिए सुनिए महेश दुबे के द्वारा लिखी गई कहानी खूनी खेल, नयनी दीक्षित की आवाज़ में…
ख़ौफ़नाक इमारत – Ibnesafi ( इब्नेसफी) – Nayani Dixit
क्या ऐसी कोई इमारत आपने देखी है जिसके अंदर बनी हुई सालों पुरानी कब्र से मुर्दा निकलकर लोगों का मर्डर कर दे? और आखिर वह मुर्दा ऐसा क्यों कर रहा है? क्या सचमुच उसके अंदर मुर्दा है या कहानी कुछ और ही है ?क्या इस सीरीज़ का जासूस इमरान इन लोगों का पता लगा पाएगा? कौन है यह मुर्दा? मुर्दा है या फिर कोई जिंदा व्यक्ति? कौन कातिल है और कौन शिकारी ? इब्रेसफ़ी की सस्पेंस और थ्रिलर से भरपूर कहानियों की सीरीज़ सुनिए ख़ौफ़नाक इमारत मे, नयनी दीक्षित की आवाज़ में…
सत्य की जीत के इस प्रसंग में द्युत सभा में युधिष्ठिर जब द्रौपदी को भी हार जाते हैं तब दुशासन द्वारा द्रौपदी का द्युत सभा में चीरहरण करने के आगे बढ़ता है पर अभी भी समस्त धर्माचार्य भीष्म पितामह ,द्रोणाचार्य ,विदुर सहित सभी इस दृश्य को देख मौन हैं ।तब द्रौपदी का चीत्कार पूरी सभा में गूंजता है ।द्वारिका प्रसाद महेश्वरी के द्वारा लिखी गई महाभारत में द्युत सभा का वर्णन नयनी दीक्षित की आवाज़ में
रश्मिरथी — रामधारी सिंह दिनकर
महाभारत के विराट पात्रों में कर्ण — एक ऐसा नाम, जिसकी कहानी केवल युद्ध की नहीं, बल्कि सम्मान, संघर्ष और आत्मसम्मान की गाथा है।
“रश्मिरथी” में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर कर्ण के जीवन को शब्दों में नहीं, बल्कि भावों में जीवंत कर देते हैं।
यह काव्य हमें उस वीर की यात्रा से रूबरू कराता है जो जन्म से नहीं, अपने कर्म और संकल्प से महान बनता है।
अपमान, दानवीरता, मित्रता और धर्म के द्वंद्व के बीच कर्ण का चरित्र हमें जीवन के कठिन प्रश्नों से सामना कराता है।
यह केवल एक काव्य नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, त्याग और वीरता का अद्भुत अनुभव है।
🎧 सुनिए “रश्मिरथी” — Gaatha पर
जहाँ शब्द नहीं, भावनाएँ जीवित होती हैं।
होली का नाम सुनते ही मन में कृष्ण और राधा की लीलाएं उभर आती हैं। इसी भाव को जब मीराबाई ने अपने भजन में व्यक्त किया है तो उसमें चार -चांद और लग जाते हैं। किस तरह मीराबाई ने कृष्ण की होली का बखान किया है ?आइए सुनते हैं…https://gaathaonair.comwp-content/uploads/2021/03/Hori-khelat-hain-girdhari-by-meerabai..wav
एक ऐसा गुरु- शिष्य की कहानी जहां गुरु श्रापित है, कि जब तक उसे कोई योग्य शिष्य नहीं मिल जाता तब तक उसकी आत्मा इसी संसार में अटकी रहेगी क्या उसकी आत्मा को मुक्ति मिल पाती है ? और यदि मिल पाती है तो ,क्या होता है उस शिष्य का यह सब जानने के लिए सुनते हैं कहानी ” ब्रह्मराक्षस का शिष्य “
कहानी एक नौजवान लड़के चंदन की है जिस पर फिल्मों का प्रभाव पड़ा है इसी के चलते एक लड़की तारा से प्रेम करने लगता है किंतु क्या होता है इनकी प्रेम कहानी में आ गई जानने के लिए सुनते हैं अमरकांत के द्वारा लिखी गई कहानी लड़का- लड़की ,अंजू जेटली की आवाज में
मेला – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कहानी में प्रयागराज में लगे कुंभ मेले का दृश्य है जहां दूर-दूर से लाखों की संख्या में लोग अपने पाप को धोने के लिए संगम में डुबकी लगाने आते हैं। क्या मात्र डुबकी लगाकर पाप से मुक्त हुआ जा सकता है ?क्या वास्तव में अध्यात्म को भी एक पेशे की दृष्टि से अपनाया जाता है? आस्था ,परंपरा इन सब बातों का अद्भुत संगम है इस कहानी में। इसी बात को रोचक ढंग से आधार बनाकर ममता कालिया ने कहानी मेला का ताना-बाना बुना है,जिसे शेफ़ाली कपूर ने उतने ही अनोखे अंदाज़ से अपनी आवाज़ से निखारा है।
इंसान की उस संकीर्ण मानसिकता को दर्शाती यह कहानी जब कभी अपने खून के रिश्ते वास्तव में कोई जिसने गलत काम किया हो और एक ऐसा रिश्ता जो आपके लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देंलेकिन आपका खून का रिश्ता ना हो के बीच में कोई चुनाव करना होता है तो इंसान सहज भाव से अपने खून के रिश्ते का चुनाव कर लेता है और एक पल में ही दूसरे रिश्ते को ठुकरा देता है भीष्म साहनी के द्वारा लिखी गई कहानी साग मीट सुमन वैद्य जी की आवाज में
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