धरोहर बीसवीं शब्दांजलि कीर्तिशेष रचनाकार श्री संतोष कुमार वर्मा “फ़न” जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनकी कवयित्री पुत्री सपना सोनी जी के साथ ।
धरोहर सत्रहवीं शब्दांजलि यशशेष कवि निर्दोष हिसारी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनकी सुपुत्री कवयित्री अल्पना सुहासिनी जी साथ
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये कल सुनते हैं अलीगढ़ से श्री अशोक अंजुम जी को। आज का दौर समाज को, व्यक्ति को और परिवार को बाँटने का सा दौर हो गया है। पूरा समाज धर्म, जाति और दल के अनेक धड़ों में बंटा हुआ है। एक व्यक्ति दूसरे को फूटी आंखों नहीं सुहा रहा है। ऐसे में कुछ लोग हैं जो इन खाइयों को पाटने में लगे हुए हैं। वे नहीं चाहते कि इंसान से इंसान अलग हो जाये। वे नहीं चाहते कि हम धर्म, जाति या मज़हब के नाम पर एक दूसरे का खून बहाने को आतुर हो उठें। साहित्य में सामाजिक समता के उन चंद पैरोकारों में श्री अशोक अंजुम जी का भी नाम बड़े आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। उनके गीत समता के ध्वजवाहक तो हैं ही साथ साथ भारतीय समाज और राजनीति की अनेक विसंगतियों पर टिप्पणी करने से भी नहीं चूकते। वे अपने गीतों से आपकी संवेदना को चरम पर पहुँचा भी सकते हैं, और व्यंग्य गीतों से आपको मुस्कुराकर पीछे बहुत कुछ सोचने पर विवश भी कर सकते हैं।
बैसवारा उत्तर प्रदेश की वह भूमि जिसने भारत के इतिहास में कलम और तलवार दोनों से अपना विशेष स्थान बनाया है। मंचीय कविता के लोग कहते हैं कि अगर बैसवारे के श्रोताओं ने आपको मन से सुन लिया तो आप पूरे हिंदुस्तान में कहीं भी बहुत अच्छे से सुने जाएंगे। महाप्राण निराला जी, सुमन जी, आचार्य नंद दुलारे बाजपेयी जी, सनेही जी जैसे अद्भुत साहित्यकारों को अपने अंक में बिठाने वाली इस वसुंधरा के एक अप्रतिम गीतकार से हम परिचय करेंगे #शिवोहम_साहित्यिक_मंच के #धरोहर की द्वितीय शब्दान्जलि में। स्मृतिशेष शिव बहादुर सिंह भदौरिया जी नवगीत के अति विशिष्ट रचनाकर हुए हैं। नवगीत दशक से लेकर नवगीत का कोई भी वृहद समवेत संकलन आपकी उपस्थिति के बिना पूर्ण नहीं माना जाता। उनके गीत ग्राम्यांचल की मिट्टी से लेकर महानगर की अधुनिकता तक को अपने मे समेट कर चलते हैं।
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये कल सुनते हैं डॉ कुँवर बेचैन जी को। वर्तमान की मंचीय काव्य परंपरा में अग्रणी, सुमधुर प्रस्तोता डॉ कुंवर बेचैन जी वास्तव में गीतकुंवर हैं। उनके गीतों का वैविध्य, और प्रतीक योजना तो अद्भुत है ही साथ में उनका स्वर उसमें और अधिक सौंदर्य वृद्धि कर देता है। वे गीतों के साथ लोकरंजन व लोकमंगल दोनों की कार्य सम्पादित करने में सक्षम हैं। आइये हिंदी गीतिकाव्य के अलंकारिक स्वर को सुनें
शिवोहम_साहित्यिक_मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये कल सुनें कानपुर नगर से वरिष्ठ गीतकार श्री हरीलाल मिलन जी को। कानपुर सदैव से साहित्यिक गतिविधियों में उर्वर रहा है। अन्य शहरों के इतर कानपुर की एक अपनी विशेषता है कि कानपुर में अनेक साहित्यिक संस्थाओं के माध्यम से होने वाली कवि गोष्ठियों में आपको ऐसे रचनाकार मिल जाएंगे जिन्हें मंच पर आप दीपक लेकर भी खोजें तो शायद नहीं मिलेंगे। अनेक ऐसे नाम आज भी कानपुर में हैं जिन्हें मंच का कोई लालच नहीं, कोई लिप्सा नहीं परंतु उनकी साहित्य साधना अति उत्कृष्ट है। वे बिना प्रशंसा की आस में सतत अपने सहित्यिक पथ पर गतिमान हैं। श्री हरीलाल मिलन जी कानपुर की साहित्यिक खेप की धरोहर हैं। वे निरंतर अपनी साहित्य साधना के जाज्वल्यमान सूर्य से शब्दों की उर्वरा धरती को जीवन रश्मि प्रदान करते रहे हैं। वे अनेक कालजयी रचनाओं के रचनाकार हैं। उनका राष्ट्रभाषा गान पूरे हिंदुस्तान नें एक स्वर में अनेक रेडियो स्टेशनों के माध्यम से गुनगुनाया है।
धरोहर नवीं शब्दांजलि यशशेष गीतकार देवल आशीष जी की रचनाएं और स्मृतियाँ सुनिये उनके शिष्य श्री धीरज मिश्र जी और समीक्षक मुनेन्द्र कुमार शुक्ल जी के साथ।
धरोहर इक्कीसवीं शब्दांजलि कीर्तिशेष रचनाकार बृज शुक्ल घायल जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनके साहित्यकार पुत्र डॉ प्रवीण शुक्ल जी के साथ ।
शिवोहम सहित्यिक मंच धरोहर की प्रथम शब्दांजलि कालजयी रचनाकार डॉ उर्मिलेश शंखधर जी की कविताएं और स्मृतियाँ सुनिये उनकी पुत्री श्रीमती सोनरूपा विशाल जी के साथ।
धरोहर आठवीं शब्दांजलि कालजयी रचनाकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कविवर पं़ गोविन्द प्रसाद तिवारी जी की रचनाएं और स्मृतियाँ सुनिये उनके पुत्र श्री अभय तिवारी जी के साथ।
धरोहर उन्नीसवीं शब्दांजलि कीर्तिशेष रचनाकार पं. प्रेमनाथ द्विवेदी “रामायणी”जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनके पुत्र डाॅ.कमलेश द्विवेदी के साथ ।
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